बाजार में खप चुकी डेढ़ लाख बोतलें, पानी खरीदते समय बरतें सावधानी
गोरखपुर| बाजार में बोतलबंद पानी खरीदने के पहले सतर्क रहें। हो सकता है आप जो पानी पीने जा रहे हैं वह दूषित हो और आपकी जान पर बन आए। शहर में पानी के चार लोकल ब्रांड के नमूने फेल मिले हैं, जो पीने लायक नहीं हैं। इन ब्रांड के पानी के उत्पादन और बिक्री पर रोक तो लगा दी गई है, लेकिन इसके पहले ही यहां से करीब डेढ़ लाख बोतल पानी की आपूर्ति बाजार में हो चुकी है। इसे हटाया नहीं गया और लोग बेफिक्र होकर वही पानी पी रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बोतलबंद पानी पीने में सतर्कता बहुत जरूरी है वरना पीलिया के साथ पेट संबंधित अन्य गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की जांच में चार स्थानीय कंपनियों के पैक्ड ड्रिंकिंग वाटर के नमूने फेल पाए गए हैं। जांच रिपोर्ट में इस पानी में कोलीफाॅर्म जैसे हानिकारक बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है, जो सीधे तौर पर स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माने जाते हैं। इसके बाद प्रशासन ने संबंधित कंपनियों के उत्पादन और बिक्री पर रोक लगा दी है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बाजार में अब भी इन कंपनियों के बोतलबंद पानी धड़ल्ले से बिक रहे हैं। दरअसल, प्रतिबंध से पहले इन कंपनियों का जो स्टॉक बाजार में भेजा गया था, वही लॉट अब भी दुकानों पर मौजूद है। विभागीय कार्रवाई प्लांट तक सीमित रहने के कारण यह स्टॉक पूरी तरह जब्त नहीं हो पाया है। बाॅटलिंग प्लांट लगाने वाले विशाल ने बताया कि स्थानीय स्तर पर प्लांट में रोजाना 15 से 20 हजार बोतल पानी का उत्पादन हो जाता है। स्थानीय ब्रांड की खपत रेलवे और बस स्टेशन, चाय के अलावा छोटी दुकानों पर ज्यादा होती है। बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन और इनके आसपास के क्षेत्रों में लोकल ब्रांड का बोतलबंद पानी आसानी से मिल जाता है। सफर के दौरान प्यास लगने पर लोग जल्दबाजी में बिना ब्रांड या गुणवत्ता देखे बोतल उठा लेते हैं। यात्रियों को यह भरोसा रहता है कि सीलबंद बोतल में पानी सुरक्षित ही होगा लेकिन यही भरोसा कई बार उनकी सेहत पर भारी पड़ सकता है।
ट्रेन आते ही बोतल लेकर दौड़ते हैं बच्चे
रेलवे स्टेशन पर ट्रेन आते ही बच्चे और महिलाएं पानी की बोतलें लेकर दौड़ पड़ते हैं। खासकर भीड़ वाले कोच के सामने खड़े हो जाते हैं ताकि यात्री नीचे आने लायक न हो। प्यासे लोग तत्काल पानी लेकर प्यास बुझाते हैं। दरअसल, यह पानी वहीं रेलवे की सप्लाई वाला होता है। खाली बोतल के लिए कुछ लोग लगे होते हैं जो ट्रेन में जाकर या पटरियों के पास फेंके गए बोतलों को उठा लेते हैं। कई जगहों पर खाली बोतलों में सामान्य नल या हैंडपंप का पानी भरकर दोबारा बेचने का खेल भी चल रहा है। स्थानीय स्तर पर खाली बोतलें इकट्ठा कर ली जाती हैं और उनमें बिना किसी शुद्धिकरण के पानी भरकर उन्हें दोबारा सील जैसा रूप दे दिया जाता है। बाहर से देखने पर बोतल नई और सुरक्षित लगती है लेकिन अंदर का पानी पूरी तरह असुरक्षित हो सकता है। सफर करने वाले लोग, जो शहर से अनजान होते हैं, आसानी से इस धोखे का शिकार हो जाते हैं, क्योंकि उन्हें स्थानीय हालात की जानकारी नहीं रहती।
कमीशन के खेल में लोकल ब्रांड की मांग ज्यादा
दुकानदारों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। लोकल ब्रांड और इस तरह के पानी पर उन्हें नामी कंपनियों के मुकाबले ज्यादा कमीशन मिलता है। कम कीमत और ज्यादा मुनाफे के लालच में कई दुकानदार गुणवत्ता से समझौता करने से भी नहीं हिचकते। यही वजह है कि प्रतिबंध और चेतावनी के बावजूद बाजार में असुरक्षित पानी की बिक्री पूरी तरह नहीं रुक पा रही है। जानकारों का कहना है कि लोकल ब्रांड का पानी भी 20 रुपये लीटर बिकता है और इसमें 12 से 13 रुपये कमीशन मिल जाता है।
बैक्टीरिया युक्त बोतलबंद पानी से बीमारियों का खतरा
कोलीफाॅर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी साफ बताती है कि पानी का स्रोत या प्रोसेसिंग दूषित है। बोतलबंद पानी यदि बैक्टीरिया से दूषित हो जाए तो यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। ऐसे पानी के सेवन से दस्त, उल्टी, पेट दर्द, टाइफाइड, हैजा और पीलिया जैसी बीमारियां हो सकती हैं। कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में डिहाइड्रेशन और संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। पानी का बोतल खरीदते समय उसकी सील, निर्माण व समाप्ति तिथि जरूर जांचें: डॉ. प्रशांत सिंह, फिजिशियन, जिला अस्पताल

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