Betul Tender Controversy: ओम साईं विजन और नपा की सांठगांठ! हर बार टेंडर में अकेली कंपनी ही क्यों बनती है पात्र?
Betul Tender Controversy: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। बीते कई सालों से शहर में कचरा कलेक्शन का कार्य कर रही ओम साईं विजन कंपनी और नगर पालिका के अफसरों के बीच गजब का गठजोड़ है। इस शानदार गठजोड़ का ही नतीजा है कि कंपनी को न केवल मनमर्जी से काम करने की खुली छूट मिली है, बल्कि अफसर रात-दिन इसी कवायद में जुटे रहते हैं कि किसी और कंपनी को मौका ही नहीं मिले। इस बार भी अफसरों ने ऐसी फील्डिंग कर डाली है कि केवल ओम साईं विजन कंपनी को ही आगे भी ठेका मिलता रहे।
ओम साईं विजन कंपनी द्वारा शहर में घर-घर से कचरा कलेक्शन का कार्य बीते लगातार 7-8 सालों से किया जा रहा है। नपा के अफसरों और कंपनी के कर्ताधर्ताओं के बीच इतना शानदार तालमेल है कि नगर पालिका के अफसर किसी और कंपनी या संस्था को इस कार्य का मौका ही नहीं मिलने देते हैं। सूत्रों का कहना है कि टेंडर की शर्तें ही ऐसी तय की जाती है कि अन्य कंपनियां या संस्थाएं उन पर खरी ही नहीं उतर पाती और इसी बहाने नपा के अफसर उनके टेंडर निरस्त कर देते हैं। कई बार तो छोटी-मोटी कमियां बताकर ही अन्य कंपनियों के टेंडर निरस्त कर दिए जाते हैं और केवल ओम साईं विजन के लिए पूरा मैदान खाली छोड़ दिया जाता है। वहीं दूसरी ओर ओम साईं विजन की वही कमियां या खामियां नजरअंदाज कर दी जाती हैं। बीते कई सालों से यह गठजोड़ बेरोकटोक और बिना किसी बाधा के लगातार चल रहा है। यही कारण है कि टेंडर की औपचारिकता होती है, लेकिन काम केवल ओम साईं विजन कंपनी को मिलता है।
दो महीने का दिया गया है एक्सटेंशन
इस साल कंपनी को मिला टेंडर करीब दो महीने पहले ही समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद कंपनी को अतिरिक्त लाभ देने के लिए नपा के अधिकारियों ने समय रहते टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं करवाई। जिसके चलते ओम साईं विजन को दो महीने का एक्सटेंशन दिया गया। फिलहाल कंपनी द्वारा एक्सटेंशन पर कार्य किया जा रहा है। यदि नगर पालिका समय पर टेंडर की प्रक्रिया करवा लेती तो ओम साईं विजन को एक्सटेंशन देने की जरुरत ही नहीं पड़ती।
साफ नजर आ रही नपा की चतुराई
बताया जाता है कि इसके पहले जो टेंडर बुलाए गए थे, उस समय शर्तें इतनी कड़ी रखी गई थी कि कोई टेंडर ही नहीं आया। समय पर नए टेंडर नहीं होने से इसका लाभ ओम साईं विजन को एक्सटेंशन के रूप में मिल गया। इसके बाद जब दूसरी बार टेंडर बुलाए गए तो उसकी शर्तें इस तरह रखी गई कि उसका सीधा-सीधा लाभ ओम साईं विजन को मिल जाए। यह साफ तौर से नजर भी आ रहा है।
तीन टेंडरों में से दो के हो गए निरस्त
अभी जो टेंडर बुलाए गए थे, उसमें 3 कंपनियों द्वारा टेंडर भरे गए थे। नगर पालिका के अधिकारियों ने इनमें से ओम साईं विजन को छोड़ कर शेष अन्य 2 टेंडर कोई न कोई खामी बताते हुए निरस्त कर दिए हैं। अब स्थिति यह है कि केवल ओम साईं विजन का टेंडर ही पात्र पाया गया है। जाहिर है कि इकलौता दावेदार होने से यह ठेका फिर ओम साईं कंपनी के हवाले ही कर दिया जाएगा। जानकारों का मानना है कि यदि सामान्य शर्तें तय की जाएं तो कई कंपनियां मैदान में आ सकती है जिसका लाभ नपा को भी मिलेगा, लेकिन अफसर ऐसा चाहते ही नहीं। यही वजह है कि मनमाना पैसा खर्च भी हो रहा है और शहर में ढंग का काम भी नहीं हो रहा है।

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