Heart Transplant: बैतूल जिले के लिए एक प्रेरणादायक और गर्व की खबर सामने आई है। आठनेर क्षेत्र के एक युवक ने गंभीर और जटिल हृदय रोग से लंबी लड़ाई लड़ते हुए आखिरकार नई जिंदगी हासिल कर ली। अहमदाबाद के प्रतिष्ठित अस्पताल में हुए सफल हृदय प्रत्यारोपण के बाद अब वे स्वस्थ होकर घर लौट आए हैं। उनकी यह कहानी न केवल साहस और धैर्य की मिसाल है, बल्कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए उम्मीद का संदेश भी देती है।

आठनेर क्षेत्र के युवक का सफल हृदय प्रत्यारोपण

बैतूल जिले के आठनेर क्षेत्र के ग्राम पुसली निवासी 40 वर्षीय अलकेश डडोरे ने अपने साहस और मजबूत इच्छाशक्ति से एक नई मिसाल कायम की है। अहमदाबाद स्थित यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी में उनका सफल हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया। सर्जरी के लगभग एक महीने बाद उनकी सेहत में सुधार हुआ और अब उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है। फिलहाल वे नए जीवन की शुरुआत कर रहे हैं।

बचपन से जटिल हृदय रोग से जूझ रहे थे

अलकेश डडोरे बचपन से ही Ebstein’s Anomaly नामक दुर्लभ और जटिल जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित थे। इस बीमारी के कारण उनके हृदय की संरचना में गंभीर समस्या थी। चिकित्सकीय जांच में दाहिने वेंट्रिकल का एट्रियलाइजेशन, गंभीर ट्राइकसपिड रिगर्जिटेशन और एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट जैसी स्थितियां सामने आई थीं। इन समस्याओं के कारण उनके दिल की कार्यक्षमता प्रभावित रहती थी।

पिछले 15 से 20 वर्षों में कई बार आया संकट

करीब डेढ़ से दो दशक के दौरान उन्हें कई बार वेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया के खतरनाक दौरे पड़े। इन दौरों के कारण कई बार उन्हें बैतूल में अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। स्थिति गंभीर होने पर कई बार इलेक्ट्रिक शॉक यानी डीसी कार्डियोवर्जन देकर उनकी जान बचाई गई। लगातार इलाज के बावजूद समय के साथ हृदय की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होती चली गई।

पहले भी हुई थी सर्जरी, लेकिन समस्या बनी रही

बीमारी की गंभीरता को देखते हुए पहले ट्राइकसपिड वाल्व रिपेयर और एएसडी क्लोजर की पेलिएटिव सर्जरी भी की गई थी। इस उपचार से कुछ समय तक राहत मिली, लेकिन बाद में फिर से हृदय विफलता और अनियमित धड़कनों की समस्या बढ़ने लगी। धीरे-धीरे हृदय की कार्यक्षमता घटकर लगभग 10 से 15 प्रतिशत तक पहुंच गई।

अहमदाबाद में हुआ सफल हार्ट ट्रांसप्लांट

स्थिति अत्यधिक गंभीर होने पर उन्हें आगे के इलाज के लिए अहमदाबाद के यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी भेजा गया। वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों ने विस्तृत जांच के बाद हृदय प्रत्यारोपण की सलाह दी। अलकेश डडोरे ने धैर्य के साथ इस चुनौती को स्वीकार किया और करीब चार महीने तक अस्पताल में रहकर डोनर हृदय का इंतजार किया। पिछले महीने उपयुक्त डोनर मिलने के बाद डॉक्टरों की टीम ने सफलतापूर्वक हार्ट ट्रांसप्लांट किया।

इलाज का पूरा खर्च रहा शून्य

इस उपचार की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने और जटिल हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी होने के बावजूद उनका पूरा इलाज बिना किसी खर्च के पूरा हुआ। यह देश में उपलब्ध उन्नत चिकित्सा सुविधाओं और जनहितकारी स्वास्थ्य योजनाओं का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

बैतूल जिले के लिए बनी प्रेरणादायक उपलब्धि

संभावना जताई जा रही है कि बैतूल जिले के किसी मरीज का यह पहला सफल हृदय प्रत्यारोपण है। इस उपलब्धि ने पूरे जिले में आशा और सकारात्मकता का संदेश दिया है। उपचार की पूरी प्रक्रिया में डॉ. अनुज लश्करे, जो वर्तमान में इसी संस्थान में कार्यरत हैं, ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उपचार तथा प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सहयोग दिया।

अलकेश डडोरे की यह कहानी साहस, धैर्य और सकारात्मक सोच की मिसाल है। गंभीर हृदय रोग से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए यह घटना उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ कठिन से कठिन परिस्थितियों पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है।