Betul Mandi Issue: मंडी में नहीं सुधरे हालात, पैसे देने पर ही हो रही तुलाई; हम्मालों की वसूली जारी
Betul Mandi Issue: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। कृषि उपज मंडी बैतूल में व्यवस्था दुरूस्त करने शनिवार को भारसाधक अधिकारी द्वारा व्यापारियों, हम्मालों, किसान संघ प्रतिनिधियों और मंडी प्रबंधन की ली गई बैठक का सोमवार को मंडी खुलने के बाद कुछ भी असर दिखाई नहीं दिया। मंडी परिसर में व्यापारियों के बोरे तो जैसे के तैसे जमे हुए ही हैं, हम्मालों ने भी बिना रुपए लिए तुलाई नहीं की।
मंडी आने वाले मंझोले और छोटे व्यापारियों ने तो हमेशा की तरह नगद राशि देकर तुलाई करवा ली, लेकिन रुपये देने में आनाकानी करने वाले किसानों के ढेर छोड़ दिए गए। बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार हम्मालों ने जिस शेड में पहले बोली लगी, उसी शेड से तुलाई शुरू की, लेकिन जिन किसानों ने रुपए दिए, उनकी ही तुलाई की। मंडी में शाम तक आधी से अधिक उपज की तुलाई नहीं हो पाई थी। सोमवार को चार दिन के अवकाश् के बाद मंडी शुरू होने से मंडी में आवक भी आम दिनों से अधिक हुई है। जिससे तुलाई का कार्य देर रात तक चलेगा।
कृषि उपज मंडी में किसानों को हो रही परेशानी को देखते हुए भारतीय किसान संघ ने ६ मार्च को ज्ञापन सौंपकर मंडी की व्यवस्था दुरूस्त करने ज्ञापन सौंपा था। इसके बावजूद समस्याएं जस की तस रहने पर १७ मार्च को मंडी परिसर में धरना भी दिया था। ५ घंटे धरना देने के बाद किसान संघ ने बैठक में चर्चा करने के आश्वासन पर धरना समाप्त कर दिया था।
२१ मार्च को मंडी के भारसाधक अधिकारी और बैतूल एसडीएम डॉ. अभिजीत सिंह ने मंडी प्रबंधन के साथ ही किसान संघ पदाधिकारियों, व्यापारियों की बैठक लेकर व्यवस्था बनाने लगभग दो घंटे चर्चा की। हालाकि बैठक में ही किसान संघ पदाधिकारियों की लगभग चुप्पी और व्यापारियों के हावी रहने से लग रहा था कि व्यवस्था बदलना नामुमकिन ही है, जो दिखाई भी दे रहा है।
लगातार चार दिन मंडी में नीलामी नहीं होने के बावजूद व्यापारियों के लगभग ४० हजार बोरों के चौकड़े मंडी परिसर में ही लगे हुए थे, जिन्हें उठवाने में मंडी प्रबंधन नाकाम रहा। सोमवार को चार दिन के अवकाश के बाद मंडी खुली तो मक्का सहित गेहूं, सोयाबीन की बंपर आवक हुई। बैठक में निर्णय लिया गया था कि जिस शेड में पहले नीलामी होगी, उपज की तुलाई भी उसी शेड से और क्रम से की जाएगी।
हम्मालों ने तुलाई की शुरूआत तो उसी शेड से की, लेकिन क्रम से नहीं की। जिन किसानों और व्यापारी नुमा किसानों ने हम्मालों को तुलाई के लिए रुपए दिए, उनकी उपज की ही तुलाई की गई। जिन्होंने रुपए देने में आनाकानी की, उनके ढेर छोड़ दिए गए। बाद में इन किसानों ने हम्मालों की मिन्नतें की और रुपए दिए, तब ही उनकी उपज की तुलाई हो पाई।
सोमवार लगभग २६ हजार बोरे से अधिक मक्का सहित ३६ हजार ४७५ बोरे की आवक हुई, जिससे सोमवार शाम तक लगभग आधे बोरे की तुलाई हो पाई है। मंडी में व्यवस्था जस की तस रहने से अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय किसान संघ क्या कदम उठाता है या फिर संघ के पदाधिकारी भी चुप रहकर किसानों के साथ हो रहे अन्याय को सहन कर जाते हैं।

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