Honesty Girl Betul: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। कलयुग के इस दौर में जब चंद रुपयों के लिए लोग अपनों से मुंह मोड़ लेते हैं, सगे भाइयों तक में रुपयों के लिए विवाद हो जाता है, तब मात्र आधा घंटे पहले मिली एक अजनबी युवती दूसरी युवती का रुपयों से भरा पर्स लौटाने बाइक से यात्री बस का लगभग ५ किलोमीटर पीछा करती है। बस को रूकवाकर वह युवती को उसका रुपयों से भरा पर्स लौटा देती है। यह वाक्या देख कर बस में मौजूद सभी यात्रियों के मुंह से यही निकलता है कि आज भी जिंदा है इंसानियत और ईमानदारी। पर्स लौटाने वाली युवती और जिसका पर्स छूटा था, वे दोनों एक-दूसरे का नाम तक नहीं जानती, लेकिन पर्स लौटाने युवती ने जो तत्परता दिखाई उससे उस अनजान युवती के प्रति सभी का मन श्रद्धा से भर गया। 

आमतौर पर हम कहीं यात्रा पर जाते हैं तो रास्ते में बस-ट्रेन, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन में कई लोगों से मुलाकात होती है। जब तक साथ रहते हैं तब तक बातचीत भी होती है, लेकिन उनसे दूर होते ही अधिकतर लोग एक-दूसरे को भूल जाते हैं। ऐसा जीवन में लगभग प्रतिदिन ही होता है, लेकिन सारनी निवासी एक महिला और उनकी दो बेटियों को शुक्रवार रात्रि में बस स्टैंड बैतूल में बस का इंतजार करने के दौरान मिली एक अनजान युवती हमेशा याद रहेगी। मात्र लगभग आधा घंटे की मुलाकात और बातचीत के बाद उस युवती ने ईमानदारी की ऐसी मिसाल पेश की, जिसे वे शायद ही कभी भूल पाएं।

आधा घंटे साथ किया बस का इंतजार

सारनी निवासी सूने परिवार की महिला अपनी दो बेटियों के साथ साकादेही जाने के लिए शुक्रवार रात्रि लगभग साढ़े आठ बजे बैतूल बस स्टैंड पहुंची। उन्हें भोपाल की ओर जाने वाली बस का इंतजार था। वे बस स्टैंड में बेंच पर बैठ गई। उनके पास ही एक लगभग २० वर्षीय युवती भी बैठी थी। उसे भी भोपाल मार्ग पर पाढर जाने बस का इंतजार था, लेकिन जब काफी देर तक बस नहीं आई तो पाढर के समीप ग्राम डोलीढाना निवासी युवती ने अपने भाई को बाइक से लेने बुलवा लिया।

पर्स छोड़कर बस में बैठी मां-बेटी

रात्रि लगभग सवा नौ बजे बैतूल बस स्टैंड पर पांढुर्णा से इंदौर जाने वाली वर्मा बस आई। इस बस में सारनी निवासी महिला और उनकी दोनों बेटियां बैठ गईं। जबकि डोलीढाना निवासी युवती ने अपने भाई को बुलवा लिया था तो वह बस में सवार नहीं हुई। बस लगभग ५ किलोमीटर दूर सोनाघाटी फॉरेस्ट बेरियर पहुंची, तब बेटी को याद आया कि उसका पर्स नहीं है। उसने साथ यात्रा कर रही अपनी मां और बहन से पर्स के बारे में पूछा तो उनके पास भी पर्स नहीं था। युवती ने बताया पर्स में लगभग ७ हजार रुपए नकद के साथ ही एटीएम कार्ड, आधार कार्ड जैसे जरूरी डाक्युमेंट भी थे। मां और दोनों बेटियों ने पर्स वापस मिलने की उम्मीद छोड़ दी थी, क्योंकि पर्स बस स्टैंड जैसे आवाजाही वाले स्थान पर छूटा था।

बस रूकवाकर लौटाया पर्स 

मां और दोनों बेटी के साथ ही बस में सवार अन्य यात्री पर्स की ही बात कर रहे थे तभी एक बाइक चालक ने सोनाघाटी के पास बस को ओवर टेक कर बस रूकवाई। बाइक से एक युवती उतरकर बस के गेट के पास पहुंची। बस कंडक्टर संतोष साहू को लगा युवती को कहीं जाना होगा। उसने गेट खोला तो युवती बस में चढ़ी और पूछा साकादेही जाने के लिए बैठी दो युवती और महिला कहा है, वे बस स्टैंड पर अपना पर्स भूलकर आ गए हैं। युवती ने तुरंत ही पर्स वापस किया और बस से उतरकर बाइक से चली गई। बस में मौजूद जिसने भी यह वाक्या देखा उसका मन युवती की ईमानदारी को लेकर श्रद्धा से भर गया। चलती बस में अनजान युवती द्वारा बस रूकवाकर पर्स लौटाने पर सभी अचानक कह उठे कि इस दौर में भी ईमानदारी जिंदा है।