UGC Law Protest Betul: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। यूजीसी कानून के विरोध में बैतूल का सवर्ण समाज भी उबल पड़ा है। नतीजतन, सोमवार को सवर्ण समाज संगठन द्वारा जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया गया। संगठन के बैनर तले एकत्रित हुए सवर्ण समाज के सैकड़ों लोगों ने जिला मुख्यालय पर रैली निकाल कर प्रदर्शन किया और फिर ज्ञापन सौंप कर अपना विरोध दर्ज कराया। सभी ने कलेक्ट्रेट पहुंच कर कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी को राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। 

सवर्ण समाज संगठन की यूजीसी कानून के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन की बीते लंबे समय से तैयारी चल रही थी। इसके लिए कई बैठकों का आयोजन कर विचार-विमर्श किया गया और आज 9 मार्च को इस कानून के विरूद्ध प्रदर्शन करने की रणनीति तैयार की गई। इसी के तहत आज संगठन के तत्वावधान में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। तय रणनीति के अनुसार आज सभी पहले शिवाजी चौक स्थित ऑडिटोरियम में एकत्रित हुए। यहां सभा आयोजित कर वक्ताओं ने इस कानून पर चर्चा की। इसके पश्चात रैली निकाल कर सभी शिवाजी चौक, पेट्रोल पंप, बस स्टैंड होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और वहां कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। रैली और विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं। रैली के दौरान यूजीसी रोल बैक के नारे लगाए गए। 

इन अवसरों पर राकेश त्रिवेदी, ठाकुर जगदीश राघव, राजू खंडेलवाल, हेमंत पगारिया, दीपक भार्गव, मनोज भार्गव, अजय मिश्रा, पप्पी शुक्ला, धर्मेंद्र शुक्ला, हेमंत शर्मा, ब्रज पांडे, बंटी मोटवानी, राजू किलेदार और सौरभ राघव सहित अन्य लोग प्रमुख रूप से मौजूद रहे। प्रदर्शन में ब्राह्मण, क्षत्रिय राजपूत, वैश्य, रघुवंशी, जैन, क्षत्रिय मराठा, कायस्थ, सिंधी और पंजाबी क्षत्रिय समाज सहित अन्य सवर्ण समाज के पदाधिकारी व सदस्य मौजूद रहे।

समाज को बांटने का कर रहे प्रयास 

संगठन के पदाधिकारियों का आरोप है कि सरकार ऐसे नियम लागू कर समाज को बांटने का प्रयास कर रही है। उनका कहना था कि इससे सवर्ण समाज और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति सहित अन्य वर्गों के बीच अनावश्यक तनाव की स्थिति बन सकती है। हम चाहते हैं कि ऐसा कोई कानून लागू नहीं किया जाएं, ताकि समाज में सभी वर्गों के बीच आपसी भाईचारा बना रहे।

15 जनवरी को किया गया था लागू 

ज्ञापन में आगे बताया गया है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने 15 जनवरी 2026 से उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों में कॉलेज और विश्वविद्यालयों में शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने, जातिगत उत्पीड़न के मामलों में कार्रवाई करने और संस्थानों की जवाबदेही तय करने जैसे प्रावधान किए गए हैं।

बिना जांच के ठहरा सकते हैं दोषी 

संगठन ने साफ तौर से आरोप लगाया है कि इन नियमों में संतुलन का अभाव है और इससे कुछ छात्रों को बिना पर्याप्त जांच के दोषी ठहराए जाने की आशंका बन सकती है। उन्होंने मांग की कि इन प्रावधानों को वापस लिया जाएं या उनमें संशोधन किया जाए।

बड़े स्तर पर आंदोलन की चेतावनी 

संगठन ने चेतावनी दी कि यदि इन नियमों को वापस नहीं लिया जाता है तो समाज में व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। इसके साथ ही आंदोलन के दौरान किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

बना रहना चाहिए आपसी भाईचारा 

जिला अध्यक्ष सौरभ सिंह राघव ने कहा कि इस काले कानून से सवर्ण समाज और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति सहित अन्य वर्गों के बीच अनावश्यक तनाव की स्थिति बन सकती है। उन्होंने कहा कि समाज में सभी वर्गों के बीच आपसी भाईचारा बना रहना चाहिए।