Hemant Khandelwal: राजनीति में 'फील द डिफरेंस' मतलब हेमंत खंडेलवाल, पेश कर रहे अलग ही नजीर
► प्रदेश अध्यक्ष और विधायक खंडेलवाल ने बैतूल विधानसभा में विकास कार्यों की गुणवत्ता जांचने के दिए निर्देश
► शुचिता और सादगी की राजनीति: टोल भरने से लेकर सरकारी बंगला न लेने तक अलग पहचान
♦ मयूर भार्गव, बैतूल
आज के दौर में राजनीति में शुचिता की बात करना आम तौर पर विरोधाभाषी होता है। राजनीति का क्षेत्र इतना अधिक दूषित होता जा रहा है कि शुचिता की बात करने वालों को या तो राजनीति के मैदान से बाहर होना पड़ता है या फिर उनका रूतबा एकदम से बढ़ जाता है। बैतूल विधायक और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल भी आए दिन अपनी शुचिता की राजनीति और सादगी (डाऊन टू अर्थ व्यवहार) के कारण चर्चा में रहते हैं। चाहे सरकारी बंगला नहीं लेने की बात हो, गाड़ी पर नेम प्लेट की बात हो, टोल बेरियर पर टोल चुकाने की बात हो सहित अनेक ऐसी बातें हैं जो राजनीति के क्षेत्र में हेमंत खण्डेलवाल को अन्य नेताओं से जुदा बनाती हैं।
ताजातरीन मामले में श्री खण्डेलवाल ने अपनी विधानसभा क्षेत्र में चल रहे प्रगतिरत एवं पूर्ण हो चुके निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांच के लिए कलेक्टर बैतूल को पत्र लिखकर एक जांच दल बनाकर बैतूल विधानसभा में हो रहे कार्यों की गुणवत्ता जांचने और उसका विस्तृत जांच प्रतिवेदन देने के निर्देश दिए हैं। इस बार हेमंत के इस नवाचार की भी जमकर चर्चा हो रही है, क्योंकि अपनी ही सरकार में और अपनी ही विधानसभा में इस तरह का साहस आज तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने नहीं दिखाया है जो कि हेमंत खण्डेलवाल दिखा रहे हैं।
श्री खण्डेलवाल का यह नवाचार स्पष्ट संदेश है कि उनकी विधानसभा में जो भी निर्माण कार्य किए जाएंगे उनमें लापरवाही, भ्रष्टाचार, गुणवत्ता से समझौता बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैतूल बाजार के सुभाष वार्ड की सड़क इसका जीता जागता उदाहरण बन गई है जो कि जांच में फेल होने के बाद अब दोबारा बनाई जाएगी। हेमंत की यहीं कार्यप्रणाली उन्हें दूसरे राजनेताओं से अलग दिखाती है। इसीलिए हेमंत खंडेलवाल अब राजनीति के क्षेत्र में 'फील द डिफरेंस' का पर्याय बनते जा रहे हैं।

काजल की कोठरी कहलाने वाले राजनीति के मैदान में हेमंत खण्डेलवाल के इस नवाचार ने गलत काम करने वालों की रूह कंपाकर रख दी है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद बैतूल विधायक हेमंत खण्डेलवाल के रु तबे में जो बदलाव आया है वह अब जिले में सार्वजनिक तौर पर दिखने लगा है। बोलने में कम और काम करने में ज्यादा विश्वास रखने वाले श्री खण्डेलवाल ने अपने क्षेत्र के नागरिकों से लगातार मिल रही शिकायतों के बाद बैतूल कलेक्टर को पत्र लिखकर वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में दिसम्बर 2025 तक विधायक निधि, विशेष निधि, जिला खनिज मद एवं बस्ती विकास योजना के तहत बैतूल विधानसभा क्षेत्र में स्वीकृत विकास कार्यों की गुणवत्ता और निर्धारित मापदण्डों की जांच करने को कहा है।
कलेक्टर को लिखे पत्र में श्री खण्डेलवाल ने बैतूल विधानसभा क्षेत्र के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय वर्ष वर्ष 2024-25 और 2025-26 में दिसम्बर 2025 तक विधायक निधि, विशेष निधि, जिला खनिज मद और बस्ती विकास योजना से स्वीकृत किए गए कार्यों के संबंध में नागरिकों, विशेषकर विधानसभा क्षेत्र की जनता द्वारा लगातार मिल रही शिकायतों को लेकर उक्त कार्यों की गुणवत्ता मानक अनुरूप क्रियान्वयन एवं उपयोगिता जांचने का कहा है। पत्र में लिखा गया है कि कुछ कार्यों में निर्धारित मापदण्डों के अनुरूप गुणवत्ता नहीं होने की भी शिकायतें आ रही हैं।
जनहित के कार्यों में पारदर्शिता के चलते जरूरी है कि उपरोक्त मदों से स्वीकृत कार्यों में पूर्ण एवं प्रगतिरत निर्माण कार्यों का स्थल निरीक्षण, कार्यों की गुणवत्ता का आंकलन कर मदवार एवं कार्यवार विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर प्रस्तुत करें। इस हेतु जिला योजना अधिकारी की अध्यक्षता में संबंधित विभागीय अधिकारियों को शामिल कर एक दल का गठन कर सभी कार्यों का निरीक्षण कर तकनीकी, वित्तीय एवं गुणवत्ता संबंधी जांच की समीक्षा कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर प्रस्तुत करें। जांच करते समय यह भी देखें की कार्य स्थल पर गाइडलाइन के अनुसार निर्माण कार्यों के बोर्ड लगाए गए हैं अथवा नहीं। जांच प्रतिवेदन में निर्माण कार्यों के फोटोग्राफ्स भी प्रतिवेदन के साथ मुझे भेजे।
विधायक हेमंत खण्डेलवाल द्वारा निर्माण कार्यों को लेकर लिखे गए पत्र के बाद निर्माण कार्यों से जुड़े विभाग और ठेकेदारों में हड़कम्प मचा हुआ है। अब या तो बैतूल विधानसभा में विशेषकर विधायक निधि से गुणवत्तापूर्ण कार्य होंगे या फिर ठेकेदार और भ्रष्ट अफसरों को अपना बोरिया बिस्तर बांधकर कूच करना पड़ेगा क्योंकि अब बैतूल विधायक और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता करने के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं। उनका आक्रमक रूख ही बता रहा है कि बस अब तक बहुत हो गया अब यह सब बिल्कुल भी नहीं चलेगा।
उपरोक्त कुछेक उदाहरण हैं जो वर्तमान दौर की राजनीति में हेमंत खण्डेलवाल अर्थात फील द डिफे्रंस (औरों से अलग होने) का एहसास कराते हैं क्योंकि राजनीति में तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा जैसा दौर चल रहा है। कहने का तात्पर्य यह है कि हम भ्रष्टन के भ्रष्ट हमारे की तर्ज पर सब कुछ चल रहा है। कोई भी शिष्टाचार बन चुके इस भ्रष्टाचार के काकस को तोड़ने की कोशिश नहीं करता है। बहरहाल हेमंत खण्डेलवाल इसीलिए राजनीति में दूसरों से जुदा नजर आते हैं क्योंकि वे सिर्फ शुचिता की बात ही नहीं करते बल्कि अपने आचरण में भी उन्होंने उसे उतार लिया है।

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