Betul Delimitation 2026: परिसीमन की आहट के बीच बैतूल में 7 विधानसभा सीटों का प्रस्ताव, कांग्रेस की नई रणनीति
Betul Delimitation 2026: : बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। केन्द्र सरकार द्वारा २०२९ लोकसभा चुनाव के पहले महिला आरक्षण लागू करने और २०११ की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने की सुगबुगाहट से देशभर में राजनैतिक हलचल तेज हो गई है। प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस द्वारा भी परिसीमन के लिए राजनैतिक मेपिंग करने संगठन स्तर पर तैयारी शुरू कर दी गई थी। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के पार्टीकल मेपिंग परिसीमन के अनुसार जिले की भौगोलिक स्थिति और जनसंख्या के आधार पर जिले में सात विधानसभा सीट प्रस्तावित की गई हैं। जिसमें मौजूदा पांच विधानसभा के साथ ही २००८ के परिसीमन में समाप्त की गई मासोद विधानसभा को फिर से अस्तित्व में लाने और वर्तमान में घोड़ाड़ोंगरी विधानसभा में आने वाले चिचोली को नए विधानसभा क्षेत्र के रूप में प्रस्तावित किया गया है। जिले में ६ विधानसभा होती है या ७, यह तो परिसीमन के बाद ही तय होगा।
विधानसभा का आधार २०११ की जनगणना को माना जा सकता है। जिसके अनुसार जिले में यदि ६ विधानसभा होती है तो अनुसूचित जाति वर्ग के लिए एक, अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए दो सीट आरक्षित हो सकती है वहीं तीन सीट अनारक्षित रहने की उम्मीद है। वहीं यदि जिले में सात विधानसभा बनती है तो अनुसूचित जाति के लिए एक, अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए ३ सीटें आरक्षित हो सकती हैं, वहीं ३ सीटें अनारक्षित रहेंगी। ३३ प्रतिशत महिला आरक्षण होने की स्थिति में जिले की कोई भी दो विधानसभा सीट महिला के लिए आरक्षित होना तय माना जा रहा है।
चिचोली-मासोद नई विधानसभा प्रस्तावित
परिसीमन के पूर्व चुनाव आयोग द्वारा सभी प्रमुख राजनैतिक पार्टियों से संभावित परिसीमन बुलाया जाता है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा पालिटिकल मैपिंग परिसीमन के लिए जिले के कांग्रेस नेता मनोज आर्य को प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया हैं। इसके साथ ही कांग्रेस द्वारा संगठन स्तर पर ब्लॉक, उप ब्लॉक और मंडलम स्तर पर पॉलिटिकल मैपिंग करने प्रस्ताव बनाया गया था। चूंकि पूर्व में २०२७ की जनगणना को आधार मानकर परिसीमन करने की बात कही जा रही थी और लगभग २ लाख मतदाताओं (१.८० लाख से २.२० लाख तक) को एक विधानसभा में रखने की चर्चा थी, जिससे कांग्रेस द्वारा जिले में सात विधानसभा प्रस्तावित की गई थी। जिसमें जिले की वर्तमान ५ विधानसभाओं के साथ ही चिचोली और मासोद के रूप में दो नई विधानसभा प्रस्तावित की गई थी।
७ विधानसभा इस प्रकार प्रस्तावित
कांग्रेस द्वारा क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति के आधार पर सात विधानसभाओं का जो खाका प्रस्तावित किया गया है उसमें जिले के १० में से कोई भी पूरा ब्लॉक किसी एक विधानसभा में नहीं आ रहा है। सभी ब्लॉक में दो या तीन विधानसभा के क्षेत्र आएंगे। सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित विधानसभा में घोड़ाडोंगरी विधानसभा से चिचोली ब्लॉक के साथ ही शाहपुर ब्लॉक का लगभग आधा क्षेत्र कट जाएगा वहीं घोड़ाडोंगरी ब्लॉक की भी कुछ पंचायतें हट जाएंगी। वहीं वर्तमान में आमला विधानसभा में शामिल किया जाएगा। चिचोली विधानसभा में माचना नदी के किनारे का क्षेत्र, बैतूल ब्लॉक के खेड़ी के आगे ताप्ती नदी के किनारे का क्षेत्र भीमपुर ब्लॉक का लगभग २० फीसदी क्षेत्र और हरदा जिले की सीमा तक का क्षेत्र प्रस्तावित किया है। भैंसदेही विधानसभा में भीमपुर ब्लॉक का ८० फीसदी हिस्सा एवं भैंसदेही ब्लॉक का सांवलमेंढा क्षेत्र छोड़कर पूरा ब्लॉक प्रस्तावित है। बैतूल विधानसभा में बैतूल ब्लॉक का डहरगांव तक का क्षेत्र, घोड़ाडोंगरी ब्लॉक का पाढर क्षेत्र, बैतूल नगर पालिका, बैतूलबाजार नगर परिषद सहित बैतूल ब्लॉक की ग्राम पंचायतें प्रस्तावित की गई है।
आमला विधानसभा में खेड़लीबाजार तक आमला ब्लॉक का क्षेत्र एवं सारनी नगरपालिका को शामिल करना प्रस्तावित किया है। मुलताई विधानसभा में खेड़ली बाजार के आगे आमला ब्लॉक के गांव आधा पट्टन ब्लॉक, मुलताई नगर पालिका मुलताई ब्लॉक की पंचायतें प्रस्तावित की गई हैं। मासोद विधानसभा में प्रभातपट्टन ब्लॉक का आधा क्षेत्र आठनेर ब्लॉक का हिड़ली-बोरपेंड क्षेत्र और भैंसदेही ब्लॉक के सांवलमेंढा क्षेत्र को प्रस्तावित किया है।
यह हो सकती है आरक्षण की स्थिति
केन्द्र सरकार द्वारा २०१७ की जनगणना को आधार मानकर परिसीमन आरक्षण और और महिला आरक्षण की बात कहीं जा रही है। साल २०११ की जनगणना के हिसाब से जिले की जनसंख्या १५ लाख ७५ हजार ३६२ थी। जनसंख्या वृद्धि की दर प्रतिवर्ष लगभग १.२९ प्रतिशत मानी गई थी। उस समय जिले में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या ४२.३४ फीसदी अनुसूचित जाति की जनसंख्या १०.११ फीसदी थी वहीं ओबीसी और सामान्य सहित अन्य सभी वर्गों की जनसंख्या ४७.५५ फीसदी थी। इस स्थिति में आरक्षण में जिले की एक विधानसभा अनुसूचित जाति, २ विस अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित थी वहीं २ विधानसभा अनारक्षित थी। यदि जिले में परिसीमन के बाद ६ सीटें होती हैं तो एक अनारक्षित विधानसभा बढ़ जाएगी वहीं यदि ७ विधानसभा सीटें होती है तो एक अनुसूचित जनजाति और बढ़कर ३ हो सकती है वहीं अनारक्षित विधानसभा भी ३ हो सकती है। अंतिम निर्णय परिसीमन की अधिकृत घोषणा होने के बाद ही तय होगा।

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