Coal Bed Methane Project Betul: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। जिले और खासकर शाहपुर व घोड़ाडोंगरी तहसील के निवासियों के लिए अच्छी खबर है। इन दोनों तहसीलों में कोल बेड मीथेन प्रोजेक्ट का जिस कंपनी को लाइसेंस जारी हुआ है, वह अगले महीने से काम शुरू कर सकती है। इस प्रोजेक्ट का काम शुरू होने से जहां क्षेत्र के युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा, वहीं क्षेत्र के कारोबार में भी खासा इजाफा हो सकेगा। 

गौरतलब है कि शाहपुर एवं घोड़ाडोंगरी तहसील में 37.313 हेक्टेयर क्षेत्र में इस परियोजना का संचालन होगा। सर्वे में इस क्षेत्र में मीथेन गैस के भंडार होने की पुष्टि हुई थी। क्षेत्र के गुवाड़ी, सातलदेही, बटकीडोह सहित करीब आधा दर्जन पॉइंट चिन्हित किए गए हैं जहां मीथेन गैस प्रचुर मात्रा में है। इसके लिए इन दोनों तहसीलों में 5 खनि रियायतें स्वीकृत हैं। मीथेन उत्पादन के लिए भोपाल में 17 और 18 अक्टूबर 2024 को आयोजित माइनिंग कॉन्क्लेव में 5 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिला था। इसके लिए नोएडा की कंपनी मेसर्स इन्विनायर पेटोडाइन को लाइसेंस जारी किया गया है। यह लाइसेंस पेट्रोलियम एक्सप्लोरेशन हेतु जारी किया गया है। 

जनवरी में शुरू करने वाली थी काम 

बताया जाता है कि यह कंपनी जनवरी माह में ही यहां पर काम शुरू करने वाली थी, लेकिन किन्हीं कारणों से ऐसा नहीं हो पाया। इस बारे में खनिज विभाग के अधिकारियों ने कंपनी के अधिकारियों से चर्चा की तो उन्होंने कहा कि मार्च महीने से कंपनी अपना काम शुरू कर देगी। कम्पनी द्वारा जमीन में ड्रिलिंग के जरिए होल कर मीथेन गैस बाहर निकालेगी और इसे सावधानी के साथ स्टोर करेगी। 

जिले और क्षेत्र को मिलेंगे यह लाभ 

कंपनी द्वारा काम शुरू किए जाने से बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार हासिल होगा। इसके अलावा अन्य वस्तुओं की मांग भी बढ़ेगी, जिससे क्षेत्र का कारोबार काफी बढ़ेगा। वहीं खनिज विभाग के जरिए शासन को मिलने वाले राजस्व में सीधे तौर पर करीब पांच गुना वृद्धि होगी सकेगी। वर्तमान में गौण खनिज के जरिए बैतूल जिले से शासन को लगभग 100 करोड़ का राजस्व प्राप्त हो रहा है जो सीधे बढ़कर लगभग 500 करोड़ तक पहुंच सकता है। 

अन्य उद्योगों का होगा मार्ग प्रशस्त 

मीथेन गैस के उत्पादन से जिले में अन्य उद्योगों के लिए भी मार्ग प्रशस्त हो सकेगा। इस गैस का उपयोग पॉवर हाउस में लगे बड़े-बड़े टर्बाइनों को चलाने में किया जाता है। इसके अलावा रासायनिक रिएक्टरों, अनुसंधान केंद्रों और ईंधन के रूप में भी इस गैस की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। वाहनों के टायर बनाने वाली कंपनियां भी इसी गैस के आधार पर टायरों का उत्पादन करती हैं। 

बैतूल में ग्रेफाइट ब्लॉक शुरू होगा 

दूसरी ओर बैतूल जिला मुख्यालय से सटे गौठाना में ग्रेफाइट के ब्लॉक के भी जल्द शुरू होने की उम्मीद है। जिले के गौठाना और गौनीघाट में ग्रेफाइट के भंडार मिले हैं। बैतूल में 9 और गौनीघाट में 22 हेक्टेयर में यह ब्लॉक है। इसके लिए भी जीडी इस्पात एंड पॉवर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को ठेका दिया जा चुका है। कंपनी बैतूल में 9 हेक्टेयर से ज्यादा का क्षेत्र चाह रही थी, लेकिन आसपास वन क्षेत्र होने से ऐसा संभव नहीं होने से अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया था। हालांकि कहा जा रहा है कि अब यह कंपनी भी जल्द काम शुरू करने वाली है। इससे बैतूल क्षेत्र को लाभ होगा। 

इनका कहना...

मीथेन प्रोजेक्ट के लिए कंपनी पहले जनवरी माह में काम शुरू करने वाली थी, लेकिन किन्हीं कारणों से नहीं कर पाई। कंपनी के अधिकारियों से चर्चा हुई है और उनका कहना है कि वे मार्च महीने से काम शुरू कर देंगे। 
- मनीष पालेवार, उप संचालक (खनिज), बैतूल