LPG supply shortage rural india: 45 दिन में मिल रही गैस: ग्रामीणों पर सबसे ज्यादा असर, 80% आबादी परेशान
LPG supply shortage rural india: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। मीडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के चलते रसोई गैस की किल्लत का सबसे अधिक नुकसान ग्रामीण क्षेत्र के निवासियों को हो रहा है। जिले में लगभग 20 फीसदी आबादी ही शहरों में निवास करती हैं, बाकी 80 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत हैं। गैस संकट के चलते सभी गैस कंपनियों द्वारा शहरी क्षेत्र में रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग 25 दिन में और ग्रामीण क्षेत्र में 45 दिन में की जा रही है जिससे ग्रामीण परिवारों को गैस सिलेंडर मिलने के बाद अगला सिलेंडर लेने 48 से 50 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। यही स्थिति शहरी क्षेत्र में रहने वाले उज्ज्वला योजना के हितग्राहियों की भी है। उन्हें भी 45 दिन के बाद ही गैस सिलेंडर मिल पाएगा। यदि युद्ध लंबा खींच गया तो ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं एक बार फिर चूल्हा फूंकने को मजबूर हो जाएंगी। ग्रामीण परिवारों ने गैस सिलेंडर वितरण में ग्रामीण और शहरी भेदभाव मिटाने की अपील की है।
युद्ध के चलते बदले नियम
ईरान पर अमेरिका और इजरायल द्वारा हमला करने के बाद युद्ध शुरू होते ही देश में गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। जिससे रसोई गैस वितरण भी गड़बड़ा गया है। युद्ध शुरू होने के पूर्व देश में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के उपभोक्ता रसोई गैस सिलेंडर लेने के 21 दिन बाद अगला सिलेंडर बुक कर सकते थे। जिसकी डिलीवरी भी उसी दिन या अगले दिन हो जाती थी। गैस की किल्लत बढ़ने पर सरकार ने गैस वितरण में बदलाव कर दिया है। नए नियम के अनुसार शहरी क्षेत्र के रसोई गैस उपभोक्ता सिलेंडर लेने के 25 दिन बाद अगला सिलेंडर बुक कर सकते हैं। जिसकी डिलीवरी 2-3 दिन में हो रही है। लेकिन, सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं के साथ भेदभाव करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में रसोई गैस बुकिंग का समय सिलेंडर लेने के 45 दिन बाद का कर दिया है। इस निर्णय से ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं को 48 से 50 दिन में गैस सिलेंडर मिल रहा है। 45 दिन के पूर्व बुकिंग नहीं होने से उपभोक्ता परेशान हो रहे हैं, लेकिन उन्हें 45 दिन बाद की ही तारीख मिल रही है।
जिले में गांव में रहती है 80 फीसदी आबादी
बैतूल जिले में शहरी और ग्रामीण आबादी में बड़ा अंतर है। 2011 की जनसंख्या के अनुसार जिले में मात्र 10 शहरी क्षेत्र हैं वहीं गांवों की संख्या 1399 हैं। जिले की कुल आबादी 15 लाख 75 हजार 362 है, जिसमें से 80 प्रतिशत से अधिक 12 लाख 66 हजार 211 आबादी ग्रामीण क्षेत्र में रहती है। वहीं शहरी क्षेत्र में मात्र 19.62 फीसदी आबादी ही निवास करती है। शहरी आबादी मात्र 3 लाख 9 हजार 151 ही है। रसोई गैस के वितरण के नए नियम से जिले की मात्र 19.62 फीसदी परिवारों को ही 25 दिन बाद रसोई गैस मिल रही है। जबकि 80 फीसदी परिवारों को रसोई गैस लेने 48 से 50 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है।
2.10 लाख उज्ज्वला हितग्राहियों की भी 15 दिन बाद होगी बुकिंग
जिले में रसोई गैस के कुल 3 लाख 47 हजार उपभोक्ता हैं। इनमें से 2 लाख 10 हजार उपभोक्ता उज्ज्वला योजना के तहत बनाए गए हैं। वहीं 1 लाख 37 हजार सामान्य उपभोक्ता हैं। इनमें से शहरी और ग्रामीण क्षेत्र दोनों के उपभोक्ता शामिल हैं। नए नियम के अनुसार उज्ज्वला योजना के हितग्राहियों के रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग भी 45 दिन बाद की जा रही है। जिससे 2.10 उज्ज्वला हितग्राही भी 45 दिन बाद ही बुक हो रही है। 4 लोगों के परिवार में एक रसोई गैस सिलेंडर औसतन एक माह चलता है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के साथ ही उज्ज्वला हितग्राहियों को भी फिर चूल्हा का उपयोग करने मजबूर होना पड़ेगा।

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