Betul Book Fair Delay: पुस्तक मेले को लेकर अफसर उदासीन, पालकों को नहीं मिल रही राहत
Betul Book Fair Delay: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। एक अप्रैल से नया शिक्षण सत्र शुरू हो जाएगा। नई कक्षाओं की पुस्तक-कॉपियां खरीद कर ही पालक बच्चों को स्कूल भिजवाते हैं। ऐसे में यदि समय रहते पुस्तक मेले लग जाएं तो पालकों को लाभ मिल सकता है, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारी इसमें कोई रूचि ही नहीं ले रहे हैं। इसका प्रमाण यह है कि जिले में अभी तक किसी भी ब्लॉक में पुस्तक मेला नहीं लगा है।
निजी स्कूलों में चलने वाली पुस्तकें बेहद महंगी होती है। पुस्तक मेला में पुस्तक-कॉपियों पर छूट देना होता है। यदि समय रहते पुस्तक मेलों का आयोजन हो जाए तो पालक इन मेलों से पुस्तकें खरीद सकते हैं, जिनसे उन्हें काफी राहत मिल सकती है। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा इस बात के मद्देनजर 12 मार्च को ही जिले के सभी बीईओ और बीआरसीसी को 3 दिनों के भीतर पुस्तक मेला के आयोजन से संबंधित बैठक करने के आदेश दिए थे। इन बैठकों में सभी अशासकीय शालाओं के प्राचार्यों और सभी स्थानीय प्रकाशकों तथा पुस्तक विक्रेताओं को बुलाना था। बैठक लेकर की गई कार्यवाही का पालन प्रतिवेदन भी देने को कहा गया था, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि आज तक इस बारे में कहीं से भी कोई पालन प्रतिवेदन नहीं आया।
पुस्तकों की जानकारी भी जुटाना था
इससे भी पहले सभी बीईओ और बीआरसीसी को अशासकीय शालाओं में सत्र 2026-27 हेतु प्रचलित पाठ्य पुस्तकों की जानकारी भी एकत्रित करने को कहा गया था। बताया जाता है कि यह जानकारी भी न तो डीईओ कार्यालय भेजी गई है और न ही एकत्रित की गई है।
बैठक में तय होना था मेला की तारीख
प्राचार्यों व पुस्तक विक्रेताओं की बैठक में पुस्तक मेला के आयोजन हेतु तिथि और तारीख का निर्धारण होना था। अभी तक बैठकें ही नहीं हुई तो तारीख तय होने का सवाल ही नहीं उठता। इससे साफ जाहिर है कि अधिकारियों को पालकों के हितों की कितना चिंता है।
सत्र शुरू होने के बाद क्या लाभ
नया शिक्षण सत्र शुरू होने के बाद पुस्तक मेला लगाने का कोई औचित्य ही नहीं रह जाता है, क्योंकि सत्र शुरू होने के पहले सभी पालक पुस्तकें खरीद चुके होते हैं। ऐसे में विभाग केवल रस्म अदायगी और दिखावा करने भर पुस्तक मेला लगाता है। यह केवल इस साल की कहानी नहीं है, बल्कि हर साल ऐसा ही होता है। अभिभावकों को इससे कोई फायदा नहीं मिल पाता।

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