Betul Property Registration: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। इस साल लोगों में प्रॉपर्टी खरीदने को लेकर कुछ खास उत्साह नजर नहीं आ रहा है। अन्य सालों के विपरीत इस बार न नवरात्र का कोई फर्क लोगों पर पड़ रहा है और न ही एक अप्रैल से जमीन महंगी होने का ही डर दिख रहा है। इन्हीं सब कारणों से इस साल मिले लक्ष्य से जिला काफी पीछे चल रहा है। 

नवरात्र का पर्व बेहद शुभ माना जाता है। यही कारण है कि इन दिनों में लोग बड़े पैमाने पर प्रॉपर्टी की खरीदी करते हैं। यही कारण है कि पिछले वर्षों में नवरात्र पर्व के दौरान पंजीयन कार्यालयों में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता था। इसके अलावा अभी मार्च महीने का आखरी सप्ताह चल रहा है। एक अप्रैल से नई गाइड लाइन लागू होने पर जिले की अधिकांश लोकेशनों पर जमीन के दाम बढ़ जाते हैं। यही वजह है कि मार्च के महीने में कम दामों पर रजिस्ट्री करवाने के लिए भी लोग बड़ी संख्या में पंजीयन कार्यालय पहुंचते हैं। इस साल भी एक अप्रैल से नई गाइड लाइन लागू होना है। इसमें भी अधिकांश जगह जमीन महंगी होना है। इसके अलावा अभी नवरात्र भी चल रहे हैं, लेकिन इन दोनों का ही कहीं कोई असर नजर नहीं आ रहा है। 

दिन भर में हो रही महज इतने पंजीयन

बैतूल के उप पंजीयक राहुल बागड़े बताते हैं कि इस साल 16 मार्च के बाद से रोजाना 40 से 45 दस्तावेजों का पंजीयन ही हो रहा है। इनमें से आधी संख्या ही सेल डीड याने जमीन की खरीद-बिक्री की है। इनसे प्रतिदिन लगभग 30 लाख रुपये की आमदनी विभाग को हो रही है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि यह बीते सालों के नवरात्र पर्व और मार्च के आखरी सप्ताह के मुकाबले बेहद कम है। अन्य वर्षों में इन मौकों पर यह स्थिति रहती थी कि सुबह से देर रात तक अधिकारियों-कर्मचारियों को फुर्सत नहीं रहती थी। जबकि इस साल अधिकांश समय खाली बैठे रहना पड़ रहा है। 

इस साल लक्ष्य पूरा होना बेहद मुश्किल 

यही कारण भी है कि इस साल लक्ष्य पूरा होना बेहद मुश्किल हो गया है। बैतूल उप पंजीयक कार्यालय को इस साल 64 करोड़ का लक्ष्य मिला था। इसके विपरीत अभी तक 55 करोड़, 77 लाख की आय ही हो सकी है। अभी तक यहां कुल 10573 दस्तावेजों का पंजीयन हो सका है। इनमें से 5500 सेल डीड हैं। इस साल जो परिस्थितियां हैं, उनमें दिया गया लक्ष्य किसी भी हालत में पूरे होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। 

जिले की भी ठीक यही है स्थिति 

यह स्थिति केवल उप पंजीयक कार्यालय बैतूल की ही नहीं है, बल्कि पूरे जिले की यही स्थिति है। जिले को इस साल 113 करोड़ रुपये का लक्ष्य मिला था। इसके मुकाबले अभी तक 88.26 करोड़ रुपये की आय ही प्राप्त हो सकी है। जिले की स्थिति भी उप पंजीयक कार्यालय की तरह ही है। जिले को दिया गया लक्ष्य भी इस साल पूरा होने की उम्मीद नहीं है। इस साल 21 मार्च तक कुल 17281 दस्तावेजों का पंजीयन हो सका है, जबकि बीते साल 21 मार्च तक 18101 दस्तावेजों का पंजीयन हो चुका था। 

छुट्टियों में भी खुले रखे जा रहे दफ्तर 

वित्त वर्ष की समाप्ति के पहले के आखरी दिन होने से विभाग द्वारा छुट्टियों के दिनों में भी जिला पंजीयक और उप पंजीयक कार्यालय खुले रखे जा रहे हैं। इसका उद्देश्य यही है कि छुट्टियों के दिन रजिस्ट्री आदि कराने से वंचित न रहे और विभाग को भी ज्यादा से ज्यादा राजस्व प्राप्त हो सके। हालांकि विभाग की इस कवायद का भी ज्यादा असर नजर नहीं आ रहा है। छुट्टियों के दिन तो और भी कम लोग रजिस्ट्री कराने के लिए पहुंच रहे हैं। 

इन कारणों से नहीं प्रॉपर्टी में रूचि 

जानकार सूत्रों का कहना है कि अमेरिका-इजरायल-ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण लोग भावी स्थितियों को लेकर चिंतित हैं। वे प्रॉपर्टी आदि की खरीदी कर मोटी रकम अपने पास से नहीं जाने देना चाहते हैं। इसके बजाय वे यह राशि अपने पास में ही रखना चाह रहे हैं ताकि भविष्य में कभी जरुरत पड़ी तो वे उनके पास पैसा मौजूद रहे। इसके अलावा सोना-चांदी के बीच में बेतहाशा बढ़े दामों के कारण लोग प्रॉपर्टी के बजाय सोना-चांदी में ज्यादा फायदा देख कर उनकी खरीदी बेहतर समझ रहे हैं।