Betul Mandi Farmers Problem: मंडी में किसानों की फिर अनदेखी: 40 हजार बोरे नहीं हटे, सड़क पर खड़ी करनी पड़ी उपज भरी गाड़ियां
Betul Mandi Farmers Problem: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। मंडी परिसर में किसानों की परेशानी दूर करने और मंडी में व्यवस्थाएं बनाने शनिवार को भारसाधक अधिकारी सभी पक्षों की ली गई बैठक का लगता है न व्यापारियों पर कोई असर पड़ा और न ही मंडी प्रबंधन पर। इसका नतीजा यह रहा कि गुरुवार से रविवार तक लगातार चार दिनों तक अवकाश होने और मंडी में नीलामी नहीं होने के बावजूद शेडों और मंडी परिसर से व्यापारियों के बोरे नहीं हटे।
मंडी सचिव द्वारा रविवार शाम तक मंडी से व्यापारियों के सभी बोरे उठाने का आश्वासन देने के बावजूद इस पर अमल होते नजर नहीं आया। रविवार शाम को भी मंडी के अधिकांश शेडों के साथ ही परिसर में भी व्यापारियों के बोरों के चौकड़े लगे हैं। मंडी परिसर में व्यापारियों के 40 हजार से अधिक बोरे रखे हुए हैं, जिससे रविवार को अपनी उपज लेकर आने वाले किसानों को उपज भरे वाहन सड़क पर खड़े करना पड़ रहा है। रविवार शाम को ही मंडी के गेट से मुख्य सड़क तक वाहनों की कतार लग गई है और मुख्य मार्ग पर ट्रैफिक जाम होने लगा है।
व्यापारियों के आगे नतमस्तक हो चुके मंडी प्रबंधन को किसानों की शायद कोई चिंता ही नहीं है। व्यापारियों द्वारा नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई करने के तमाम प्रावधान मंडी बोर्ड द्वारा बनाए गए हैं। इसके बावजूद बैतूल कृषि उपज मंडी प्रबंधन द्वारा नियमों को ताक पर रखकर व्यापारियों का सपोर्ट किया जाता है।
मंडी परिसर में व्यापारियों द्वारा खरीदी करने के 24 घंटे में अपने बोरे उठवाने का प्रावधान है। नहीं उठाने पर व्यापारियों से 10 रुपये प्रति बोरा प्रति दिन के हिसाब से जुर्माना वसूल करना चाहिए, लेकिन मंडी प्रबंधन कभी भी व्यापारियों से जुर्माना वसूल नहीं करता है। भले ही व्यापारी 4 दिन में बोरे उठाए या 10 दिन में, उक्त सुविधा व्यापारियों को मंडी प्रबंधन द्वारा दी जा रही है। इसके लिए भले ही किसानों को सड़क पर उपज रखनी पड़े या गेट के बाहर उतारनी पड़े, इससे मंडी प्रबंधन को कोई लेना-देना नहीं है।
भारतीय किसान संघ ने भी किसानों की आवाज उठाने की औपचारिकता निभाते हुए मंडी परिसर में 5 घंटे धरना दे दिया। शनिवार को हुई बैठक में मंडी परिसर से व्यापारियों के चौकड़े उठाने पर चर्चा तक नहीं की, जिससे व्यापारियों के हौसले बुलंद हैं। शायद इसी का परिणाम है कि चार दिन का अवकाश होने के बावजूद मंडी परिसर में व्यापारियों के लगभग 40 हजार बोरे अभी भी रखे हुए हैं। किसानों को अब यह समझ नहीं आ रहा है कि अपनी समस्या लेकर किससे गुहार लगाए क्योंकि किसानों के हित की बात करने का दिखावा तो सभी करते हैं, लेकिन किसानों को मंडी में हो रही परेशानियों से निजात दिलाने से सब कन्नी काट लेते हैं, जिससे किसान स्वयं को ठगा सा महसूस करते हैं।

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