Minor Irrigation Census Betul: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। एक ओर जनगणना की तैयारी है, जिसमें लोगों की गिनती होना है। वहीं दूसरी ओर खेतों में स्थित कुओं और ट्यूबवेलों की भी अलग से गणना की जाएगी। यह जिम्मा पटवारियों को सौंपा गया है। यह बात अलग है कि इसके लिए पटवारियों को प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। इससे उनमें नाराजगी के साथ चिंता भी है कि वे यह गणना कैसे कर पाएंगे। यही कारण है कि अभी तक यह कार्य शुरू नहीं हो पाया है। 

शासन द्वारा सिंचाई के स्रोतों की जानकारी प्राप्त करने के लिए हर 5 साल में लघु सिंचाई संगणना कराई जाती है। यह संगणना इस साल की जाना है। इस बार तकनीक का प्रयोग करते हुए एमआई सेंसस नामक एप के जरिए यह संगणना होना है। लघु सिंचाई संगणना का जिम्मा पटवारियों को सौंपा गया है, लेकिन इस एप का प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। बिना प्रशिक्षण के ही पटवारियों को संगणना करने का फरमान सुना दिया गया है। इधर पटवारियों ने भी प्रशिक्षण नहीं मिलने से अभी तक संगणना का कार्य शुरू नहीं किया है। 

महज दो दिनों में पूरा करना है कार्य 

मध्यप्रदेश पटवारी संघ जिला बैतूल के कार्यकारी जिला अध्यक्ष अवधेश वर्मा बताते हैं कि यह संगणना महज 2 दिनों में करने को कहा गया है। व्यवहारिक रूप से यह संभव ही नहीं है। संगणना में पटवारियों को एक-एक कुएं और ट्यूबवेल के पास जाकर जियो टैग से फोटो लेना है और लोकेशन डालना है। पूरे पटवारी हल्का में मात्र 2 दिनों में हर जगह पहुंच कर इतना सब कुछ कर पाना संभव ही नहीं है। 

कई पटवारियों के पास अतिरिक्त प्रभार

वर्तमान में हर पंचायत को एक पटवारी हल्का बनाया गया है। जिले में पंचायतों की संख्या 554 हैं, वहीं दूसरी ओर पटवारी महज 488 हैं। इसके चलते कई पटवारियों के पास दो-दो हल्कों का प्रभार भी है। ऐसे में मात्र 2 दिनों में यह संगणना कर पाना संभव ही नहीं है। 

गिनती के अलावा यह जानकारी भी लेंगे

इस संगणना में कुओं और ट्यूबवेलों की केवल संख्या ही नहीं लेना है बल्कि कुओं की गहराई-चौड़ाई, ट्यूबवेलों में भी गहराई चौड़ाई, कब से बने या खनन किए गए, सिंचाई बिजली मोटर से या डीजल पंप से करते हैं, सिंचाई के लिए डैम से पानी लेते हैं क्या और लेते हैं तो कैसे, सिंचाई में स्प्रिंकलर का उपयोग तो नहीं करते हैं, यह सभी जानकारी भी लेना है। 

पटवारी बोले- पहले दी जाएं ट्रेनिंग 

इन्हीं सब कारणों से पटवारियों ने अभी तक संगणना का कार्य शुरू नहीं किया है। उनका साफ कहना है कि पहले एप चलाने का प्रशिक्षण दिया जाएं, उसके बाद ही वे संगणना का कार्य शुरू कर पाएंगे। इसके अलावा उन्होंने समयावधि बढ़ाए जाने की मांग भी की है।