Lokesh Geedkar Mulatai Politics: समाजसेवा से राजनीति की राह: मुलताई में विधानसभा टिकट की दौड़ में लोकेश गीदकर की बढ़ती सक्रियता
Lokesh Geedkar Mulatai Politics: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। 21 वीं सदी में यह चलन प्रचलन में चल रहा है कि समाजसेवा के रास्ते राजनीति में एंट्री आसान हो जाती है। हिंडन एजेंडा तो राजनीति में दाव-पेंच आजमाना ही रहता है लेकिन समाजसेवा के बहाने अपनी पहचान बनाई जाती है और फिर समय आने पर राजनीति में पद के लिए दावेदारी की जाती है या समाज सेवा के माध्यम से उपकृत हुए लोगों के मार्फत दावेदार बनाया जाता है।
दोनों ही तरह से समाज सेवा के रास्ते राजनीति में एंट्री करने वाले का मकसद पूरा हो जाता है। हालांकि विधानसभा चुनाव में अभी लगभग ढाई साल का समय है लेकिन ये समय बहुत स्पीड से बीत जाता है। जिले की मुलताई विधानसभा सीट से 2023 के चुनाव में भी कथित तौर पर भाजपा की टिकट चाहने वाले एक समाजसेवी 2021-22 से ही सक्रिय हो गए थे और उन्होंने समाज सेवा, खेल और शिक्षा के क्षेत्र के माध्यम से काफी राशि खर्च कर लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास भी किया था। अब 2026 में इस समाज सेवी ने राष्ट्र सेवा संकल्प के साथ भाजपा की आजीवन समर्पण निधि में योगदान दिया है।
योगदान की हो रही चर्चा
मूलत: मुलताई निवासी और वर्तमान में इंदौर में व्यवसाय कर रहे लोकेश गीदकर लगातार सामाजिक और धार्मिक कार्यों में अपनी भागीदारी पवित्र नगरी में निभा रहे हैं। उन्होंने भाजपा के राष्ट्र सेवा के प्रकल्प से प्रेरित होकर आजीवन समर्पण निधि में योगदान दिया है। योगदान तगड़ा है इसकी भी चर्चा है। श्री गीदकर ने भाजपा जिलाध्यक्ष सुधाकर पंवार, जिला उपाध्यक्ष जगदीश पंवार, नगर मंडल अध्यक्ष मुलताई गणेश साहू की उपस्थिति में आजीवन सहयोग निधि प्रभारी सहसंयोजक नीलेश चावरिया को आजीवन समर्पण निधि का चैक भेंट किया। उन्होंने कहा कि संगठन के प्रति समर्पण और निष्ठा का यह एक छोटा सा योगदान है और भाजपा ऐसा संगठन है जो पूरी तरह राष्ट्र को समर्पित होकर कार्य कर रहा है। भाजपा की इस खूबी ने मुझे प्रभावित किया है इसलिए मैंने आजीवन समर्पण निधि देने का फैसला किया है।
ऐज फैक्टर का मिल सकता है लाभ
मुलताई विधानसभा क्षेत्र के राजनैतिक हल्को में 2021-22 से ही लोकेश गीदकर चर्चा में चल रहे हैं। 2023 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद एक-दो वर्षों के लिए उनकी सक्रियता शिथिल हो गई थी। लेकिन अब वे फिर सक्रिय नजर आ रहे हैं। उनका फोकस क्षेत्र में होने वाले सामाजिक कार्यों, धार्मिक आयोजनों, खेल प्रतियोगिताओं पर विशेष तौर पर है। श्री गीदकर की अगर इसी तरह की सक्रियता आने वाले ढाई साल तक बनी रही तो पार्टी उनके नाम पर भी विचार कर सकती है ऐसी स्थिति बन जाएगी। क्योंकि नितिन नबीन को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर केंद्रीय नेतृत्व ने यह साफ संदेश दे दिया है कि आने वाला दौर भाजपा में 40-50 ऐज गु्रप वालों का रहेगा।
कुंबी कैंडिडेट को मिलती है जीत
वैसे तो 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले परिसीमन होना शत-प्रतिशत तय है। जिसमें मुलताई और मासोद विधानसभा अलग-अलग होने की चर्चा है। बावजूद इसके मुलताई विधानसभा से एक या दो मौकों को छोड़ दें तो हमेशा कुंबी प्रत्याशी की जीत होती है। चाहे फिर वह कांग्रेस से हो या फिर भाजपा से हो। लोकेश गीदकर भी कुंबी समाज से आते हैं और युवा होने के साथ-साथ आर्थिक रूप से समृद्ध है।
उत्तम भाऊजी भी बढ़ा रहे सक्रियता
2020-21 से ही गायत्री परिवार से जुड़े उत्तम गायकवाड़ (उत्तम भाऊजी) भी तात्कालीन प्रदेश भाजपा प्रभारी मुरलीधर राव से निकटता के चलते मुलताई क्षेत्र में सक्रिय हुए थे। टारगेट तो उनका भी मुलताई विधानसभा ही था लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पसंद के चलते चंद्रशेखर देशमुख को घर बैठे टिकट मिली और वे चुनाव जीत भी गए। अब जब भाजपा में ऐज क्राइटऐरिया को बहुत महत्व दिया जा रहा है ऐसे में उत्तम गायकवाड़ की उम्मीद एक बार फिर जाग गई है और उन्होंने भी समाजसेवा, गायत्री परिवार और राजनैतिक कार्यक्रमों में
उपस्थिति दर्ज कराते हुए सक्रियता बढ़ा दी है।
विधानसभा चुनाव में अभी लगभग ढाई साल का वक्त है। इस दौरान विधानसभा टिकट के लिए कई इच्छाधारी और कई दावेदारों की दावेदारी सामने आएगी। राजनीति में पल-पल में परिस्थितियां बदलते रहती हैं। उस समय ऊंट किस करवट बैठेगा यह तब की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। बहरहाल जिसका टारगेट बड़ा रहेगा उसे अभी से सक्रिय होना पड़ेगा।

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