Betul Trenching Ground Scam: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। ट्रेंचिंग ग्राउंड मामले में सीएमओ और सब इंजीनियर को तो निलंबित कर दिया गया, लेकिन इनके बराबर ही दोषी अधिकारी कार्यपालन यंत्री (ईई) सचिन कडू पर कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है। बगैर काम के भुगतान करवाने में कार्यपालन यंत्री की भी मुख्य भूमिका है। उनके सत्यापन और अनुमोदन के बाद ही ठेकेदार को भुगतान हुआ है। 

बैतूल ट्रेंचिंग ग्राउंड मामले में नगरीय प्रशासन और विकास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे द्वारा बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए बैतूल नगर पालिका सीएमओ सतीश मटसेनिया और सब इंजीनियर जतिन पाल को निलंबित कर दिया है। ट्रेंचिंग ग्राउंड मामले में लगातार शिकायतें होने के बाद कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी द्वारा एक जांच दल बनाकर पूरे मामले की जांच कराई गई थी। जांच दल ने पाया था कि नगर पालिका परिषद बैतूल द्वारा निविदा शर्तों के अनुरूप कार्य निष्पादन नहीं होने के बावजूद ठेकेदार को अनियमित रूप से भुगतान किया गया है। इसी गड़बड़ी के चलते आयुक्त द्वारा मुख्य नगर पालिका अधिकारी बैतूल सतीश मटसेनिया तथा उपयंत्री जतिन पाल को निलंबित करने की कार्रवाई की है।

कितना और कितनी बार हुआ भुगतान 

नपा सूत्रों के अनुसार ट्रेंचिंग ग्राउंड पर लीगेसी वेस्ट डंप साइट रेमेडिएशन परियोजना का पूरा ठेका करीब 7 करोड़ का है। इसमें से 2.41 करोड़ रुपये का भुगतान ठेकेदार को किया जा चुका है। यह भुगतान ठेकेदार को 3 बार में किया गया है। जांच दल ने भी माना है कि टेंडर की शर्तों के अनुरूप कार्य नहीं होने के बावजूद ठेकेदार को भुगतान किया गया है। 

सहायक यंत्री ने कर दिया था इंकार 

ठेकेदार को भुगतान की जो प्रक्रिया है, उसमें सबसे पहले ठेकेदार की ओर से बिल पेश कर जानकारी दी जाती है कि इतना काम हो चुका है। इसके बाद नगर पालिका का सब इंजीनियर जाकर मुआयना कर सत्यापन करता है। सब इंजीनियर के बाद सहायक यंत्री को मौके पर पहुंच कर सत्यापन करना होता है। सहायक यंत्री के सत्यापन और अनुमोदन के बाद ही सीएमओ द्वारा हस्ताक्षर किए जाते हैं और भुगतान होता है। बैतूल नगर पालिका के  सहायक यंत्री नीरज धुर्वे ने इन गड़बड़ियों को देखते हुए अनुमोदन और सत्यापन करने से साफ इंकार कर दिया था। 

कार्यपालन यंत्री ने किया था सत्यापन 

सहायक यंत्री द्वारा इंकार किए जाने के बाद सीएमओ द्वारा कार्यपालन यंत्री सचिन कडू को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। कार्यपालन यंत्री ने कथित रूप से 3 बार मौका मुआयना कर सत्यापन किया और भुगतान के लिए अनुमोदन कर दिया। कार्यपालन यंत्री के द्वारा अनुमोदन करते ही बिना कोई देर किए सीएमओ सतीश मटसेनिया द्वारा 3 बार ठेकेदार को भुगतान कर दिया गया। 

कार्यपालन यंत्री पर भी हों कार्यवाही  

इन हालातों में अब यह मांग भी उठ रही है कि जब इस पूरे मामले में कार्यपालन यंत्री भी बराबर के दोषी है तो उन पर भी कार्यवाही होना चाहिए। यदि कार्यपालन यंत्री गलत सत्यापन और अनुमोदन करने से इंकार कर देते तो ठेकेदार को भुगतान भी नहीं होता और भुगतान नहीं होने की स्थिति में ठेकेदार कार्य भी गंभीरता से करता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।