Betul garbage collection scam: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। बीते कई सालों से शहर के घर-घर से कचरा कलेक्शन का कार्य कर रही कंपनी ओम साईं विजन नगर पालिका को जमकर चूना लगा रही है। इस कार्य के टेंडर में जिन शर्तों का हवाला दिया गया है, उनमें से अधिकांश का इस कंपनी द्वारा कोई पालन ही नहीं किया जा रहा है, जबकि राशि पूरी-पूरी ली जा रही है। आलम यह है कि कचरा कलेक्शन के लिए रोजाना वाहन वार्डों में तक नहीं आ रहे हैं। 

बैतूल नगर पालिका में ओम साईं विजन कंपनी ने ऐसी पैठ बना ली है कि पिछले कई सालों से कचरा कलेक्शन का काम उसे ही मिल रहा है। वहीं अधिकारियों की भी इस कंपनी पर पूरी कृपा बनी रहती है, जिसके चलते कंपनी को पूरी-पूरी छूट और मनमानी करने की आजादी दे दी गई है। यही कारण है कि कंपनी द्वारा अपनी मनमर्जी से कार्य किया जा रहा है। बावजूद इसके कंपनी के भुगतान में से कोई कटौती नहीं की जाती है। इस साल कंपनी को हर माह करीब 35 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि का भुगतान किया जा रहा है। कंपनी का जिम्मा है कि उसके वाहन वह हर दिन वार्डों में घर-घर तक पहुंचे और घरों से कचरा कलेक्शन करें। 

वार्डों से ज्यादा है वाहनों की संख्या 

कंपनी को कचरा कलेक्शन के लिए नगर पालिका ने 39 टाटा मैजिक वाहन और 5 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां मुहैया कराई है। वहीं शहर में वार्ड केवल 33 हैं। जिससे रोजाना वार्डों से कचरा कलेक्शन में कोई दिक्कत भी नहीं है, लेकिन इसके बावजूद कंपनी द्वारा वार्डों में रोजाना वाहन नहीं भिजवाए जा रहे हैं। कंपनी एक दिन में आधा वार्ड और अगले दिन आधा वार्ड ही कवर कर रही है। इस तरह कचरा कलेक्शन वाले वाहन एक घर में महीने में 15 दिन ही पहुंच रहे हैं। कभी-कभी तो 2-2 दिन भी वाहन नहीं आते। कुछ चुनिंदा इलाकों में ही रोजाना वाहन पहुंच रहे हैं। 

डीजल की खपत में बड़ा खेल 

वाहन भले ही एक दिन के अंतराल से घरों में पहुंच रहे हैं, लेकिन कागजों में वाहनों का हर दिन घर पहुंचना बताया जा रहा है। इससे डीजल की खपत भी उसी हिसाब से बताई जा रही है, जबकि डीजल की खपत उससे आधी ही होती है। सूत्रों का कहना है कि यह पूरा खेल नगर पालिका के अधिकारियों को भी पता है, लेकिन वे कंपनी से शर्तों के अनुरूप काम करवाने में जरा भी रूचि नहीं लेते हैं। यदि कहीं से रोज वाहन नहीं पहुंचने की शिकायत आती है तो कुछ दिन वाहन रोज भिजवा दिया जाता है और फिर वही सिलसिला चालू हो जाता है। 

वाहनों के मेंटेनेंस में भी लापरवाही 

नगर पालिका द्वारा उपलब्ध कराए गए सभी वाहनों का मेंटेनेंस भी कंपनी को ही करना है, लेकिन कंपनी द्वारा मेंटेनेंस पर कोई खास ध्यान नहीं रखा जा रहा है। यही कारण है कि अधिकांश वाहनों की हालत कुछ सालों में ही खराब हो चुकी है। यदि कंपनी द्वारा उनके मेंटेनेंस पर समुचित ध्यान दिया जाता तो वाहनों की हालत इतनी जल्दी इतनी खराब नहीं होती। 

कंपनी पर मेहरबान है नगर पालिका 

नगर पालिका इस कंपनी पर इतनी मेहरबान है कि न केवल पिछले कई सालों से केवल इसी कंपनी को ठेका मिल रहा है, बल्कि ठेके की शर्तों का पालन नहीं किए जाने के बावजूद आज तक कंपनी के भुगतान में कोई भी कटौती नहीं की गई है। यही नहीं कंपनी को पूरी तरह मनमर्जी से काम करने की छूट भी दे रखी है। यही वजह है कि कंपनी नगर पालिका को जमकर चूना लगा रही है और नपा के अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस ओर से पूरी तरह से मौन साधे हुए हैं।