Hemant Khandelwal Simplicity: पद, प्राण और पैसा क्षणभंगुर, सादगी ही नेतृत्व की असली पहचान, हेमंत खंडेलवाल पेश कर रहे अनूठी मिसाल
मयूर भार्गव। यदि इंसान पद और पैसे का अहंकार ना पालें तो वह बड़ी ऊंचाइयों को छूता है। पद, प्राण और पैसा इनका कोई भरोसा नहीं है। इस टैग लाइन का एहसास एक विवाह समारोह में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और बैतूल विधायक हेमंत खण्डेलवाल ने हंसी-मजाक के बीच कराया। भले ही माहौल हंसी-मजाक और वैवाहिक समारोह का था, लेकिन बात 100 नहीं बल्कि लाख टके की कही गई थी।
अक्सर कहा जाता है कि सृष्टि के रचियता ने जब इंसान को बनाया तो उसने दुनिया को चलाने के लिए इंसान में अहंकार का प्रवेश करा दिया था ताकि दुनिया चलती रहे। अहंकार की खासियत यह होती है कि वह इंसान को अपने प्रवेश का पता ही नहीं चलने देता है। लेकिन, अहंकार जब उसका बिगाड़ करके काफी आगे निकल जाता है तो मनुष्य को एहसास होता है कि अहंकार के चलते मेरा बड़ा नुकसान हो गया है। अहंकार पनपने का मुख्य कारण आम तौर पर पैसा और पद होता है, लेकिन कई बार इंसान को खुद के इंसान होने का भी गुमान हो जाता है जिसके चलते इंसान यह भूल जाता है कि समाज में उसकी जो पूछ परख हो रही है वह उसकी नहीं बल्कि उसके पद और पैसे की है।

अनौपचारिक चर्चा के दौरान अहंकार के नुकसान से शुरू हुई बातचीत पद, पैसा और प्राण पर आकर टिक गई थी। इस दौरान शहर के कई गणमान्य व्यक्ति और जनप्रतिनिधि भी आकर श्री खण्डेलवाल से मिल रहे थे। हेमंत भैया का कहना था कि पद और पैसा आदमी के अहंकार को बढ़ाता है जबकि पद, पैसा और प्राण इन तीनों चीजों का कभी भी भरोसा नहीं किया जा सकता है। मैं खुद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद यह मानकर चलता हूं कि मैं जब तक इस पद पर हूं तब तक मेरे चारों तरफ एक आभा मंडल बना हुआ है और मेरी जो भी पूछ परख है वह पद के कारण है। इसलिए मैंने इस पद का बिल्कुल भी अहंकार नहीं रखा है। मेरा फोकस संबंधों को प्राथमिकता और लोगों के सुख-दुख में सहभागिता पर रहता है।
हेमंत खण्डेलवाल के आचरण में सादगी भरपूर बढ़ गई है और जब राजनैतिक दल के संगठन के शीर्ष पर बैठा व्यक्ति सादगी को अपने आचरण में उतारता है तो उसके दूरगामी परिणाम होते हैं। वैवाहिक समारोह में लगभग 2 घंटे तक चले इस सेशन में हेमंत खण्डेलवाल की साधारण जीवन शैली, सीमित संसाधनों का उपयोग और बिना किसी लागलपेट के अपने लोगों के साथ हंसी-मजाक और संवाद सहित आम कार्यकर्ताओं से सहज मुलाकात उनके व्यक्तित्व को स्पेशल भी बना रहा था।
श्री खण्डेलवाल ने अहंकार और पद का गुमान कहीं झलकने ही नहीं दिया। ऐसा नहीं है कि यह कोई पहला मौका था, जब उनकी सादगी और सहजता का सार्वजनिक प्रदर्शन हुआ है। वाक्या इसलिए महत्वपूर्ण हो गया क्योंकि उन्होंने हंसी-मजाक में जो पद, प्राण और पैसा पर भरोसा कभी नहीं करने की गहरी बात कही, उसने पूरी चर्चा को महत्वपूर्ण बना दिया। उनका साफ मानना था कि राजनैतिक संगठन के शीर्ष पर बैठा व्यक्ति केवल सत्ता का प्रतीक नहीं होता बल्कि वह संगठन के संस्कृति और मूल्यों का भी प्रतिनिधि होता है और जब नेता स्वयं सादगी को अपने आचरण में उतारता है और अहंकार से दूर रहता है तो उसके दूरगामी प्रभाव दिखाई देते हैं। सादगी नेतृत्व को जन सामान्य से सीधा जोड़ती है और यह संदेश भी देती है कि पद जरूर बड़ा हो सकता है लेकिन यदि व्यक्ति चाहे तो वह बड़े पद और पैसे वाला होने के बाद भी जमीन से जुड़ा रह सकता है। ऐसी सादगी संगठन में पारदर्शिता और नैतिकता की प्रेरणा भी दे रही है।
वैवाहिक कार्यक्रम में पद, पैसा और प्राण को लेकर हंसी-मजाक में हुई इस गंभीर चर्चा ने हेमंत खण्डेलवाल के व्यक्तित्व को भी उजागर करने का काम किया है कि जब पेड़ फलों से लदा रहता है तो वह स्वयं ही झुक जाता है। इतने बड़े पद पर पहुंचने के बाद भी अगर श्री खण्डेलवाल के जहन में यह बात है तो यकीन मानिए उनकी लोकप्रियता, राजनैतिक ऊंचाइयों को छूने का सिलसिला निरंतर बढ़ता ही रहेगा, क्योंकि उन्होंने सब कुछ होने के बाद भी अहंकार को अपने भीतर प्रवेश ही नहीं होने दिया है और पद, पैसा और प्राण का कभी भरोसा नहीं करने की टैग लाइन को भी आत्मसात किया हुआ है।

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