E-Scooter Subsidy Scheme: श्रमिकों को ई-स्कूटर पर 40 हजार तक अनुदान और आवास के लिए 50 हजार, जानकारी के अभाव में नहीं मिल पा रहा लाभ
E-Scooter Subsidy Scheme: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। शासन द्वारा श्रमिक वर्ग के लिए कई योजनाओं का संचालन किया जाता है। यह बात अलग है कि श्रम विभाग के जरिए संचालित इन योजनाओं की अधिकांश श्रमिकों को जानकारी ही नहीं होती और वे इन योजनाओं का लाभ ही नहीं ले पाते हैं। निर्माण श्रमिकों के लिए संचालित ई-स्कूटर योजना और ग्रामीण आवास अनुदान योजना की भी यही स्थिति है।
निर्माण श्रमिक अपने कार्यस्थल पर आराम से और कम समय में पहुंच सके, इसके लिए शासन द्वारा उन्हें ई-स्कूटर उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके लिए ई-स्कूटर योजना का संचालन शासन द्वारा किया जा रहा है। इस योजना के तहत निर्माण कार्यों में लगे श्रमिकों को ई-स्कूटर की कीमत का 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। यह अनुदान अधिकतम 40 हजार रुपये तक दिया जाता है। यह बात अलग है कि अधिकांश श्रमिकों को इस योजना की जानकारी ही नहीं है। इसलिए गिने-चुने श्रमिकों ने ही इस योजना का लाभ लिया है।
आवास के लिए मिलते 50 हजार
निर्माण श्रमिकों के लिए एक दूसरी बेहतरीन योजना मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक ग्रामीण आवास अनुदान योजना है। इस योजना का लाभ उन श्रमिकों को दिया जाता है जिनका पीएम आवास स्वीकृत होता है। इसमें पीएम आवास के तहत मिलने वाली राशि तो मिलती ही है, उसके अलावा शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में निवासरत श्रमिकों को 50 हजार रुपये की राशि अतिरिक्त दी जाती है। यह राशि आवास को और बेहतर बनाने और सुविधाएं मुहैया कराने के लिए दी जाती है।
हर साल होते हजारों आवास स्वीकृत
यह योजना श्रमिकों के लिए बेहतरीन आवास मकान बनाने में बड़ी सहयोगी साबित हो सकती है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में हर साल हजारों की तादाद में पीएम आवास स्वीकृत होते हैं। इनमें अधिकांश श्रमिक वर्ग के लोग होते हैं। श्रमिकों की संख्या भी जिले में 3 लाख से अधिक बताई जाती है। इसके बावजूद इस योजना का लाभ लेने वाले गिने-चुने ही हैं। इस साल इस योजना का लाभ लेने के लिए महज एक आवेदन आया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस योजना की जानकारी कितने लोगों को है।
प्रचार-प्रसार से बदल सकती है स्थिति
यदि जानकारी हो तो बड़ी संख्या में श्रमिक इन दोनों ही योजनाओं का लाभ ले सकते हैं। यदि श्रम विभाग के साथ ही जनपद पंचायतों और ग्राम पंचायतों द्वारा इन योजनाओं का ज्यादा से ज्यादा प्रचार-प्रसार करें तो इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए लोग उमड़ पड़ेंगे। प्रचार-प्रसार नहीं होने से ऐसा नहीं हो पा रहा है।

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