भोपाल मेट्रो में दिल्ली जैसा सिग्नलिंग सिस्टम, 800 करोड़ का टेंडर जारीT
भोपाल। सिग्नलिंग सिस्टम का काम शुरू भोपाल में मेट्रो संचालन को तेज और सुचारू बनाने की दिशा में अहम प्रगति हुई है. सुभाष नगर से एम्स के बीच प्रायोरिटी कॉरिडोर पर अब सिग्नलिंग सिस्टम स्थापित करने का काम शुरू कर दिया गया है. करीब 30 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 800 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया गया था, जिसमें यह पहला चरण माना जा रहा है।
एक ट्रैक पर संचालन से बढ़ा इंतजार
फिलहाल सिग्नलिंग सिस्टम के अभाव में मेट्रो ट्रेनों का संचालन केवल एक ही ट्रैक यानी डाउन ट्रैक पर किया जा रहा है. इसी वजह से ट्रेनों के बीच का अंतराल करीब 75 मिनट रखा गया है, जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है. वर्तमान में एक ही ट्रैक पर ट्रेन दोनों दिशाओं में चलाई जा रही है, यानी जो ट्रेन जाती है, वही उसी ट्रैक से वापस लौटती है. दूसरी ओर अप ट्रैक अभी पूरी तरह संचालन के लिए तैयार नहीं हो पाया है, जिससे पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हो पा रहा है।
सिग्नलिंग सिस्टम की अहम भूमिका
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी मेट्रो सिस्टम में सिग्नलिंग सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. यही तकनीक ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने, उनकी गति नियंत्रित करने और संचालन को स्वचालित बनाने में मदद करती है. इसके बिना एक साथ कई ट्रैकों पर प्रभावी संचालन संभव नहीं हो पाता, जिससे सेवाएं सीमित रह जाती हैं।
सेफ्टी ट्रायल के बाद मिलेगा ग्रीन सिग्नल
सिग्नलिंग का काम पूरा होने के बाद मेट्रो प्रबंधन एक बार फिर कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) को निरीक्षण के लिए आमंत्रित करेगा. सभी आवश्यक परीक्षण और सुरक्षा मंजूरी मिलने के बाद ही अप ट्रैक पर भी नियमित संचालन शुरू किया जाएगा।
दिल्ली मेट्रो जैसी तकनीक लागू होगी
भोपाल मेट्रो में वही अत्याधुनिक सिग्नलिंग तकनीक लागू की जा रही है, जिसका उपयोग दिल्ली मेट्रो में किया जाता है. इस तकनीक के लागू होने के बाद दोनों ट्रैकों पर एक साथ ट्रेनें चलाई जा सकेंगी और ट्रेनों के बीच का अंतराल कम होने से उनकी संख्या और आवृत्ति में तेजी आएगी।

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