►विपक्ष को आए दिन घर बैठे देते रहते हैं मुद्दे, पहले लगाते हैं आग और फिर खोदते हैं कुआं 

Betul Nagar Palika Controversy: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। नगर पालिका परिषद बैतूल के अपरिपक्व अफसर और नपा में फैला भ्रष्टाचार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल की साख में बट्टा लगाने का काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं बैतूल विधानसभा के अंतर्गत आने वाली नगर परिषद बैतूल बाजार भी अपनी कारगुजारियों से बैतूल नपा के कदम से कदम मिला रही है, जिससे विधायक हेमंत खंडेलवाल की प्रतिष्ठा धूमिल हो रही है। बैतूल जिला मुख्यालय पर मंगलवार को हुए 2 घटनाक्रमों ने भी यह सिद्ध किया है कि नपा बैतूल के अपरिपक्व अफसरों और भ्रष्टाचार के चलते बैठे-बिठाए विपक्ष को सत्तारूढ़ दल भाजपा पर हमला करने का मौका मिला है। 

वैसे तो इस जिले में भाजपा के राज में हमेशा अफसरशाही, जनप्रतिनिधियों पर हावी रही है, लेकिन अब बैतूल जिला जब राजनैतिक तौर पर हाई प्रोफाइल जिले की श्रेणी में आ गया है, बावजूद इसके अफसर अपनी मनमानी करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं, जिससे आए दिन विपक्ष को हंगामा करने का मौका मिल रहा है। अपरिपक्व अफसरों की आग लगाओ और फिर कुआं खोदो वाली कार्यप्रणाली के चलते आए दिन पब्लिक न्यूसेंस हो रहे हैं। 

मंगलवार को बहुचर्चित ट्रेंचिंग ग्राउंड के मामले में गौठाना क्षेत्र के रहवासियों का गुस्सा फूट पड़ा और बैतूल-परासिया स्टेट हाईवे जाम कर दिया गया। इसके पीछे भी नपा बैतूल का भ्रष्टाचार और अपरिपक्व अफसर ही मुख्य कारण हैं। नवंबर 2025 में बैतूल विधायक की नाराजगी के बाद ट्रेंचिंग ग्राउंड मामले की जांच के लिए बनी समिति की रिपोर्ट कथित तौर पर भ्रष्टाचार के चलते लालफीताशाही में दब कर रह गई। गौठाना क्षेत्र के रहवासी ट्रेंचिंग ग्राउंड से उठने वाली बदबू और दूषित हो रहे पानी से बेहद परेशान हैं, लेकिन नवंबर से आज तक लगभग 4 माह बीतने के बाद भी नागरिकों को इस समस्या से निजात दिलाने का कोई ठोस उपाय नहीं दिया गया है। 

बैतूल विधायक की मंशा अनुसार गांधी चौक पर अंडरग्राउंड पार्किंग और उसके ऊपर गुजरी बाजार लगाने के लिए कार्य स्वीकृत हो चुका है, लेकिन अपरिपक्व अफसरों के कारण बैतूल के हृदय स्थल गांधी चौक पर लगभग 100 साल पुराने राष्ट्रीय स्मारक अशोक स्तंभ को उखाड़े जाने की घटना से एक बार फिर नगरवासियों में आक्रोश पैदा हुआ। बाद में इन्हीं अपरिपक्व अफसरों ने कांग्रेस के जबर्दस्त विरोध के बाद अशोक स्तंभ को वापस उसी स्थान पर स्थापित किया। इस मुद्दे को लेकर मंगलवार को कांग्रेसियों ने गांधी चौक पर चक्काजाम कर जमकर नारेबाजी की और सीएमओ सतीश मटसेनिया के खिलाफ एफआईआर की मांग कर डाली। इसके बाद एसडीएम के निर्देश पर कचरा वाहन से ले जाए जा रहे अशोक स्तंभ को वापस उसी स्थान पर लगाया गया। 

मंगलवार को घटी यह 2 घटनाएं प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के गृह जिले और नगर में हुई हैं। यह 2 घटनाएं सिर्फ तात्कालिक उदाहरण हैं, जिसमें अफसरों की अपरिपक्वता और भ्रष्टाचार की बानगी देखने को मिली है। 

बैतूल विधानसभा के अंतर्गत आने वाली नगर परिषद बैतूल बाजार में तो अति ही हो गई है। विधायक निधि से बनने वाली 10 लाख रुपये लागत की सुभाष वार्ड में बनी सीसी रोड गुणवत्ता जांच में फेल पाई गई है। हेमंत खंडेलवाल जैसे ईमानदार विधायक की निधि से होने वाले काम में भी नप की मिलीभगत से भ्रष्टाचार घर कर गया है। बैतूल नगर पालिका परिषद की कारगुजारियों और भ्रष्टाचार की लंबी फेहरिस्त हैं, कारगुजारियां आए दिन सामने आती रहती हैं, लेकिन उन पर लगाम लगाने वाला कोई नहीं है, क्योंकि पूरे कुएं में ही भांग घुली हुई है। 

इन सबका डायरेक्ट-इन डायरेक्ट असर बैतूल विधायक की साफ-सुथरी छवि पर पड़ रहा है। 2027 में नगर पालिका परिषद के चुनाव भी होने हैं। यदि हेमंत खंडेलवाल ने इनकी लगाम नहीं कसी तो आने वाले समय में इसके नेगेटिव इम्पेक्ट भी देखने को मिल सकते हैं। उल्लेखनीय है कि जिला मुख्यालय से निकलने वाली बात का प्रभाव पूरे जिले में पड़ता है।