Betul Night Cleaning Scam: रात्रिकालीन सफाई के नाम पर लाखों का खेल! 100 की जगह 30 कर्मचारी, फर्जी हाजरी का आरोप
Betul Night Cleaning Scam: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। शहर में सफाई व्यवस्था के नाम पर नगर पालिका द्वारा हर महीने लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद शहर में साफ-सफाई तो कहीं नजर नहीं आती, अलबत्ता कुछ लोगों के वारे-न्यारे जरुर हो रहे हैं। घर-घर से कचरा कलेक्शन के नाम पर जहां ओम साईं विजन कंपनी तगड़ा माल सूत रही है वहीं दूसरी ओर रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था तो टोटल फर्जीवाड़े का ही दूसरा नाम है। बताया जाता है कि इस रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था के नाम पर नपा के एक जनप्रतिनिधि द्वारा जमकर मलाई खाई जा रही है।
नगर पालिका के सफाई अमले में सैकड़ों कर्मचारी और संसाधन मौजूद हैं और बैतूल शहर भी कोई बहुत विशाल क्षेत्र में नहीं फैला है। इसके अलावा शहर में ऐसे व्यवसायिक और बाजार क्षेत्र तो उंगलियों पर गिनने लायक हैं, जहां पर रात्रिकालीन सफाई की जरुरत होती है। ऐसे में यह रात्रिकालीन सफाई भी नगर पालिका अपने ही अमले से यह कार्य भी बेहद आसानी से करवा सकती थी और कई सालों से यह हो भी रही थी। यह बात अलग है कि इसमें किसी को कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिल पा रहा था। यही कारण है कि यह काम भी ठेके पर दे दिया गया है। यह काम भोपाल की आउटसेट सर्विसेज कंपनी को मिला है उसे 8 लाख रुपये से अधिक की राशि हर महीने दी जा रही है। कंपनी को रात्रिकालीन सफाई के लिए 100 कर्मचारी रखने हैं।
महज 30-35 कर्मचारी कर रहे काम
बताया जाता है कि रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था के नाम पर तो सीधे-सीधे लूट ही हो रही है। इस काम के लिए नगर पालिका द्वारा 8 लाख रुपये से अधिक की राशि का हर महीने भुगतान किया जा रहा है जबकि कंपनी द्वारा 100 कर्मचारियों की जगह 30-35 कर्मचारियों से ही काम कराया जाकर तगड़ा चूना लगाया जा रहा है। पूरा शहर छान मारने पर भी रात्रिकालीन सफाई के नाम पर कहीं भी 100 तो दूर 50 कर्मचारी भी नहीं मिलेंगे।
रोजाना लगाई जा रही फर्जी हाजरी
सूत्रों का दावा है कि रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था के नाम पर अधिकांश फर्जी हाजरी भरी जा रही है। यह फर्जी हाजरी जिन लोगों के नाम पर भरी जा रही है, वे नगर पालिका के ही एक जनप्रतिनिधि के लोग बताए जा रहे हैं। जाहिर है कि ओम साईं विजन की तरह इस कंपनी से भी नगर पालिका की गहरी सांठगांठ है। यदि ऐसा नहीं होता तो इतने लंबे समय तक यह फर्जीवाड़ा नहीं चल रहा होता।
न कभी निरीक्षण न कभी सत्यापन
इस गठजोड़ का ही नतीजा है कि आज तक किसी जनप्रतिनिधि या अधिकारी ने इस पर आपत्ति नहीं ली। यदि पूरे 100 कर्मचारियों से नियमानुसार कार्य कराने की जरा भी मंशा होती तो नगर पालिका के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और अधिकारी रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था का औचक निरीक्षण करते और सत्यापन करते कि वास्तव में 100 कर्मचारी काम कर रहे हैं, लेकिन ऐसा आज तक कभी नहीं किया। यही कारण है कि लोग खुलकर आरोप लगाते हैं कि दीया तले ही अंधेरा है।
पार्षदों के विरोध को तवज्जो नहीं
रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था को लेकर कुछ पार्षद नपा की बैठकों में सवाल भी उठाते रहते हैं, इसके बावजूद न उनके विरोध को कोई तवज्जो मिलती है और न ही उनकी मांग के अनुसार कभी जांच-पड़ताल ही होती है। इसके विपरीत कंपनी को लगातार भुगतान किया जाता रहता है। इस पूरे कार्यप्रणाली से इस संबंध में लगाए जा रहे आरोपों की पुष्टि ही होती है। यदि इस पूरी व्यवस्था में किसी जनप्रतिनिधि को खास लाभ नहीं मिलता होता तो इस फर्जीवाड़ा की ओर से वे आंखें मूंदे नहीं रहते।

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