Biz Updates: ओस्लो में भारत-नॉर्वे निवेश व ग्रीन सहयोग पर चर्चा; अमेरिकी टैरिफ से टेक्सटाइल-अपैरल निर्यात घटा
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ओस्लो में नॉर्वे के वित्त मंत्री जेंस स्टोल्टेनबर्ग के साथ बैठक कर द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA) के प्रभावी उपयोग पर सहमति जताई, खासकर ब्लू इकॉनमी, ग्रीन इकॉनमी और संप्रभु संपत्ति एवं पेंशन फंड के जरिए निवेश बढ़ाने के क्षेत्रों में। वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि बैठक के दौरान नॉर्वे के वित्त मंत्री ने भारत की तेज आर्थिक वृद्धि को निवेश और विकास के लिए बड़े अवसरों वाला बताया।बैठक में अक्षय ऊर्जा, विशेष रूप से सौर ऊर्जा, रेयर अर्थ प्रोसेसिंग, और कार्बन कैप्चर एवं स्टोरेज जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों ने उभरते और सतत क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने के लिए टीईपीए का लाभ उठाने पर सहमति व्यक्त की।ब्लू इकॉनमी (समुद्र आधारित उद्योग) और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने वाली ग्रीन इकॉनमी को सहयोग के प्रमुख फोकस क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया। इसके अलावा, संप्रभु संपत्ति फंड और पेंशन फंड के माध्यम से निवेश बढ़ाकर आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने पर भी विचार हुआ। जेंस स्टोल्टेनबर्ग ने यह भी कहा कि नॉर्वे इस वर्ष प्रस्तावित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा का इंतजार कर रहा है और उम्मीद जताई कि इससे भारत-नॉर्वे सहयोग को नई गति मिलेगी।
अमेरिकी टैरिफ के असर से जनवरी में भारत के टेक्सटाइल और अपैरल निर्यात में गिरावट
जनवरी 2026 में भारत के टेक्सटाइल और अपैरल (वस्त्र) निर्यात में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट की प्रमुख वजह अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च टैरिफ रहे, जो 7 फरवरी तक प्रभाव में रहे। इससे भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हुई।कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (CITI) के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 में टेक्सटाइल निर्यात में 3.68 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि अपैरल निर्यात 3.84 प्रतिशत घटा। कुल मिलाकर, टेक्सटाइल और अपैरल का संयुक्त निर्यात जनवरी 2026 में 3,275.44 मिलियन डॉलर रहा, जो जनवरी 2025 के 3,403.19 मिलियन डॉलर से कम है। इस तरह कुल निर्यात में 3.75 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि (डिग्रोथ) दर्ज की गई। गिरावट का असर खासतौर पर प्रमुख टेक्सटाइल सेगमेंट्स में देखने को मिला। कॉटन यार्न, फैब्रिक्स, मेड-अप्स और हैंडलूम उत्पादों का निर्यात 4.15 प्रतिशत घटकर 995.58 मिलियन डॉलर रह गया, जो एक साल पहले इसी महीने 1,038.69 मिलियन डॉलर था।
खराब शेल्फ मैनेजमेंट से भारत के 10 में से 9 संगठित रिटेल स्टोर्स घाटे में
भारत में संगठित रिटेल सेक्टर की बड़ी संख्या में दुकानें खराब शेल्फ मैनेजमेंट के कारण घाटे में चल रही हैं। वेक्टर कंसल्टिंग ग्रुप की नई रिपोर्ट के मुताबिक, 10 में से 9 ऑर्गेनाइज्ड रिटेल स्टोर्स को नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिससे उनके नेटवर्क का बड़ा हिस्सा मुनाफा कमाने में संघर्ष कर रहा है।‘द टिकिंग शेल्फ: द ओवरलुक्ड इकॉनॉमिक्स ऑफ स्टोर परफॉर्मेंस’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 91 प्रतिशत रिटेलर्स को शेल्फ स्तर पर रेवेन्यू लीकेज का सामना करना पड़ता है।100 प्रमुख रिटेल चेन के नेताओं पर किए गए इस अध्ययन में यह भी सामने आया कि बाजार में समग्र वृद्धि के बावजूद विभिन्न फॉर्मेट्स के 28 से 40 प्रतिशत स्टोर अब भी लाभप्रदता से नीचे संचालन कर रहे हैं, जो रिटेल सेक्टर की परिचालन चुनौतियों को उजागर करता है।

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