Holi 2026 Holika Dahan Muhurat: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। हिन्दु धर्म के महत्वपूर्ण पर्व होली को लेकर इस साल असमंजस की स्थिति है। फाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाया जाने वाले होलिका दहन को लेकर लोग अलग-अलग बातें कर रहे हैं। इस साल पूर्णिमा 2 मार्च और 3 मार्च दोनों दिन हैं। इतना ही नहीं 2 मार्च को भद्रा और 3 मार्च को चंद्रग्रहण भी है जो भारत में भी दिखाई देगा।

होलिका दहन कब करना चाहिये और धुरेंडी पर्व कब मनाना चाहिये, इसे लेकर राष्ट्रीय जनादेश ने प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. डॉ. कांत दीक्षित से विस्तृत चर्चा की। डॉ. दीक्षित का मानना है कि भद्रा के मुख की बजाए पूंछ में होलिका दहन करने की बात शास्त्रों में वर्णित है। इसलिए होलिका दहन २ मार्च रात्रि ११.५३ बजे से ३ मार्च २.३८ बजे तक करना श्रेष्ठ है वहीं रंगों का पर्व धुरेंडी पर्व ४ मार्च बुधवार को मनाना चाहिये।

पं. डॉ. कांत दीक्षित ने बताया २ मार्च को फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी और पूर्णिमा दोनों हैं। 2 मार्च को भद्रा काल भी है, लेकिन शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि भद्रा मुख का त्याग कर भद्रा पूछ में कार्य करना शुभ होता है। ३ मार्च को खग्रास चन्द्रग्रहण है जो भारत में भी दिखाई देगा। चन्द्रग्रहण का प्रारंभ दोपहर ३.१९ बजे से है और मोक्ष संध्या ६.४७ पर है।

भारत में चन्द्रोदय के समय इस ग्रहण का केवल मोक्ष ही दिखाई देगा। चन्द्रग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने के ९ घंटे पूर्व सुबह ६.१९ बजे से लग जाएगा। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि ४ मार्च को है। ऐसे में होलिका दहन करने के लिए २-३ मार्च की रात्रि में ११.५३ बजे से २.३८ बजे का मुहुर्त्त शुभ है। सोमवार-मंगलवार की रात्रि में होलिका दहन करने के बाद रंगों का पर्व धुरेंडी बुधवार ४ मार्च को चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाना श्रेष्ठ रहेगा।