17Pension Distribution System: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। आगामी एक अप्रैल से राज्य सरकार की पेंशन व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव हो रहा है। इस बदलाव के तहत पेंशन की पूरी प्रक्रिया को केंद्रीकृत किया जा रहा है। इससे अभी आ रही सभी समस्याओं का पूरी तरह से निदान हो जाएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि उन्हें चक्कर नहीं काटने होंगे। इसका लाभ जिले के करीब 6 हजार पेंशनरों को मिलेगा। इसके अलावा सभी जिला पेंशन कार्यालय भी बंद कर दिए जाएंगे, हालांकि अभी इस संबंध में आदेश नहीं आए हैं। 

पेंशन व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव यह हो रहा है कि अब भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को राज्य शासन ने एग्रीगेटर बैंक के रूप में नियुक्त कर दिया है। इससे अब पेंशन संबंधी सारा मैनेजमेंट एसबीआई ही देखेगा और पूरी प्रक्रिया केंद्रीकृत (सेंट्रलाइज्ड) हो जाएगी। राज्य शासन द्वारा पेंशन की पूरी राशि एसबीआई को हस्तांतरित की जाएगी। एसबीआई एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करते हुए प्रदेश के सभी पेंशनरों के खातों में पेंशन ट्रांसफर करेगा, चाहे उनके खाते किसी भी बैंक में क्यों न हो। इसके बदले एसबीआई को क्लेम और कमीशन मिलेगा। अभी तक यह राशि 11 अलग-अलग बैंकों को दी जाती थी। इसके अलावा चर्चा यह भी है कि जिलों में स्थित पेंशन कार्यालय बंद किए जाएंगे, हालांकि कार्यालय बंद किए जाने संबंधी आदेश अभी पेंशन कार्यालय में नहीं आए हैं। 

जनवरी से एसबीआई को जा रहे पीपीओ

नई व्यवस्था पर अमल जनवरी माह से ही शुरू कर दिया गया था। जिला पेंशन कार्यालय के अनुसार जनवरी 2026 से ही जिले के सभी रिटायर होने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के पीपीओ सिर्फ एसबीआई को ही भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा पूर्व से भिजवाए जा चुके पीपीओ भी वापस लेने की प्रक्रिया एसबीआई ने शुरू कर दी है। गौरतलब है कि जिले में राज्य शासन के लगभग 6000 पेंशनर हैं। 

वर्तमान व्यवस्था में आ रही यह दिक्कतें 

अभी पेंशन का जो सिस्टम प्रदेश और जिले में है, उससे कई परेशानियां होती है। अभी पेंशन के लिए उन्हीं बैंकों में खाता रखना होता था, जहां उनका सैलरी का खाता था। महंगाई भत्ते में वृद्धि या वेतनमान में संशोधन पर पेंशन राशि अपडेट करने में काफी देरी होती थी, क्योंकि यह कार्य सेंट्रलाइज्ड पेंशन प्रोसेसिंग सेल के माध्यम से किया जाता है और यह सुविधा केवल 4 बैंकों में ही हैं। यह सिस्टम जिन बैंकों में नहीं है, वहां पेंशन अपडेट होने में काफी समय लगता था। इससे एरियर के लिए लंबा इंतजार करना होता है। 

अभी सेवानिवृत्ति से पहले कर्मचारी का पीपीओ संबंधित बैंक को भेजा जाता है। इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है और समन्वय की कमी से सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद पेंशन शुरू नहीं हो पाती है। वेतनमान फिक्सेशन में फिटमेंट फैक्टर, मूल वेतन या महंगाई भत्ते की गणना में मामूली गलती भी पेंशन प्रक्रिया को रोक देती है, जिसे सुधारने में महीनों लग जाते हैं। अब यह कोई भी समस्या पेश नहीं आएगी। 

अभी पेंशनरों को काटने पड़ते हैं चक्कर

जैसे ही कोई कर्मचारी सेवानिवृत्त होता है और उसका प्रकरण जिला और संभागीय पेंशन कार्यालयों में जाता है तो वहां मौजूद कर्मचारी एक ही प्रकार की कई आपत्तियां लगाते हैं। इन आपत्तियों को वो बार-बार लगाकर कर्मचारी के संबंधित कार्यालय को भिजवाते हैं। कर्मचारी नेताओं का दावा है कि ऐसा वे इसलिए करते हैं ताकि सेवानिवृत्त कर्मचारी उनकी 'सेवा' करें। इसका बाद कहीं उनका पीपीओ जारी होता है। 

केंद्रीकृत रूप से होगी पेंशन निर्धारण प्रक्रिया 

अब पेंशन निर्धारण की पूरी प्रक्रिया भोपाल स्थित मुख्यालय से केंद्रीकृत रूप से संचालित होगी। इसमें किसी कर्मचारी को यह पता नहीं चलेगा कि उसकी पेंशन का निर्धारण कौनसा अधिकारी कर रहा है। शासन की इस पहल से स्थानीय स्तर पर होने वाली गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के साथ ही अनावश्यक दबाव पर पूरी तरह से रोक लग सकेगी और पेंशनरों को खासी राहत मिलेगी। पेंशनरों को अब अपने किसी भी कार्य के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे।