Tapti Barrage Betul: जुगाड़ से तैयार हुआ ताप्ती बैराज का बंड, 12 फीट तक पानी रोकने में मिली सफलता
Tapti Barrage Betul: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। बैतूल शहर को पानी मुहैया कराने वाले ताप्ती बैराज हर साल क्षतिग्रस्त होता है और हर बार उसकी मरम्मत होती है। इसकी मरम्मत पर ही अब तक लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ। वहीं अब नपा की जल प्रदाय शाखा के प्रभारी सब इंजीनियर धीरेंद्र राठौर ने जुगाड़ के सहारे ही बैराज का बंड बना दिया है। इससे इसमें 12 फीट तक पानी रोकने में सफलता भी मिल गई है। इससे गर्मी के दिनों में पानी को लेकर ज्यादा परेशानी नहीं उठाना पड़ेगा।
बैतूल शहर में जलापूर्ति के लिए माचना एनीकट नाकाफी साबित होने लगा तो वैकल्पिक स्रोत के रूप में खेड़ी स्थित ताप्ती नदी पर नगर पालिका बैतूल ने बैराज बनवाया था। यह बैराज करीब 7 करोड़ रुपये में बना था, लेकिन पहली बारिश में ही इसकी गुणवत्ता के प्रमाण मिल गए थे। बाढ़ आते ही बैराज के एक ओर का इसका बंड (तटबंध या किनारा) बह गया था। इसके बाद इसकी मरम्मत कराई गई, लेकिन स्थाई हल नहीं निकल सका। हर बारिश में यह बंड बह जाता और नपा को इसकी मरम्मत कराना पड़ता। इस पर बड़ी राशि खर्च हो चुकी है। अभी भी यह बंड क्षतिग्रस्त अवस्था में ही पड़ा था। जिसके चलते यहां काफी कम पानी स्टोर हो पा रहा था।
गर्मी में करना पड़ता दिक्कतों का सामना
यदि यह बैराज इसी हालत में रहता तो शहरवासियों को पानी को लेकर भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता था। हालांकि नगर पालिका ने इस बार इसकी मरम्मत बांधों के विशेषज्ञ जल संसाधन विभाग से करवाने की पहल की थी, लेकिन विभाग ने इसकी मरम्मत करने से इंकार करते हुए आसपास नया बैराज बनाने की राय दी है। विभाग द्वारा इसकी डीपीआर भी बनाई जा रही है। हालांकि यह योजना अभी प्रारंभिक दौर में है और इसे मूर्त रूप लेने में लंबा समय लगेगा।
इस गर्मी के लिए जरुरी थी व्यवस्था
ऐसे में इस गर्मी के लिए व्यवस्था करना जरुरी था। यही कारण है कि जल प्रदाय शाखा के प्रभारी श्री राठौर ने तात्कालिक व्यवस्था के तौर पर अपने स्तर पर ही यहां काम शुरू किया। चूंकि वे डैम के मामलों के एक्सपर्ट नहीं है, इसलिए यही माना जाएगा कि उन्होंने जुगाड़ के सहारे ही पानी रोकने की कोशिश की और उन्हें इस मामले में सफलता भी मिली। नगर पालिका बड़ी राशि खर्च करके जो काम नहीं कर सकी, वह काम श्री राठौर के जुगाड़ ने महज 4-5 लाख रुपये खर्च करके ही कर लिया। मुलताई में पोस्टिंग के दौरान उनकी देखरेख में हरदौली डैम बना था, वहां का अनुभव यहां काम आया।
इस तरह तैयार कर दिया बैराज का बंड
श्री राठौर ने इसके लिए क्रेशर से 4 डंपर बारीक डस्ट बुलाई। इसके अलावा 100 डंपर मुरम बुलाई गई। बोल्डर तो मजदूरों से वहीं से जमा करवा लिए गए। जेसीबी मशीन नगर पालिका की उपयोग की गई। इन सबके सहारे उन्होंने बैराज के क्षतिग्रस्त हिस्से को दुरूस्त करने के लिए यहां बंड बना दिया। यह बंड जमीन से 20 मीटर ऊंचा, 25 मीटर लंबा और 6 मीटर से ज्यादा चौड़ाई का है। पहले बैराज में काफी कम पानी रूक पा रहा था, लेकिन यह बंड बन जाने से अधिक मात्रा में पानी रूक रहा है।
प्रेशर से बचाने अभी रखा है खाली
यह बंड केवल कामचलाऊ व्यवस्था के तौर पर है। इससे पानी का ज्यादा प्रेशर या बाढ़ यह बिल्कुल नहीं झेल पाएगा। यही कारण है कि बैराज के लगभग खाली हो जाने पर घोघरी डैम से अभी केवल आधा एमसीएम पानी ही छुड़वाया गया और इसे मात्र 12 फीट की ऊंचाई तक ही पानी भरा गया है और 8 फीट खाली रखा गया है। श्री राठौर ने बताया कि यह पानी अप्रैल महीने के आखिर तक चल सकेगा। नगर पालिका घोघरी डैम में शहर के लिए एक एमसीएम पानी पेयजल के लिए रिजर्व रखवाती है।
शहर में रोजाना इतने पानी की सप्लाई
नगर पालिका के अनुसार शहर में रोजाना 90 लाख लीटर पानी की सप्लाई की जाती है। इसके लिए शहर भर में 9 टंकियां हैं। वहीं नगर पालिका का पाइप लाइन का नेटवर्क करीब 200 किलोमीटर लंबाई का है। पेयजल के लिए नगर पालिका द्वारा 17400 नल कनेक्शन दिए गए हैं। ताप्ती बैराज के अलावा नगर पालिका बैतूल के विवेकानंद वार्ड में स्थित माचना एनीकट से भी पानी लेती है। हालांकि यहां का पानी आपात स्थिति में उपयोग करने के लिए रिजर्व रखा जाता है।

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