►निर्देशों के अनुरूप बने एनएचएआई के प्लान को मिली सभी अनुमतियां, स्टे हटते ही शुरू होगा काम 
►वन्यजीवों की निर्बाध आवाजाही के लिए बनेंगे 10 एनिमल अंडरपास और 1 एनिमल ओवरपास 

Baretha Ghat Four Lane Highway Project: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। जिलेवासियों के लिए भी बड़ी खुशखबरी है। बीते कई सालों से अटके पड़े बरेठा घाट पर फोरलेन के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। यहां फोरलेन बनाने के लिए एनएचएआई ने हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप न केवल प्लान बना लिया है, बल्कि वाइल्ड लाइफ बोर्ड और केंद्र सरकार से सभी जरुरी अनुमतियां भी प्राप्त कर ली है। अब हाईकोर्ट का स्टे औपचारिक रूप से हटते ही यहां निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। जल्द ही यह 20.9 किलोमीटर लंबा सेक्शन भी फोरलेन हाईवे बन जाएगा। इससे इस पूरे नेशनल हाईवे पर फर्राटे भरते हुए सफर हो सकेगा। साथ ही हादसों में कमी आएगी। 

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल से प्राप्त जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग-46 (एनएच-46 ) मध्यप्रदेश का एक प्रमुख उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर है। यह ग्वालियर से बैतूल तक लगभग 634 किलोमीटर की लंबाई में विस्तृत है। यह हाईवे मध्यप्रदेश का सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग है। यह भोपाल-नागपुर कॉरिडोर का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो बैतूल होते हुए गुजरता है। इस प्रोजेक्ट में लगभग 21 किलोमीटर का एक महत्वपूर्ण भाग शेष रह गया था। इसमें केसला रेंज, भौंरा रेंज तथा बरेठा घाट के तीन खंड (कुल 20.91 किमी) सम्मिलित हैं। ये सभी खंड वन्यजीव, विशेषकर टाइगर मूवमेंट कॉरिडोर के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में आते हैं। इसी के चलते इन खंडों में निर्माण कार्य को 1 अप्रैल 2022 को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा जारी स्टे आदेश के पश्चात स्थगित कर दिया गया था। 

सभी जरुरी अनुमतियां हो चुकी प्राप्त 

इस प्रोजेक्ट के लिए विभिन्न वैधानिक एवं पर्यावरणीय, विशेष रूप से वन्यजीव संबंधी मंजूरियों की आवश्यकता थी। इसे देखते हुए हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए एनएचएआई द्वारा सभी आवश्यक प्रक्रियाएं निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी की गई हैं। प्रोजेक्ट हेतु वाइल्ड लाइफ बोर्ड एवं केंद्र सरकार से सभी आवश्यक मंजूरियां प्राप्त हो चुकी हैं। अब उच्च न्यायालय द्वारा स्टे के औपचारिक रूप से हटने के संबंध में आदेश की प्रतीक्षा की जा रही है। जैसे ही न्यायालय से इस संबंध में निर्देश प्राप्त होंगे, एनएचएआई द्वारा शेष बचे सेक्शन में निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाएगा।

फोरलेन में बदलेगी मौजूदा 2 लेन रोड

इस प्रोजेक्ट को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है, ताकि आने वाले वर्षों में भी यह मार्ग सुरक्षित, सुगम और भरोसेमंद बना रहे। वर्तमान में मौजूद 2-लेन सड़क को 4-लेन में विकसित किया जाएगा, जिससे सड़क की चौड़ाई बढ़ेगी और बढ़ते ट्रैफिक दबाव से राहत मिलेगी। रोजाना लगने वाले लंबे जाम की समस्या कम होगी और वाहनों की आवाजाही अधिक तेज और सुचारू हो सकेगी। घुमावदार और संकरी सड़क को बेहतर डिजाइन के साथ सुधारा जाएगा, जिससे सफर पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक बनेगा।

नए प्रोजेक्ट में होंगे इतने स्ट्रक्चर 

इस सेक्शन में चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स का स्थायी समाधान किया जाएगा। इसके लिए विशेष रेक्टिफिकेशन प्लान तैयार किया गया है, जिसके तहत 3 माइनर ब्रिज बनाए जाएंगे। साथ ही 38 बॉक्स कलवर्ट पर कार्य किया जाएगा, जिसमें पुनर्निर्माण, चौड़ीकरण और आवश्यक सुधार शामिल हैं। ट्रैफिक को निर्बाध और सुरक्षित बनाने के लिए 1 रेलवे अंडर ब्रिज, 2 रोड ओवर ब्रिज और 1 व्हीकल अंडरपास का निर्माण भी प्रस्तावित है। इससे सड़क की क्षमता बढ़ेगी और ट्रैफिक बिना रूकावट के चलते रहेगा। 

वन्यजीव संरक्षण को दी प्राथमिकता 

बरेठा घाट और अन्य संवेदनशील वन क्षेत्र खंडों के लिए एनएचएआई ने जो प्लान  तैयार किया है, उसमें वन्यजीव और प्रकृति के संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। इस योजना के तहत मार्ग में विशेष वाइल्ड लाइफ मिटिगेशन स्ट्रक्चर का निर्माण किया जाएगा। जिसमें कुल 10 एनिमल अंडरपास और 1 एनिमल ओवरपास शामिल हैं। इनमें जरुरी बदलाव किए गए हैं, ताकि वन्यजीवों का प्राकृतिक आवागमन सुरक्षित रहे और उनके आवास पर विपरीत प्रभाव न पड़े।

सुरक्षा के लिए किए जाएंगे यह उपाय 

इस पूरे हाईवे में ट्रैफिक साइन, रोड मार्किंग और अन्य आवश्यक संकेत लगाए जाएंगे। घाट सेक्शन में एनजे टाइप क्रैश बैरियर, रंबल स्ट्रिप और रेनवॉटर हार्वेस्टिंग जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं। साथ ही पूरे मार्ग में नोइज बैरियर और चेन लिंक फेंसिंग के साथ बम्बू क्रीपर का उपयोग किया जाएगा, ताकि शोर और अन्य पर्यावरणीय प्रभाव कम हो और वन्यजीव सुरक्षित रहे।

ब्लैक स्पॉट्स का सुधार बेहद जरुरी

बरेठा घाट का यह सेक्शन अभी केवल दो लेन का है, जिसके कारण यहां घुमावदार (कर्व) रास्ते और सीमित चौड़ाई के चलते यातायात संचालन में कठिनाई होती है। भारी वाहनों और बढ़ते ट्रैफिक दबाव के कारण इस क्षेत्र में अक्सर लंबा जाम लग जाता है, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ता है और दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है। इस मार्ग पर दो प्रमुख ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जहां बार-बार दुर्घटनाएं होने की स्थिति बनती है। 

तीन सालों में गवां चुके इतने लोग जान

पुलिस थानों के रिकॉर्ड के अनुसार जनवरी 2022 से दिसंबर 2024 के बीच इस सेक्शन में कुल 51 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन दुर्घटनाओं में 18 लोगों की मृत्यु हुई है, जबकि लगभग 62 लोग घायल या गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह भी संभावना है कि कई छोटी या अनरिपोर्टेड दुर्घटनाएं आधिकारिक रिकॉर्ड में शामिल नहीं हो पाई हो। 

बेहद महत्वपूर्ण हैं एनएच-46 

बैतूल-भोपाल नेशनल हाईवे (एनएच-46) बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। यह मार्ग एनएच-44, एनएच-27, एनएच-52 और एनएच-47 जैसे अन्य प्रमुख नेशनल हाईवे से जुड़ता है। ग्वालियर-ब्यावरा खंड आगरा-बॉम्बे रोड (एबी रोड) का हिस्सा है, और एशियाई हाईवे 47 (एएच-47) में शामिल होने के कारण क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस प्रोजेक्ट का शेष सेक्शन इटारसी से बैतूल तक का सेक्शन राज्य की राजधानी क्षेत्र के करीब (इटारसी/नर्मदापुरम) को दक्षिणी सीमा और मध्य भारत के हृदय क्षेत्र से जोड़ता है। इटारसी एक बड़ा रेल जंक्शन है, जबकि बैतूल-महाराष्ट्र की सीमा के पास स्थित महत्वपूर्ण शहर है।

व्यापार-पर्यटन में भी विशेष भूमिका 

इस हाईवे व्यापार और औद्योगिक विकास में भी मुख्य भूमिका निभाता है। यह हाईवे राज्य के भीतर और बाहर माल एवं वस्तुओं के निर्बाध परिवहन को सक्षम बनाता है। जिससे मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र समेत कई उद्योगों के लिए यह मार्ग अत्यंत लाभकारी है। वहीं इस मार्ग से सांची स्तूप, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, उदयगिरि गुफाएं, भीमबेटका रॉक शेल्टर्स, सेठानी घाट, भोजपुर मंदिर, तवा डैम और बिजासन माता मंदिर सलकनपुर जैसी प्रमुख धार्मिक, पर्यटन और सांस्कृतिक स्थलों तक पहुंच आसान होती है।

राष्ट्रीय जनादेश ने सबसे ज्यादा उठाया था यह मुद्दा 

बरेठा घाट पर हाईवे निर्माण बेहद जरुरी था, लेकिन सबसे ज्यादा समय तक यही मार्ग अटका रहा। इसके साथ ही शुरू हुए बैतूल-नागपुर हाईवे का काम कब का पूरा हो चुका है और बैतूल-भोपाल हाईवे का भी अधिकांश काम हो चुका है। यही कारण है कि जनता के लिए इसके महत्व को देखते हुए राष्ट्रीय जनादेश ने हमेशा यह मुद्दा उठाया और जनता की आवाज बना। आखिरकार राष्ट्रीय जनादेश के प्रयास भी रंग लाए और इसके निर्माण का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है।