fuel supply shortage india: पेट्रोल-डीजल संकट की आहट: सप्लाई पर ब्रेक, अब लिमिट में मिलेगा ईंधन
fuel supply shortage india: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध के चलते पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की आपूर्ति पर जबर्दस्त असर पड़ा है। बीते कई दिनों से जिले भर में लोग रसोई गैस के लिए परेशान हो ही रहे हैं, अब पेट्रोल और डीजल के लिए भी परेशानी शुरू हो सकती है। हालांकि पेट्रोल-डीजल की किल्लत नहीं है, लेकिन ऑइल कंपनियों ने घाटे से बचने के लिए सप्लाई की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। अब पेट्रोल पंपों का स्टॉक निल होने के बाद ही डीजल-पेट्रोल दिया जा रहा है। इसके अलावा डीजल के लिए अधिकतम सीमा भी तय कर दी गई है।
गौरतलब है कि मध्य पूर्व में युद्ध शुरू होने के बाद से पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की आपूर्ति पर भारी असर पड़ा है। इसके अलावा क्रूड ऑइल के रेट भी वैश्विक स्तर पर बेतहाशा बढ़ रहे हैं। सरकार ने रसोई गैस के भाव तो शुरूआती दिनों में ही बढ़ा दिए थे, लेकिन सरकार की मजबूरी यह है कि कई राज्यों में चुनाव के चलते वह फिलहाल पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ाने की स्थिति में नहीं है। सरकार द्वारा रेट नहीं बढ़ाने से ऑइल कंपनियों को घाटा हो रहा है। इस घाटे को कम से कम रखने के लिए अब ऑइल कंपनियों ने पेट्रोल पंपों को सप्लाई होने वाले पेट्रोल-डीजल की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।
अब स्टॉक निल होने पर ही मिलेगा
अभी तक यह व्यवस्था थी कि पेट्रोल पंप संचालकों द्वारा राशि जमा करते ही उनके टैंकरों को डीजल-पेट्रोल उपलब्ध करा दिया जाता था। कंपनियां यह नहीं पूछती थी कि स्टॉक कितना है। जितनी मात्रा में पेट्रोल-डीजल चाहिए होता था, वह उपलब्ध करा दिया जाता था। अब ऐसा नहीं हो रहा है। पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि अब कंपनियों द्वारा स्टॉक देखा जा रहा है। पेट्रोल पंप पर स्टॉक निल होने के बाद ही पेट्रोल-डीजल दिया जा रहा है।
एक व्यक्ति को मात्र 300 लीटर ही
अभी तक पेट्रोल-डीजल के लिए कोई लिमिट तय नहीं की गई थी। पेट्रोल पंप पर जाने पर जितना डीजल या पेट्रोल मांगा जाता था, उतना उपलब्ध करा दिया जाता था। अब ऐसा भी नहीं होगा। ऑइल कंपनियों द्वारा पंप संचालकों को मौखिक निर्देश दे दिए गए हैं कि अब एक व्यक्ति को अधिकतम 300 लीटर डीजल ही दिया जाएं। इससे ज्यादा डीजल एक व्यक्ति को नहीं दिया जा सकेगा।
यह व्यवस्था भी हो सकती है लागू
बताते हैं कि गुजरात में एक दिन में एक व्यक्ति को 100 रुपये से ज्यादा का पेट्रोल नहीं दिया जा रहा है। फिलहाल बैतूल या मध्यप्रदेश में ऐसी कोई व्यवस्था तो लागू नहीं की गई है, लेकिन संभव है कि यहां भी यह व्यवस्था लागू की जा सकती है। बताया जाता है कि यह सारी कवायद केवल इसलिए की जा रही है कि डीजल-पेट्रोल का कम से कम उपयोग हो, ताकि खपत कम हो और कंपनियों का घाटा भी ज्यादा न हो। खपत जितनी अधिक होगी, कंपनियों का घाटा भी उतना ही अधिक होगा।
जिले में संचालित हैं 144 पेट्रोल पंप
जिले में कुल 144 पेट्रोल पंप हैं। इनमें से सबसे ज्यादा 40 पेट्रोल पंप बैतूल विकासखंड में हैं। इनके अलावा घोड़ाडोंगरी में 16, मुलताई में 16, चिचोली 8, भीमपुर में 5, भैंसदेही में 11, प्रभातपट्टन में 9, शाहपुर में 6, आठनेर में 10 और आमला विकासखंड में 22 पेट्रोल पंप संचालित हैं। ऑइल कंपनियों की इस नीति से पेट्रोल पंप संचालकों को परेशानी होना शुरू हो गई हैं।
शुरू होगी कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई
विगत 13 दिनों से बंद पड़ी कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई शुरू करने के आदेश राज्य शासन ने जारी कर दिए हैं, हालांकि जिला स्तर पर अभी तक आदेश पहुंचे नहीं हैं। जारी आदेश के अनुसार होटल, रेस्टोरेंट और कैटर्स को 9 प्रतिशत कमर्शियल एलपीजी सप्लाई दी जाएगी, जबकि ढाबा और स्ट्रीट फूड वेंडर्स को 7 प्रतिशत गैस मिलेगी। अन्य उद्योगों को भी सिलेंडर देने के निर्देश दिए गए हैं।
कारोबार पर पड़ा था खासा असर
कमर्शियल गैस की सप्लाई ठप रहने से होटल-रेस्टोरेंट पर खासा असर पड़ा था। कई होटल बंद होने की कगार पर पहुंच गए थे, तो कई जगह मेन्यू बदलना पड़ा। कई स्थानों पर तो डीजल भट्टी और इंडक्शन के जरिए काम चलाना पड़ा। छोटे ढाबे और स्ट्रीट फूड वेंडर्स सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। चौपाटी में स्थित कई दुकानों को कुछ दिन बंद तक रखना पड़ा।
घरेलू गैस के लिए भी हो रही दिक्कत
मध्य पूर्व में तनाव शुरू होने के बाद से लोगों को घरेलू गैस सिलेंडर के लिए भी खासा परेशान होना पड़ रहा है। सरकार ने पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी है और सर्वर पर ज्यादा दबाव बढ़ने से ओटीपी जनरेट नहीं हो रहे हैं। वहीं बिना ओटीपी के सिलेंडर दिया नहीं जा रहा है। इससे लोग और ज्यादा पैनिक हो रहे हैं। दूसरी ओर ओटीपी को लेकर लगातार विवाद की स्थिति बन रही है।
विवादों से बचने नहीं घूम रही गाड़ियां
इन विवादों से बचने के लिए पहले के मुकाबले बहुत कम गाड़ियां घर पहुंच सेवा देने के लिए घूम रही है, जिससे एजेंसियों के दफ्तरों और गोदामों पर लोग पहुंचकर कतार लगा रहे हैं। सिलेंडर बुकिंग के लिए शहरी क्षेत्र के लिए 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्र के लिए 45 दिन की लिमिट भी तय कर दी गई है। इन सबसे लोगों को सिलेंडर लेने के लिए खासा परेशान होना पड़ रहा है। कुछ लोग घरेलू सिलेंडरों का व्यवसायिक उपयोग भी कर रहे हैं।

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