ट्रंप प्रशासन से टकराई एआई कंपनी एंथ्रोपिक, पेंटागन के खिलाफ अदालत पहुंचा मामला
एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने सोमवार को अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन और अन्य संघीय एजेंसियों के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। एंथ्रोपिक ने ट्रंप प्रशासन के उस फैसले के खिलाफ ये मुकदमा दायर किया है, जिसमें एंथ्रोपिक को 'आपूर्ति श्रृंखला जोखिम' के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
एंथ्रोपिक ने सरकार के कदम को बताया गलत
यह मामला अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन और दुनिया की प्रमुख एआई कंपनियों के बीच चल रही खींचतान का उदाहरण है। किसी कंपनी को आपूर्ति श्रृंखला जोखिम कैटेगरी में तब डाला जाता है, जब उस पर विदेशी विरोधियों से जुड़े होने का शक होता है। इससे एंथ्रोपिक कंपनी के पेंटागन के साथ व्यापार प्रभावित हो सकता है। एंथ्रोपिक का आरोप है कि उसे आपूर्ति श्रृंखला कैटेगरी में वर्गीकृत करना और ट्रंप सरकार द्वारा कंपनी को तकनीक का उपयोग बंद करने का निर्देश देना कानूनी रूप से गलत है। कंपनी ने सरकार के इन कदमों से कड़ी नाराजगी जाहिर की है।
क्या है विवाद
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन, एंथ्रोपिक कंपनी के एआई मॉडल क्लाउड का इस्तेमाल कई सरकारी और सैन्य कामों में करना चाहता था, लेकिन कंपनी ने साफ कर दिया कि उसकी एआई तकनीक का इस्तेमाल नागरिकों की निगरानी के काम में नहीं होना चाहिए। कंपनी यह भी नहीं चाहती कि उसकी एआई तकनीक का इस्तेमाल हथियारों में हो, जिसकी मदद से ऐसे हथियार विकसित किए जाएं, जिन्हें कंट्रोल करने के लिए इंसानों की भी जरूरत न रहे। पेंटागन इन शर्तों से नाराज हो गया और उसने इन शर्तों को मानने से मना कर दिया। इसके बाद फरवरी 2026 में एंथ्रोपिक को अमेरिकी सरकार ने आपूर्ति श्रृंखला खतरा घोषित कर दिया। जिसका मतलब है कि अमेरिकी सरकार अब इस कंपनी को संभावित सुरक्षा खतरे के रूप में देखती है।
क्या है आपूर्ति श्रृंखला खतरा कैटेगरी में वर्गीकृत होने का मतलब?
आपूर्ति श्रृंखला खतरा श्रेणी में वर्गीकृत होने का मतलब है कि सरकारी एजेंसियां और सरकारी कॉन्ट्रैक्टर्स ऐसी कंपनियों की तकनीक इस्तेमाल करने से बचते हैं। इससे एंथ्रोपिक की तकनीक का सरकारी प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल बंद हो सकता है और कंपनी के कारोबार को भारी नुकसान हो सकता है।
एंथ्रोपिक के सीईओ ने जताई चिंता
एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने अमेरिकी सरकार के फैसले पर चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि एआई जैसी ताकतवर तकनीक को लेकर जिम्मेदार नियम बनाने जरूरी हैं और अगर कंपनियों द्वारा नैतिकता और सुरक्षा की बात करने पर उन्हें इस तरह से सजा मिलेगी तो इससे टेक इंडस्ट्री में गलत संदेश जाएगा।

Supreme Court of India ने CISF कांस्टेबल बहाली मामले में केंद्र की अपील खारिज की
पारदर्शी आबकारी नीति से सरकार की कमाई में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
लोकसभा सीटों में 50% वृद्धि से उत्तरी राज्यों को बढ़त, दक्षिण भारत को संभावित नुकसान
Madhya Pradesh High Court की सख्ती, डॉक्टर को रिश्वत मामले में फटकार
बंगाल में सियासी पारा चढ़ा: अमित शाह ने ममता सरकार के खिलाफ 14 आरोपों की चार्जशीट जारी की