Badora Mandi Mismanagement: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। कृषि उपज मंडी बडोरा में ऐसा लगता नहीं कि किसानों की अधिकारियों को जरा भी चिंता है। मंडी में व्यवस्था के नाम पर कुछ भी नहीं है, जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। यहां केवल व्यापारियों की मनमानी चल रही है, जिसे रोकने वाला कोई नहीं है। आलम यह है कि जिन पूरे मंडी परिसर और हर शेड में व्यापारियों के बोरे बीते कई दिनों से पड़े हैं। दूसरी ओर जिन किसानों के लिए मंडी शुरू की गई है, वे किसान घंटों तक सड़क पर खड़े होकर पसीना बहाते हुए भीतर जाने का इंतजार कर रहे हैं। इस अव्यवस्था से मुख्य मार्ग पर भी पल-पल में जाम लग रहा है। 

कृषि उपज मंडी बडोरा में पहले से मक्का की बंपर आवक हो रही है। अब गेहूं की भी बड़ी मात्रा में आवक होने लगी है। यही कारण है कि कुल आवक में काफी इजाफा  हो गया है, दूसरी ओर मंडी में हाल यह है कि यहां पूरे परिसर और हर शेड में व्यापारियों के हजारों बोरे बीते कई दिनों से रखे हुए हैं। इससे किसानों के वाहन ज्यादा संख्या में भीतर आ ही नहीं पा रहे हैं। बुधवार को भी हाल यह थे कि दोपहर डेढ़ बजे तक भी मंडी के गेट से लेकर बैतूल-बैतूल बाजार रोड तक पर किसानों के अनाज से भरे वाहन खड़े थे। किसान पसीना बहाते हुए अपने वाहनों के भीतर जाने का इंतजार कर रहे थे। मंडी में कहने को तो 13 शेड हैं, लेकिन एक भी ऐसा नहीं था जहां व्यापारियों के चौकड़े न लगे हो। शेडों के अलावा परिसर में भी चौकड़े लगे हैं। इससे परिसर या शेडों में इतनी जगह ही नहीं बची कि किसानों का माल डाला जा सके। 

लगातार बनी रहती है मंडी में अव्यवस्था

मंडी में अव्यवस्था का यह कोई पहला मौका नहीं है। मंडी में व्यापारियों का दबदबा हमेशा बना रहता है और वे पूरी अपनी मनमानी चलाते हैं। मंडी के अधिकारी भी किसानों का भला चाहने के बजाय व्यापारियों के हितों को तवज्जो देते हैं। ऐसे में किसान परेशान होते रहने को मजबूर होते रहते हैं। यदि नियमानुसार खरीदी के बाद व्यापारियों से रोजाना बोरे उठवा लिए जाए तो मंडी में पर्याप्त जगह उपलब्ध हो सकती है और किसानों को कोई परेशानी नहीं होगी, लेकिन मंडी के अधिकारी इस ओर कोई ध्यान ही नहीं देते। 

गोदाम के रूप में कर रहे इस्तेमाल 

अधिकांश व्यापारी मंडी को गोदाम के रूप में इस्तेमाल करते हैं। सूत्रों का कहना है कि मक्का की खरीदी कुछ कंपनियों द्वारा की जाती है। इनके कर्ताधर्ता खरीदी गई मक्का को मंडी से गोदाम ले जाना और वहां से रेलवे रैक तक पहुंचाना तो कंपनियों को बता देते हैं और राशि वसूल भी कर लेते हैं, लेकिन वास्तव में वह माल मंडी में ही पड़ा रहने देते हैं। यही कारण है कि मंडी में हजारों बोरे यूं ही लंबे समय तक पड़े रहते हैं। इसके बाद सीधे मंडी से ही बोरे रेलवे रैक पर लोड किए जाते हैं। 

जुर्माना वसूली नहीं होने से बढ़े हौसले

बीते दिनों इन बोरों के लंबे समय तक मंडी में रखे रहने को लेकर मीडिया ने यह मुद्दा उठाया था। इसके बाद स्वयं प्रभारी मंत्री भी मंडी पहुंचे थे। प्रभारी मंत्री ने इसके लिए व्यापारियों से जुर्माना वसूलने के निर्देश दिए थे। मंडी प्रबंधन यह जुर्माना आज तक वसूल नहीं कर सका है। यही कारण है कि व्यापारियों के हौसले और बुलंद हो गए हैं। अब व्यापारियों द्वारा एक बार फिर से मंडी को गोदाम के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया गया है। इसके चलते किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। मंडी के अधिकारी परिसर में इतनी जगह तक नहीं बना पा रहे हैं कि किसानों की उपज की नीलामी के लिए ढेर लगाए जा सके। 

आम लोगों को भी होना पड़ रहा परेशान

मंडी में व्यापारियों की मनमानी से आम जनता को भी परेशान होना पड़ रहा है। मंडी में जगह नहीं होने से किसानों के उपज से लदे वाहन मंडी गेट से लेकर मुख्य मार्ग तक और मुख्य मार्ग पर भी खड़े रहते हैं। इससे मुख्य मार्ग पर पल-पल में जाम लगता है। आज भी दोपहर में यहां कई बार जाम की स्थिति बनी। इससे वाहनों की लंबी कतार लग गई। इस जाम में कई बसें और स्कूल बस भी फंस रही थी। इससे यात्रियों और स्कूली बच्चों को परेशान होना पड़ा। वाहन चालकों को खुद ही किसी तरह अन्य वाहनों को निकालकर रास्ता बनाना पड़ रहा था। बताते हैं कि यहां रोजाना यही स्थिति बनती है। जिससे आम लोगों को भी परेशान होना पड़ता है।