Betul Literacy Mission Hoarding Mistakes: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। यूं तो सरकारी विभागों के दस्तावेजों और बोर्डों पर कई गलत शब्द नजर आ जाते हैं, लेकिन यदि शिक्षा-दीक्षा से जुड़ा और लोगों को साक्षर बनाने में जुटा विभाग ही बिना गलतियों के हिंदी न लिख पाए तो विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की काबिलियत पर सवाल उठना लाजमी है। ऐसा ही कुछ नजारा जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण पेश कर रहा है। प्राधिकरण ने अपनी योजना और उद्देश्यों को लेकर जो 2 होर्डिंग तैयार करवाए हैं, उनमें छोटे से मैटर में ही थोकबंद गलतियां हैं। यह होर्डिंग कलेक्ट्रेट परिसर में लगाए गए हैं, जिन्हें देख कर लोग विभाग की जमकर खिल्लियां उड़ा रहे हैं। 

जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण के पहले होर्डिंग में साक्षरता मिशन के उद्देश्य बताए गए हैं। कुछ पंक्तियों के इस मैटर में कई गलतियां हैं। लाल रंग में ऊपर लिखे 'इसलिए जन जन के सपनों' वाक्य में जन-जन के बीच योजक चिन्ह (-) लगाना चाहिए, लेकिन नहीं लगाया गया है। इसके बाद 'पढ़ेगें और पढ़ाएगें, साक्षर भारत बनाएगें' लिखा है। इसमें पढ़ेंगे, पढ़ाएंगे और बनाएंगे में ऊपर लगने वाली बिंदी जिसे अनुस्वार कहते हैं वह सही जगह नहीं लगाई गई है। यह वाक्य इस तरह 'पढ़ेंगे और पढ़ाएंगे, साक्षर भारत बनाएंगे' सही है।

इसके बाद नीले शब्दों में लिखे 3 लाइन के वाक्य में भी कई गलतियां है। इसमें जिन्होने, नही, युनेस्कों, व्यस्कों, लिऐ आदि शब्द गलत लिखे हैं। इन शब्दों का सही रूप  जिन्होंने, नहीं, यूनेस्को, वयस्कों, लिए हैं। इसी तरह परिसर में ही लगे दूसरे होर्डिंग में भी छोटे से मैटर में कई गलतियां नजर आ रही है। इसमें काले शब्दों में कार्यक्रम का लक्ष्य बताने वाले वाक्य में जिन्होने, नही, उन्हे, लिऐ आदि शब्द गलत लिखे हैं। इन शब्दों में जहां बिंदी नहीं लगी है वहीं एक शब्द में ए की मात्रा अनावश्यक लगा दी गई है। इन शब्दों का सही रूप जिन्होंने, नहीं, उन्हें, लिए होगा। इसके बाद अक्षर साथी बने लिखा है, जबकि यहां बनें लिखा होना चाहिए था। 

आखिर क्या देखते हैं अधिकारी

उल्लेखनीय है कि सरकारी दस्तावेजों में सही भाषा का विशेष रूप से इस्तेमाल करना होता है और यदि प्रचार सामग्री है तो उसमें तो और ज्यादा ध्यान रखा जाता है क्योंकि एक भी गलती विभाग और सरकार की जगहंसाई करा सकती है। इसके विपरीत इन होर्डिंग्स में थोक में मौजूद गलतियां यही बताती है कि न तो यह सामग्री तैयार करने वाले कर्मचारियों को हिंदी का खास ज्ञान है और न ही अधिकारियों ने यह प्रचार सामग्री देखने की जहमत उठाई या फिर उनका भी भाषा ज्ञान का स्तर वही होगा जो कर्मचारियों का था। 

जमकर बन रहा होर्डिंग्स का मजाक 

यह दोनों होर्डिंग कलेक्ट्रेट में मेन गेट के सामने लगे हैं। यहां रोजाना कई जनप्रतिनिधि, वीवीआईपी, आला अफसर और सैकड़ों की तादाद में आम लोग पहुंचते हैं। आश्चर्य की बात है कि किसी अधिकारी ने इन गलतियों की ओर ध्यान देकर इन्हें वहां से हटवाने की जरुरत नहीं समझी। यही कारण है कि लंबे समय से यह होर्डिंग कलेक्ट्रेट की शोभा बढ़ा रहे हैं। ऐसे में जो भी इन्हें देखता है तो इन गलत शब्दों को पढ़कर जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण के अधिकारियों-कर्मचारियों के भाषा ज्ञान का जमकर मजाक बनाता है।