Betul Girls School Toilet Construction: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। आज भी कई सरकारी स्कूलों में शौचालय की सुविधा नहीं है। इससे छात्र-छात्राओं को परेशान होना पड़ता है। राहत की बात यह है कि जिन 90 बालिका शालाओं में शौचालय नहीं है या अलग से बालिका शौचालय नहीं है, उनमें जल्द ही शौचालय बनाए जाएंगे। इसके लिए राज्य शिक्षा केंद्र ने हर स्कूल को 2.93 लाख रुपये की राशि उपलब्ध करा दी है। यह शौचालय बनने से छात्राओं को खासी सुविधा मिल सकेगी। 

स्कूलों में शौचालय, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होने के दावें तो किए जाते हैं, लेकिन आज भी कई स्कूलों में यह जरुरी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं है। खासतौर से शौचालय नहीं होने से शाला में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब धीरे-धीरे इन स्कूलों में सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है। जिले में प्राथमिक स्कूलों की संख्या 1305 हैं वहीं प्राथमिक से लेकर हायर सेकेंडरी तक सभी स्तरों के कुल शासकीय स्कूलों की संख्या 2278 है। इनमें आमला में 247, आठनेर में 170, बैतूल में 285, भैंसदेही में 219, भीमपुर में 309, चिचोली में 178, घोड़ाडोंगरी में 293, मुलताई में 181, प्रभातपट्टन में 183 और शाहपुर में 213 स्कूल शामिल हैं। 

इतने स्कूलों में नहीं थे बालिका शौचालय

एजुकेशन पोर्टल स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी भी अपलोड की जाती है। इसमें यह पाया गया था कि जिले के 90 प्राथमिक-माध्यमिक स्कूलों में बालिका शौचालय नहीं है। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा बालिका शौचालयों का निर्माण विशेष प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। यही कारण है कि राज्य शिक्षा केंद्र ने यह स्थिति देखते हुए इन सभी स्कूलों में बालिका शौचालय बनवाने की पहल की है। 

विद्यालयों को उपलब्ध कराई गई राशि 

शौचालय निर्माण के लिए इन सभी 90 स्कूलों को राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा राशि भी मुहैया करा दी गई है। प्रत्येक स्कूल को 2.93 हजार रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है। इस राशि से शौचालय का निर्माण कर 2-2 टॉयलेट शीट और 4-4 यूरिनल पॉट लगवाने के निर्देश दिए गए हैं। शौचालय निर्माण का यह कार्य शाला प्रबंधन समिति द्वारा करवाया जाएगा। 

अगले शिक्षण सत्र में मिलेगी सुविधा 

राशि मिलने के बाद स्कूलों में समितियों द्वारा निर्माण के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। शौचालय निर्माण के कार्य में बहुत ज्यादा समय नहीं लगता है। इसलिए अगले शिक्षण सत्र से ही छात्राओं को इनका लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।