PM Rahat Yojana: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। एक्सीडेंट होने पर अचानक इलाज पर आने वाली खर्च रूपी आफत से बचने के लिए केंद्र सरकार ने पीएम राहत योजना शुरू की है। यह योजना वैसे तो करीब एक महीने पहले 13 फरवरी को ही लागू हो गई थी, लेकिन योजना के तहत अभी तक जिले में मात्र एक मामला रजिस्टर्ड हो सका है। इसकी वजह यह है कि अभी तक स्वास्थ्य और पुलिस विभाग को इस योजना का समुचित प्रशिक्षण ही नहीं मिल सका था। यह प्रशिक्षण अब कहीं शुरू हो पाया है। 

सड़क हादसे अचानक होते हैं और कोई भी यह नहीं सोचता कि किसी हादसे का शिकार हो। सड़क हादसों में कई बार जहां लोगों की जान चली जाती है तो कुछ को लंबे समय तक इलाज कराना होता है। निम्र मध्य और गरीब परिवारों के लिए सड़क हादसों का शिकार होना एक बड़ी आफत होता है। इसकी वजह यह है कि उनका जितने दिन इलाज चलेगा, उतने दिन वे मेहनत-मजदूरी पर या अपने रोजगार पर नहीं जा सकेंगे, जिससे आमदनी अचानक रूक जाएगी।

दूसरी ओर लंबे समय तक इलाज कराना होगा और इस इलाज में जमा पूंजी भी खर्च हो जाती है। इस तरह इन लोगों के लिए सड़क हादसा दोहरी आफत साबित होता है। कई परिवार तो ऐसे होते हैं, जिनकी स्थिति इलाज तक करा पाने की नहीं होती है। इन्हीं सबकी समस्याओं के निराकरण के लिए केंद्र सरकार ने पीएम राहत योजना शुरू की है। इस योजना का शुभारंभ 13 फरवरी को किया जा चुका है। 

जिले में कितने लोगों को मिला लाभ 

योजना तो 13 फरवरी को शुरू हो चुकी है, लेकिन अभी तक जिले में मात्र 1 प्रकरण इस योजना के तहत दर्ज हो सका है। यह प्रकरण भी योजना शुरू होने के दिन ही प्रायोगिक तौर पर दर्ज कर लिया गया था। योजना के तहत पहले लाभार्थी बने हैं गोधना गांव के महेश गुजरे जो कि साईंखेड़ा से बस से उतर कर ससुंद्रा की ओर जा रहे थे। इसी बीच उन्हें किसी वाहन ने टक्कर मार दी। इसकी जानकारी जब योजना का काम देख रहे अधिकारियों को लगी तो उन्होंने प्रायोगिक तौर पर इस मामले को योजना के तहत दर्ज कर लिया था। इसके अलावा अन्य किसी को भी लाभ नहीं मिल पाया है, जबकि इस अवधि में दर्जनों हादसे जिले में हो चुके हैं।

अभी तक नहीं हो सका था प्रशिक्षण 

जिले में अभी तक योजना का सुचारू तरीके से क्रियान्वयन नहीं होने की मुख्य वजह यह है कि अभी तक स्वास्थ्य और पुलिस विभाग को प्रशिक्षण नहीं मिल पाया है। योजना का संचालन पूर्णत: डिजिटल प्रणाली के माध्यम से किया जाना है। इसके लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ई-डिटेल्स एक्सीडेंट रिपोर्ट को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के ट्रांजेक्शन प्रबंधन सिस्टम (टीएमएस) से जोड़ा गया है। इसमें दुर्घटना की सूचना से लेकर भुगतान तक पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। यही कारण है कि इसमें समुचित प्रशिक्षण बेहद आवश्यक है। यदि पहले ही सभी पक्षों को इसका प्रशिक्षण दे दिया जाता, तो योजना का लाभ कब का मिलने लगता। 

डेढ़ लाख रुपये तक केशलेस इलाज 

यह योजना इसलिए शुरू की गई है ताकि हादसे में घायल व्यक्ति का गोल्डन ऑवर में ही इलाज शुरू हो जाए और जान न गंवाना पड़े। इसके लिए सभी अस्पतालों को आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पीएम राहत योजना से जोड़ा जा रहा है। जिले में अभी तक 41 अस्पताल योजना के तहत पंजीकृत किए जा चुके हैं। इनमें सरकारी के साथ निजी अस्पताल भी शामिल हैं। योजना में अच्छी बात यह है कि यदि मरीज को छोटे अस्पताल से बड़े अस्पताल में बेहतर इलाज के लिए रेफर किया जाता है और उसे सरकारी की जगह निजी एंबुलेंस से ले जाया जाता है तो उसका भुगतान भी उक्त योजना के तहत ही होगा। उसके लिए पीड़ित को अलग से भुगतान करने की जरुरत नहीं पड़ेगी। 

राहवीर योजना की जिले में यह स्थिति 

सड़क हादसों के संबंध में ही एक दूसरी योजना राहवीर योजना है। इस योजना का लाभ उन लोगों को दिया जाएगा जो कि सड़क हादसों में घायल लोगों को इलाज के लिए तत्काल अस्पताल पहुंचाएंगे। इसमें ऐसे राहवीर को 25 हजार रुपये का पुरस्कार दिए जाने का प्रावधान है। बताया जाता है कि इस योजना के तहत जिले से 25 से 30 प्रकरण भिजवाए जा चुके हैं। इनमें से 4 का अप्रूवल भी आ चुका है। हालांकि अभी इन राहवीरों को पुरस्कार की राशि प्रदान नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि इन्हें जल्द ही पुरस्कार राशि दी जा सकती है।