Girdawari Work Betul: बैतूल में अधूरी गिरदावरी से अटका गेहूं पंजीयन, तारा एप की दिक्कतों से किसान परेशान
Girdawari Work Betul: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। जिले में गिरदावरी का काम अभी पूरा नहीं हुआ है। दूसरी ओर गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन शुरू हो गए हैं। इधर गिरदावरी नहीं होने से किसान अपना पंजीयन नहीं करवा पा रहे हैं। जल्द गिरदावरी नहीं हुई तो कई किसान पंजीयन से वंचित रह जाएंगे। इधर गिरदावरी करने में पटवारियों को भी खासी परेशानियां उठाना पड़ रहा है। गिरदावरी करने वाला तारा एप खासा परेशान कर रहा है। वहीं गिरदावरी करने वाले सर्वेयर भी एक-एक कर काम छोड़ कर जा रहे हैं।
गौरतलब है कि समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए जिले में किसान पंजीयन का कार्य 7 फरवरी से शुरू हो चुका है। अभी तक मात्र 148 किसानों के पंजीयन हो सके हैं। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि अभी जिले में गिरदावरी का काम ही पूरा नहीं हो पाया है। गिरदावरी के लिए आखरी तारीख वैसे तो 28 फरवरी है, लेकिन गिरदावरी का काम जिस तारा एप से किया जाता है, वह भी खासा परेशान कर रहा है। इससे इस बात की संभावना कम ही लग रही है कि 28 फरवरी तक गिरदावरी का काम पूरा हो सकेगा। अभी तक जिले में गिरदावरी का काम लगभग 50 प्रतिशत ही हो सका है।
पंजीयन केंद्रों से बैरंग लौट रहे किसान
पंजीयन शुरू होने के बाद किसान पंजीयन करवाने के लिए केंद्रों पर पहुंच रहे हैं, लेकिन बहुत कम लोगों का ही पंजीयन हो पा रहा है। अधिकांश किसानों के रिकॉर्ड में पोर्टल यही बता रहा है कि अभी गिरदावरी नहीं हुई है। दरअसल, गिरदावरी से ही यह स्पष्ट होता है कि किसान ने कितने रकबे में कौनसी फसल बोई है। इसके बाद उतने रकबे के लिए ही पंजीयन होता है। यदि यही जानकारी नहीं रहेगी तो पंजीयन भी नहीं होगा। यही कारण है कि किसान पंजीयन केंद्रों से बैरंग लौटने को मजबूर हो रहे हैं।
इसलिए पिछड़ रहा गिरदावरी का काम
गिरदावरी का काम पिछड़ने के पीछे मुख्य कारण तारा एप को बताया जा रहा है, जिसके जरिए गिरदावरी की जाती है। पहले उस रकबे में जाने पर खेत के बीच में यानी जीरो नंबर पर जाने की जरुरत नहीं पड़ती थी। अब खेत में जीरो नंबर पर जाने पर ही गिरदावरी हो रही है। इसके बाद उस खेत के चारों ओर के खेतों में भी जीरो नंबर पर जाना पड़ रहा है। यही कारण है कि गिरदावरी के कार्य में बेहद ज्यादा समय लग रहा है।
खाली पड़े खेतों में भी यही परेशानी
पटवारियों के मुताबिक इसके अलावा पड़ती वाले रकबे (जिन खेतों में फसल नहीं बोई जाती) में भी अब जीरो नंबर पर ही जाना पड़ रहा है। पहले उस क्षेत्र में पहुंचने पर ही पड़ती वाले रकबों की गिरदावरी हो जाया करती थी। गन्ना बाड़ी में तो गिरदावरी कर पाना ही मुश्किल का काम हो जाता है।
साल में दो-दो बार हो रहा है अपडेट
पटवारियों को एक बड़ी दिक्कत यह आ रही है कि साल 2018 से तारा एप का वर्ष में 2 बार नया वर्जन आ जा रहा है। पटवारी जैसे-तैसे नई चीजें सीख पाते हैं कि तुरंत और भी नई चीजें आ जाती हैं। ऐसे में पटवारियों को तकनीकी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है। कई पटवारी तकनीकी रूप से इतने सक्षम नहीं हैं। यही कारण है कि गिरदावरी का काम तेज रफ्तार से नहीं हो पा रहा है।
लोकल यूथ सर्वेयर छोड़ते जा रहे काम
गिरदावरी के काम का बोझ पटवारियों पर न पड़े, इसके लिए शासन द्वारा हर गांव के लिए एक-एक लोक यूथ सर्वेयर मानदेय पर रखे जाते हैं। एप में आ रही इन दिक्कतों के कारण यह सर्वेयर भी एक-एक कर काम छोड़ते चले जा रहे हैं। सर्वेयरों के चले जाने से भी काम प्रभावित हो रहा है। नए सर्वेयर के आने पर उनको काम सीखने में ही काफी समय लग जाता है।
गेहूं खरीदी को प्रभावित कर सकती है गिरदावरी
यदि गिरदावरी का काम इसी तरह चला तो इसका सीधा असर गेहूं खरीदी पर पड़ेगा। गौरतलब है कि पंजीयन का कार्य 7 मार्च तक चलेगा। यदि गिरदावरी पूरी नहीं हुई तो फिर पंजीयन की आखरी तारीख में इजाफा करना पड़ेगा। बीते साल 12819 किसानों ने पंजीयन कराया था। इनमें से 3958 किसानों ने 25730 मेट्रिक टन गेहूं की बिक्री समर्थन मूल्य पर की थी।

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