आखिर मऊ के इस कुंड में ऐसा क्या चमत्कार है? स्नान करते ही दूर होती है चर्म रोग की समस्या, अनोखी मान्यता
उत्तर प्रदेश धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध माना जाता है और हर जिलों में विभिन्न प्रकार के मंदिर स्थापित हैं और हर मंदिरों का एक अलग ही विशेषता है. कहीं मंदिरों के देवी-देवताओं की विशेषता है, तो कहीं मंदिर के बाहर बने तालाब की अलग मान्यता है. उसी का उदाहरण है देवलास स्थित सूर्य मंदिर के बाहर बने सूर्य कुंड की कहानी. यहां इस सूर्यकुंड में जो स्नान करता है, उसकी हर प्रकार की बीमारियां दूर होती हैं.
श्री राम के उपासना से बना यह सूर्यकुंड
कि यह स्थान महर्षि देवल मुनि की तपोस्थली माना जाता है, जिसके कारण इसका नाम देवलास पड़ा. भगवान राम ने वनवास के दौरान पहले दिन इसी स्थान पर विश्राम किया और सूर्य की उपासना की. इसलिए इसे बालार्क सूर्य मंदिर भी कहा जाता है.
बाल्मीकि की ओर से रचित रामायण में भी इस बात का उल्लेख मिलता है कि भगवान राम ने तमसा नदी के किनारे अपने पहले पड़ाव के रूप में इसी स्थान को चुना था. सूर्यकुंड को औषधि और धार्मिक महत्व प्राप्त है. ऐसी मान्यता है कि इस कुंड में स्नान करने से विभिन्न बीमारियों से मुक्ति मिलती है. विशेषकर चर्म रोग विशेष रूप से दूर होता है.
छठ पर्व पर विशेष महत्व
छठ पर्व पर इस तालाब में हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं और इसी तालाब में अर्ध देकर पूजा पाठ करते हैं, क्योंकि छठ पर्व पर सूर्यदेव की पूजा की जाती है और सूर्य कुंड को विशेष महत्व दिया जाता है. मान्यता है कि इस सूर्यकुंड में स्नान कर यहां बने देवल मुनि के मंदिर में पूजा पाठ करने से चर्म रोग जैसी बीमारियां दूर होती हैं.
मान्यता है कि सच्चे मन से इस तालाब में यदि आप एक बार भी स्नान कर पूजा-पाठ करते हैं, तो चर्म रोग जैसी आपकी बीमारी दूर हो सकती है. हालांकि यह आपकी आस्था के ऊपर महत्व रखता है कि आप यहां कब तक स्नान कर अपनी बीमारी से निजात पा सकते हैं.
रविवार को स्नान करने से दूर होता है चर्म रोग
सूर्यकुंड नाम से प्रसिद्ध तालाब में रविवार को स्नान करने से चर्म रोग दूर होता है. इस तालाब के साथ-साथ यहां अगल-बगल लगे नलकूपों के भी पानी में एक खास बात देखी जाती है. यदि इस पानी को कुछ देर तक बाहर रख दिया जाए, तो पानी में पीलापन होने लगता है, क्योंकि इस पानी में एक अलग ही गुण पाया जाता है, जिसकी वजह से चर्म रोग ठीक होने में मदद मिलती है.
इस तालाब के बगल में बने सूर्य मंदिर और विक्रमादित्य की चौखट की भी काफी मान्यता है. यहां सच्चे मन से पूजा-पाठ करने से मन्नतें पूरी होती हैं. यही वजह है कि यहां सात दिवसीय मेले का भी आयोजन किया जाता है. डाला छठ पर मेले का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश की कोने-कोने से लोग आएंगे.

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