Betul Water Crisis: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। गर्मी की शुरूआत हो चुकी है और इसके साथ ही ग्रामीण अंचलों में जल संकट की स्थिति बनना भी शुरू हो गई है। जनप्रतिनिधियों और कलेक्टर द्वारा पीएचई के अधिकारियों को गर्मी के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए थे। इस पर पीएचई ने यह कार्ययोजना बना ली है। इसके अनुसार करीब 200 गांवों में जल संकट की स्थिति बनने की आशंका है। इसके लिए अभी से व्यवस्था की जा रही है। जल संकट से निपटने बनाए गए प्लान के अनुसार यदि जरुरत पड़ी तो किसानों के निजी बोर भी अधिग्रहित कर उनसे पानी मुहैया कराया जाएगा। 

जिले में हर साल कई ग्रामीण क्षेत्रों में भारी जल संकट की स्थिति निर्मित होती है। हर बार आग लगने पर कुआं खोदने जैसी स्थिति बनती थी। इसके चलते न तो कोई ठोस इंतजाम हो पाते थे और न ही ग्रामवासियों को राहत मिल पाती थी। पूरी गर्मी भर वे पानी के लिए परेशान होते रहते थे। यही कारण है कि इस बार जनप्रतिनिधियों और कलेक्टर द्वारा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग को गर्मी के लिए अभी से कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए थे, ताकि जल संकट की स्थिति बनने पर तुरंत राहत पहुंचाई जा सके। विभाग ने यह कार्य योजना बना ली है। 

दो सैकड़ा गांवों में होगी पानी की किल्लत

पीएचई द्वारा जो प्लान बनाया गया है उसके उसके अनुसार जिले के 70 से 80 गांव ऐसे हैं जहां अभी तत्काल अतिरिक्त इंतजाम की जरुरत है। गर्मी की शुरूआत में ही इन गांवों में पानी की किल्लत होने लगी है। कई गांवों के लोग कलेक्ट्रेट सहित अन्य दफ्तरों में अपनी गुहार लेकर पहुंचने भी लगे हैं। वहीं गर्मी के शबाब पर रहने के दौरान लगभग 2 सैकड़ा गांवों में जल संकट की स्थिति बनने की संभावना है। इसके लिए विभाग अभी से तैयारी में जुट गया है। इनमें से अधिकांश गांव मुलताई, प्रभातपट्टन और आमला ब्लॉक के बताए जा रहे हैं। 

करवाए जा रहे नए नलकूप खनन 

अभी जिन गांवों में पानी की किल्लत चल रही है वहां पर पीएचई द्वारा पंचायतों के साथ मिलकर इंतजाम किए जा रहे हैं। जहां छोटी-मोटी दिक्कतों जैसे मोटर-बिजली या पाइप लाइन के कारण पानी की परेशानी हो रही हो, उन्हें दुरूस्त किया जा रहा है। इसके अलावा जहां सोर्स में पानी नहीं है, वहां पर विभाग द्वारा अतिरिक्त बोर खनन किए जाने की तैयारी है। इसके अलावा अन्य उपाय भी किए जा रहे हैं। 

पानी ही नहीं तो फिर यह कदम उठाएंगे

इसके अलावा जिन ड्राई जोन में पानी ही नहीं है और नलकूप खनन करने पर भी पानी मिलने की गुंजाइश नहीं रहेगी वहां पर किसानों के वे निजी बोर चिन्हित किए जा रहे हैं, जिनमें अच्छा पानी है। यदि कहीं पानी मिलने की संभावना नहीं रहेगी तो फिर इन निजी बोरों को एसडीएम के माध्यम से अधिग्रहित किया जाएगा और इनके जरिए लोगों को पानी मुहैया कराया जाएगा। इससे आसानी से पानी उपलब्ध हो सकेगा। 

जमकर कराए जा रहे निजी बोर 

मार्च का महीना शुरू हो चुका है और जिला प्रशासन द्वारा कभी भी नलकूप खनन पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इसके चलते लोग अभी जमकर नलकूप खनन करवा रहे हैं। शहर हो या गांव, हर तरफ अभी बोरिंग मशीनों का शोर सुना जा सकता है। प्रतिबंध लगने के बाद बोर खनन की अनुमति आसानी से नहीं मिलती है। यही कारण है कि लोग अभी से समय रहते बोरिंग करवा कर पानी की व्यवस्था कर ले रहे हैं।