District Hospital Lift Issue: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। जिला अस्पताल परिसर में हाल ही में लगभग १९ करोड़ रूपए की लागत से बने पीएम अभीम क्रिटिकल केयर ब्लॉक में लगभग दो माह पूर्व आर्थोपेडिक ओपीडी और वार्ड शिफ्ट कर दिया गया है। ओपीडी तो ग्राउंड फ्लोर पर ही है लेकिन वार्ड फर्स्ट फ्लोर में है जिसमें हाथ पैर फ्रेक्चर होने वाले मरीजों के साथ ही हड्डी रोग से पीड़ित मरीजों को भर्ती किया गया है। अस्पताल शुरू होने को एक माह से अधिक का समय बीत गया हैं इसके बावजूद अस्पताल में लगी लिफ्ट शुरू नहीं हुई है। जिससे इस वार्ड में एडमिट होने वाले मरीजों को बेहद परेशानी उठानी पड़ रही है। 

मरीजों के परिजनों को रैम्प से स्ट्रेचर धकाते हुए फर्स्ट फ्लोर पर ले जाना पड़ता है। इसके साथ मरीजों को एक्स-रे, सीटी स्कैन आदि के लिए  ले जाने के लिए भी परिजन परेशन होते रहते है। जिला अस्पताल परिसर में हाल ही में ५० बेड के क्रिटीकल केयर युनिट का निर्माण किया गया है। जी प्लस टू-फ्लोर के इस भवन में ग्राउंड फ्लोर से फर्स्ट और सेकेण्ड फ्लोर पर जाने दो लिफ्ट लगी है। 

इसके साथ ही सीढ़ी और आपातकालीन व्यवस्था के तहत रैम्प भी बनाई गई है। जिला अस्पताल प्रबंधन द्वारा लगभग दो माह पूर्व ट्रामा सेंटर में संचालित आर्थोपेडिक वार्ड और ओपीडी क्रिटिकल केयर युनिट में शिफ्ट कर दिया गया है। जिसमें ग्राउंड फ्लोर पर आर्थोपेडिक ओपीडी है। जिसमें हड्डी के मरीजों को ओपीडी समय में देखा जाता है। भर्ती होने की स्थिति में मरीजों को फर्स्ट फ्लोर में स्थित वार्ड में भर्ती किया जाता है। यहां हड्डी रोग से पीड़ित मरीज ही रहते है। जिसमें किसी के पैर फ्रेक्चर है तो किसी के हाथ या अन्य कोई हड्डी फ्रेक्चर होती है। 

फ्रेक्चर वाले मरीजों को फर्स्ट फ्लोर पर ले जाने में सबसे अधिक परेशानी होती है। लिफ्ट शुरू नहीं होने से मरीजों के परिजनों को स्ट्रेचर या व्हील चेयर धकाते हुए ले जाना पड़ता है। इससे न सिर्फ मरीजों को असहनीय दर्द होता है बल्कि रैम्प पर स्ट्रेचर धकाने भी ४-५ लोगों की आवश्यकता होती है। ऐसे में कभी किसी मरीज का स्ट्रेचर लुड़क जाए तो बड़ा हादसा हो सकता है। मरीज को वार्ड में भर्ती करने के बाद यदि सीटी स्कैन या एक्स-रे करवाने की आवश्यकता हुई तो भी उन्हें रैम्प से ही स्ट्रेचर या व्हील चेयर पर लाना-लेजाना पड़ता है। 

बुधवार को आर्थोपेडिक वार्ड में २० मरीज भर्ती थे, जिसमें अधिकतर हाथ या पैर फ्रैक्चर वाले मरीज थे। मरीजों और उनके परिजनों ने क्रिटिकल केयर युनिट की लिफ्ट शीघ शुरू करवाने की मांग की है। इस सम्बन्ध में जिला अस्पताल के आर्थोपेडिक वार्ड इंचार्ज डॉ. रूपेश पद्माकर का कहना है कि क्रिटिकल केयर वार्ड की लिफ्ट शुरू करने में तकनीकि समस्या आ रही है। लिफ्ट लगाने वाली कंपनी से बात हुई है दो-तीन दिन में इंजीनियर आकर लिफ्ट शुरू कर देगें।