Underground Parking Betul: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। नगर पालिका द्वारा जनता के पसीने की कमाई उड़ाना आम बात हो गई है। ताजा मामला नपा द्वारा शहर के ऐतिहासिक महत्व के गांधी चौक पर बनाई जा रही अण्डरग्राउंड पार्किंग का है। जिसकी क्षमता, लागत और स्थान को लेकर सवाल उठने लगे है। नगर पालिका द्वारा दो करोड़ रूपए की भारी भरकम राशि खर्च कर शहर के ऐतिहासिक महत्व के स्थल गांधी चौक के बीच मार्केट में अण्डरग्राउंड पार्किंग निर्माण करने का टेण्डर दिया गया है।

लगभग ४२०० वर्गफीट में बनने वाली इस अण्डरग्राउंड पार्किंग में अधिकतम ९० बाईक पार्क की जा सकेंगी। यहां चौपहिया वाहन पार्क करने जगह ही नहीं हैं। ऐसे में नपा द्वारा प्रति बाईक पार्क करने लगभग २ लाख २२ हजार रूपए खर्च किए जा रहे है। इतना ही नहीं यहां पार्किंग बनाने नपा द्वारा गांधी चौक में पिछले ३०-४० साल से अस्थाई दुकान लगाने वाले दुकानदारों को भी हटाया जा रहा है। हालांकि उन्हें आश्वासन दिया गया है कि अंडर ग्राउंड पार्किंग के ऊपर डलने वाली छत पर उन्हें शेड बनाकर वापस शिफ्ट किया जाएगा। लेकिन दुकानदारों को नपा के इस मौखिक आश्वासन पर यकीन नहीं है। 

बीच बाजार में बना रहे पार्किंग

किसी भी नगर, महानगर में आमतौर पर पार्किंग स्थल मार्केट के बाहर बनाया जाता है ताकि नागरिक पार्किंग में अपने दोपहिया, चौपहिया वाहन पार्क कर मार्केट में खरीदी कर सके और मार्केट में भी वाहन न जा पाए, लेकिन बैतूल नगरपालिका द्वारा कोठीबाजार मार्केट के बीचो-बीच गांधी चौक में पार्किंग बनाई जा रही है। गांधी चौक के एक साइड थाना रोड पर साप्ताहिक बाजार भरता हैं। दूसरे साइड सीमेंट रोड पर मेन मार्केट है। वहीं सीमेंट रोड पर इतनी अधिक भीड़ रहती है कि सीजन के समय पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है तो दोपहिया वाहन निकलने की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

साप्ताहिक बाजार रविवार और गुरूवार को तो पार्किंग तक पहुंचना ही मुश्किल हो जाएगा। यदि नपा को पार्किंग बनाना ही था तो कुछ समय बाद शिफ्ट होने वाले जिला जेल की जमीन पर दोपहिया वाहनों के साथ ही चौपहिया वाहनों की पार्किंग भी बनाई जा सकती थी। वत्र्तमान में लल्ली चौक से गणेश मंदिर चौक तक अतिक्रमण हटाकर जिला जेल की दीवार से लगकर दोपहिया और चौपहिया दोनों वाहनों के लिए पर्याप्त पार्किंग बनाई जा सकती है। यहां बेजा अतिक्रमण ने हालात बिगाड़ कर रखे है। 

चालीस साल से दुकान लगाने वालों को किया जा रहा बेदखल

शहर का गांधी चौक शहर के लिए ऐतिहासिक महत्व का स्थान है यहां १९३० में महात्मा गांधी की आमसभा हुई थी वहीं देश को आजादी मिलने के बाद १९४७ में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों द्वारा अशोक स्तंभ स्थापित कर ध्वजारोहण किया गया था। तब से यहां प्रतिवर्ष स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण भी किया जाता है। यहां महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित होने के साथ ही शहर की सबसे पुरानी गुजरी भी है। गुजरी में पिछले लगभग ४० साल से छोटे दुकानदार फल, सब्जी, अनाज, कपड़े, मनिहारी, पूजन सामग्री, चूना, पान सहित अन्य दुकाने लगा रहे है।

यहां चालीस साल से चूने की दुकान लगा रहे बाबा चौरसिया, अनाज विक्रेता गब्बर राठौर, सब्जी विक्रेता, दिनेश राठौर, फल विक्रेता सलीम खान, पूजन सामग्री विक्रेता वहीद खान सहित अन्य दुकानदारों ने बताया उन्हें नगर पालिका द्वारा गांधी चौक से दुकान हटाने का फरमान सुना दिया गया है जबकि वे गुजरी में २-३ पीढ़ी से दुकाने लगा रहे है। दुकानदारों का कहना है कि नपा हमें शेड में दुकान देने की बात तो कह रही है लेकिन लिखित में कुछ भी नहीं है। बाद में इस छत पर क्या शिफ्ट किया जाता है यह कहना भी अभी मुश्किल है। 

दो करोड़ में बन रही है पार्किंग 

नगर पालिका के सब इंजीनियर नागेन्द्र वागद्रे ने बताया नगर पालिका परिषद की स्वीकृति के बाद गांधी चौक पर दो पहिया वाहनों के लिए अण्डरग्राउंड पार्किंग बनाने का टेण्डर हुआ है। पार्किंग बनाने का टेंडर सिंगरौली की राजेन्द्र सिंह कंस्ट्रक्शन कंपनी ने लिया है। श्री वागद्रे ने बताया गांधी चौक में लगभग ४२०० वर्गफीट में अंडरग्राउंड पार्किग बनाई जा रही है, जिसमें ८० से ९० दोपहिया वाहन पार्क किए जा सकेंगे। उक्त पार्किंग लगभग दो करोड़ रूपए की लागत से तैयार हो रही है। पार्किंग की छत पर शेड बनाकर अस्थाई दुकाने शिफ्ट की जाएंगी। वहीं गांधी जी की प्रतिमा यथावत रहेगी तथा अशोक स्तंभ भी पुन: स्थापित किया जाएगा।

कांग्रेसियों के विरोध के बाद बंद है काम

अण्डर ग्राउंड पार्किंग के लिए मंगलवार से काम भी शुरू हो गया था। गांधी चौक पर लगे अशोक स्तंभ को जेसीबी से हटाकर कचरा ढोने वाले ट्रेक्टर में ले जाने की तैयारी थी, लेकिन कांग्रेसियों के प्रदर्शन और चक्काजाम के बाद न सिर्फ काम बंद कर दिया गया बल्कि अशोक स्तंभ को भी पुन: स्थापित कर दिया गया है। इसके बाद बुधवार को भी काम शुरू नहीं हुआ है। वैसे भी मात्र ९० बाईक क्षमता की पार्किंग बनाने दो करोड़ रूपए खर्च करने की बात शहरवासियों को हजम नहीं हो रही है। नपा द्वारा अण्डरग्राउंड पार्किंग निर्माण को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। 

चौपहिया वाहन पार्किंग की आवश्यकता

शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र कोठीबाजार में चौपहिया वाहन पार्किंग की सबसे अधिक आवश्यकता है। वत्र्तमान में चौपहिया वाहन से मार्केट आने वाले नागरिक नगरपालिका के सामने वाली सड़क पर दोनों साइड वाहन पार्किंग करते हैं वहीं कुछ लोग मराठी मोहल्ला में सड़क किनारे वाहन पार्क कर मार्केट जाते है। दोपहिया वाहन तो मार्केट तक पहुंच ही जाते है। यदि नगर पालिका को पार्किंग व्यवस्था ही करना है तो पहले चौपहिया वाहनों की पार्किंग व्यवस्था करना जरूरी है। लेकिन नपा दो करोड़ रूपए खर्च कर दोपहिया वाहनों के लिए पार्किंग बना रही है। जिस पर सवाल उठ रहे है।