विधानसभा में उठा भागीरथपुरा मौत कांड का मुद्दा, अध्यक्ष ने दी अहम जानकारी
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में भागीरथपुरा में हुई मौतों का मामला गुरुवार को जोरदार बहस और हंगामे का कारण बना. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए तो अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने स्पष्ट किया कि जब कोई मामला जांच आयोग और कोर्ट में लंबित हो, तो उस पर विस्तृत चर्चा नहीं की जानी चाहिए. हालांकि उन्होंने सीमित दायरे में संक्षिप्त चर्चा की अनुमति दी और कहा कि किसी प्रकार की मांग या सवाल नहीं होंगे, केवल प्रस्ताव के विषय पर चर्चा होगी।
’47 मिनट कुत्तों पर चर्चा, इंसानों पर क्यों नहीं?’
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि सदन में 47 मिनट कुत्तों के मुद्दे पर चर्चा हो सकती है तो इंसानों की मौत पर क्यों नहीं. उन्होंने तर्क दिया कि मंदसौर गोलीकांड और व्यापम जैसे मामलों पर भी तब चर्चा हुई थी, जबकि वे भी न्यायालय में लंबित थे. सिंघार ने पूछा कि मौतें कब से शुरू हुईं, अब तक कितनी राशि पीड़ित परिवारों को दी गई और कुल मृतकों की संख्या क्या है।
स्वास्थ्य मंत्री का जवाब: 22 मौतें, 44 लाख मुआवजा
स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने बताया कि 29 तारीख को भागीरथपुरा से मौत की सूचना मिली. 21 से 29 के बीच डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ी और पहली मृत्यु इसी अवधि में हुई. अब तक 22 मौतें दर्ज की गई हैं. प्रत्येक मृतक के परिजन को ₹2 लाख की सहायता के हिसाब से ₹44 लाख की राशि वितरित की गई है. मंत्री ने कहा कि जांच के लिए टीम भेजी गई और आवश्यक कार्रवाई की गई।
‘सांप काटने पर 4 लाख, यहां 2 लाख क्यों?’
उमंग सिंघार ने मुआवजे की राशि पर सवाल उठाते हुए कहा कि आपदा या सांप काटने से मृत्यु पर ₹4 लाख दिए जाते हैं, तो यहां ₹2 लाख क्यों? उन्होंने कहा कि सरकार की लापरवाही से मौतें हुई हैं, इसलिए ₹4 लाख प्रति परिवार दिए जाएं. उन्होंने यह भी कहा कि “मेरे घर पैसा नहीं जाना चाहिए, पीड़ित परिवारों को मिलना चाहिए। ’
मुख्यमंत्री ने किया हस्तक्षेप
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह संवेदनशील विषय है और सरकार समाधान पर काम कर रही है. पोस्टमार्टम और सामान्य मृत्यु के पहलुओं की भी जांच कराई गई है. एक आईएएस अधिकारी को निलंबित किया गया है. उन्होंने कहा, ‘पैसे का सवाल नहीं है, दो की जगह पांच देने को भी तैयार हैं। ’
इस्तीफे की मांग और पलटवार
सिंघार ने मंत्रियों की नैतिक जिम्मेदारी तय करने और इस्तीफे की मांग उठाई. उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय और स्वास्थ्य मंत्री की जवाबदेही का मुद्दा उठाया. इस पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने पलटवार करते हुए कहा कि जिस आशंका की बात थी, वही सदन में हो रहा है. उन्होंने यूनियन कार्बाइड का मुद्दा उठाते हुए विपक्ष पर नैतिकता का सवाल खड़ा किया।
सदन में हुआ जमकर हंगामा
दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामे के बीच अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर खुद आसंदी से खड़े हुए और कांग्रेस विधायकों से अपनी सीट पर बैठने का आग्रह किया. अंत में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विपक्ष सरकार के जवाब से पूरी तरह असंतुष्ट है और नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग दोहराई. भागीरथपुरा प्रकरण को लेकर सदन में सियासी तापमान बढ़ा हुआ है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।

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