Betul Water Crisis: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। गर्मी शुरू होने को है और इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में जल संकट भी सिर उठाना शुरू कर देता है। जिले में 160 गांव ऐसे हैं जो कि ड्राई जोन में आते हैं। इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग को इस साल बोर खनन की अनुमति ही नहीं है। ऐसे में यदि जिले में कहीं जल संकट की स्थिति बनती है तो हाहाकार मचना तय है। दूसरी और बड़ी समस्या यह है कि पीएचई विभाग के पास पर्याप्त मैदानी अधिकारी भी नहीं है, जबकि काम कई गुना ज्यादा बढ़ गया है। 

शायद ही कोई साल ऐसा जाता है जब गर्मी के दिनों में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जल संकट की स्थिति न बनती हो। हालांकि समूह नल-जल योजनाओं और नल-जल योजनाओं के जरिए ग्रामीण अंचलों में स्थिति काफी सुधरी है, लेकिन अभी भी ऐसा बिल्कुल नहीं है कि जिले में कहीं भी जल संकट की स्थिति बनेगी ही नहीं। केवल बीते साल की स्थिति देखे तो जिले के 160 गांव ड्राई जोन में पाए गए थे। यह गांव मुलताई, प्रभातपट्टन, भैंसदेही, भीमपुर और आठनेर ब्लॉकों के हैं। इन गांवों में पानी की भारी किल्लत लोगों को झेलनी पड़ी। हालांकि पानी की समस्या को देखते हुए पीएचई ने इन गांवों में काफी इंतजाम किए थे, लेकिन ऐसा नहीं है कि इस साल किसी भी गांव में परेशानी नहीं होगी। 

दर्जनों गांवों में फिर होगी भारी दिक्कत

विभागीय सूत्रों का मानना है कि तमाम व्यवस्थाओं के बावजूद इस साल 60 से 100 गांवों में पानी के लिए फिर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ड्राई जोन में मौजूद इन गांवों के अलावा मोटर जलने या ट्यूबवेल सूख जाने से उन गांवों में भी जल संकट की अचानक स्थिति निर्मित हो सकती है, जिनमेंं जल संकट की स्थिति बनने की कोई संभावना नहीं है। 

पीएचई नहीं कर सकेगा बोर खनन 

किसी भी क्षेत्र में जल संकट की स्थिति बनने पर पीएचई द्वारा नया बोर खनन करके या जल स्तर बहुत नीचे जाने पर मोटर लगा कर पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाती है। इस साल अभी तक पीएचई को बोर खनन करने की अनुमति ही शासन ने नहीं दी है। ऐसे में यदि कहीं जरुरत भी पड़ती है तो पीएचई विभाग नया बोर खनन कर जल संकट दूर नहीं कर पाएगा। ऐसे में पंचायतों या नगरीय निकायों को अपने स्तर पर ही बोर खनन की व्यवस्था करने को मजबूर होना पड़ेगा। पंचायतों को इसमें खासी परेशानी होगी, क्योंकि उनकी माली हालत उतनी मजबूत नहीं होती। 

पीएचई का काफी बढ़ चुका है काम 

पीएचई की एक बड़ी समस्या यह भी है कि उसके पास पर्याप्त अमला ही नहीं है। वर्तमान में जिले में 919 नल जल योजनाएं हैं। वहीं इसी महीने 50 से 60 योजनाएं और शुरू हो जाएंगी। इन सभी योजनाओं की मॉनीटरिंग और मेंटेनेंस संबंधी मार्गदर्शन विभाग को ही देना होता है। जिले के ग्रामीण अंचलों में अभी तक करीब 2 लाख, 45 हजार लोगों को नल कनेक्शन देकर घर बैठे शुद्ध जल मुहैया कराया जा रहा है। जाहिर है कि विभाग के कार्य में पहले के मुकाबले कई गुना इजाफा हो चुका है। 

महज 12 इंजीनियरों के भरोसे जिला 

विभाग का काम जितना बढ़ा है और दायरा बढ़ा है, उस स्थिति में अमला भी काफी लंबा-चौड़ा चाहिए, लेकिन वास्तविक स्थिति इसके ठीक उलट है। जिले में एसडीओ के 5 पद स्वीकृत हैं, लेकिन एक भी पदस्थ नहीं है। इसी तरह सब इंजीनियरों के 18 पद स्वीकृत हैं, लेकिन महज 12 पदस्थ हैं। इनमें से भी 5 तो एसडीओ का प्रभार संभाल रहे हैं। इन हालातों में अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभाग किस तरह से अपना कामकाज चला रहा है। 

इनका कहना...

ड्राई जोन में शामिल गांवों में पिछले साल काफी व्यवस्थाएं की गई थीं। हालांकि कुछ में फिर जल संकट की स्थिति बन सकती है। इसके लिए विभाग द्वारा सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा अन्य स्थानों पर भी जहां भी दिक्कत होगी, उसका निराकरण किया जाएगा। इसके लिए प्लानिंग भी बनाई जा रही है। 
- मनोज बघेल, कार्यपालन यंत्री, पीएचई, बैतूल