MP Board Exam Irregularity: नवमी फेल छात्र ने दी दसवीं बोर्ड परीक्षा, प्राचार्य-परीक्षा प्रभारी पर पैसे लेकर बैठाने का आरोप
MP Board Exam Irregularity: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल द्वारा आयोजित हाई स्कूल परीक्षा (दसवीं) में नवमी फेल एक छात्र को दसवीं कक्षा की परीक्षा नियमित परीक्षार्थी के रूप में देने का मामला सामने आया है। उक्त विद्यार्थी द्वारा कक्षा दसवीं का एक पेपर भी नियमित परीक्षार्थी के रूप में दे दिया गया है। स्कूल प्राचार्य द्वारा छात्र को प्रायोगिक परीक्षा नहीं देने दी गई। सोमवार को उक्त विद्यार्थी ने स्थानीय जनपद सदस्य के पति और भाजपा नेता सतीश धाकड़ के साथ जिला पंचायत पहुंचकर जिला पंचायत सीईओ से लिखित शिकायत की है। शिकायत में छात्र ने हायर सेकेण्डरी स्कूल सातनेर के प्राचार्य और परीक्षा प्रभारी पर राशि लेकर दसवीं की परीक्षा में बिठाने का आरोप लगाया है। साथ ही प्राचार्य से उसके द्वारा दी गई राशि वापस दिलवाने और उसे न्याय दिलवाने की मांग की है।
आठनेर ब्लॉक के ग्राम सातनेर निवासी छात्र सत्यम धुर्वे पिता राजेराम धुर्वे सोमवार को भाजपा नेता एवं जनपद पंचायत सदस्य के पति सतीश धाकड़ के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंचा। यहां कलेक्टर के नहीं मिलने पर वे जिला पंचायत पहुंचे। यहां सीईओ अक्षत जैन से शिकायत कर शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल सातनेर के प्राचार्य पर कार्यवाही करने और पैसे वापस दिलवाने की मांग की है। छात्र द्वारा की गई शिकायत में अवगत कराया है कि वह शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल सातनेर में लगातार दो बार कक्षा नवमी में फेल हुआ है। इसके बाद भी संस्था के प्राचार्य उमेश चन्द्र हुरमाड़े एवं परीक्षा प्रभारी संतोष डोंगरे द्वारा छात्र से राशि लेकर शासन के नियम विरूद्ध नियमित रूप से परीक्षा में शामिल होने के लिए फार्म भरवाया गया। जबकि दो बार नवमी फेल विद्यार्थी नियमित विद्यार्थी के रूप से परीक्षा में शामिल होने से अपात्र होता है। छात्र और भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि छात्र द्वारा कुछ बकाया राशि नहीं देने पर छात्र को प्राचार्य और परीक्षा प्रभारी द्वारा प्रायोगिक परीक्षा में शामिल नहीं होने दिया गया।
छात्र सत्यम ने बताया कि जब उसने जनप्रतिनिधियों को समस्या बताई तो 14 फरवरी को हुए एनएसक्यूएफ के प्लम्बिंग के प्रश्न पत्र में शामिल कर लिया गया। उसने 14 फरवरी को शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल सातनेर के परीक्षा केन्द्र में नियमित विद्यार्थी के रूप में एक विषय की परीक्षा भी दे दी है। छात्र ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा उसे प्रवेश पत्र भी जारी किया गया है। छात्र ने संबंधित प्राचार्य और परीक्षा प्रभारी राशि वापस दिलाकर नियमानुसार कार्यवाही करने की मांग की है। कार्यवाही नहीं होने की स्थिति में भोपाल जाकर वरिष्ठ अधिकारियों को संबंधित के भ्रष्टाचार से अवगत कराने की चेतावनी भी दी है।
गलती से हुआ नामांकन: प्राचार्य
इस संबंध में जब शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल सातनेर के प्राचार्य उमेश चंद्र हुरमाड़े से जानकारी ली गई तो उन्होंने किसी भी प्रकार की राशि लेने से इंकार करते हुए कहा कि परीक्षा प्रभारी द्वारा गलती से नामांकन हो गया है। वहीं परीक्षा प्रभारी संतोष डोंगरे से बात की तो उनका कहना था कि कम्प्यूटर की त्रुटि से छात्र की जानकारी गलती से दर्ज हो गई। इसकी जानकारी भी माध्यमिक शिक्षा मंडल को उसी समय दे दी गई थी। इसके बावजूद उसका प्रवेश पत्र आ गया है। विद्यालय से उसे प्रवेश पत्र नहीं दिया गया। छात्र ने ऑनलाइन प्रवेश पत्र निकाला होगा। छात्र के प्रायोगिक परीक्षा में भी शामिल नहीं किया गया। छात्र ने 14 फरवरी को परीक्षा कैसे दी, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
बोर्ड परीक्षा जैसे संवेदनशील मामले में लापरवाही उजागर
माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा बोर्ड परीक्षा जैसे संवेदनशील मामले में इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो गई, जिसमें एक अपात्र छात्र बोर्ड परीक्षा में शामिल हो गया। विद्यालय के परीक्षा प्रभारी ने जब अपनी गलती स्वीकार कर माध्यमिक शिक्षा मंडल को समय पर अवगत करवाने की बात कही है तो फिर बोर्ड ने अपात्र पात्र का एडमिशन कार्ड कैसे जारी कर दिया है? इस पूरे मामले में छात्र झूठ बोल रहा है या स्कूल के प्राचार्य और परीक्षा प्रभारी झूठ बोल रहे हैं, यह तो जांच का विषय है। लेकिन, यदि छात्र झूठ बोल रहा है तो फिर उसे परीक्षा में कैसे शामिल कर लिया गया। यदि स्कूल के प्राचार्य और परीक्षा प्रभारी झूठ बोल रहे हैं तो छात्र को प्रायोगिक परीक्षा में शामिल क्यों नहीं किया गया? क्या छात्र को सभी विषयों की परीक्षा देने की अनुमति दी जाएंगी या फिर उसे परीक्षा से वंचित किया जाएगा यह तो अगले प्रश्न पत्र में सामने आ जाएगा, लेकिन इस घटनाक्रम से स्कूल प्रबंधन और माध्यमिक शिक्षा मंडल की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है।

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