Betul News in Hindi: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। शहर में ऐसा लगता है कि नियम कायदों की किसी को कोई फिक्र ही नहीं है। खासतौर से स्पीड ब्रेकरों के मामले में तो ऐसा ही देखा जा रहा है। चाहे मुख्य सड़क हो या फिर भीतरी सड़कें और गलियां हो, हर किसी पर जिसकी जहां इच्छा हो रही है, वहीं पर ब्रेकर बना या लगा दिए जाते हैं। इससे वाहन चालकों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। 

शहर की सिविल लाइन स्थित सिंधी कॉलोनी में भी शनिवार को ऐसा ही कुछ नजारा देखा गया। यहां नगर पालिका ने कुछ दूरी पर ही एक-दो नहीं बल्कि पूरे 3 स्पीड ब्रेकर लगा दिए गए हैं। कॉलेज चौक रोड से लश्करे अस्पताल की ओर जाने वाली इस रोड की लंबाई ही बहुत कम हैं, उस पर भी यहां थोड़ी-थोड़ी दूरी पर 3-3 ब्रेकर लगा दिए जाने से सभी को हैरत हो रही है।

यदि किसी मंदिर आदि के पास एकाध ब्रेकर लगाया भी जाता तो समझ आता, लेकिन यहां एक के बाद एक 3 ब्रेकर लगा दिए गए हैं। यह केवल एक सड़क की ही बात नहीं है, बल्कि पूरे शहर के यही हाल हैं। सड़कों पर जिसकी जहां इच्छा होती है, वहीं पर कभी नगर पालिका ब्रेकर बना देती है या फिर लोग खुद ही बना लेते हैं। मुख्य सड़कों का भी यही हाल है। 

मापदंडों का नहीं रखा जाता ध्यान 

खास बात यह है कि ब्रेकर बनाने के लिए तय मापदंडों का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा जाता। मापदंड के अनुसार न ब्रेकर के लिए जगह तलाश की जाती है और न ही ऊंचाई-चौड़ाई-लंबाई का ही ध्यान रखा जाता है। कहीं-कहीं तो इतने ऊंचे और बड़े ब्रेकर बना दिए जाते हैं कि वाहनों का निकलना ही मुश्किल हो जाता है। इन ब्रेकरों से निकलते समय कार इनसे टकरा जाती हैं। यही नहीं मोटर साइकिलों में भी इन ब्रेकरों पर पटकाने से टूट-फूट होती रहती है। 

ब्रेकरों से आए दिन होते रहते हैं हादसे 

शहर में सड़कों पर अचानक ब्रेकर बना दिए जाते हैं और नियम अनुसार उनकी विजिबिलिटी बढ़ाने सफेद रंग तक नहीं पोता जाता है। यही कारण है कि पहले की तरह तेज रफ्तार से निकल रहे वाहन चालक इन ब्रेकरों के कारण हादसों का शिकार हो जाते हैं। लोगों का कहना है कि सड़कें इसलिए बनाई जाती है ताकि वाहन रफ्तार के साथ निकल सके, लेकिन जिस तरह कदम-कदम पर ब्रेकर बना दिए जाते हैं, उससे सड़क बनाने का कोई औचित्य ही साबित नहीं होता।