Betul Farmers Loan Recovery: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। जिले में किसानों को दिए जाने वाले ऋण की वसूली की हालत खस्ता है। किसानों से कुल 687.32 करोड़ रुपये की वसूली करना है, लेकिन अभी तक महज 75 करोड़ रुपये ही वसूल हो पाए हैं। अभी भी किसानों पर 612 रुपये से ज्यादा की उधारी बाकी है। चालू वर्ष के ऋण की राशि यदि किसान 28 मार्च तक अदा नहीं करते हैं तो वे कालातीत की श्रेणी में आ जाएंगे। ऐसे में उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल सकेगा। 

किसानों को कृषि संबंधी कार्यों के लिए महंगे ब्याज पर कर्ज न लेना पड़े, इसके लिए सरकार उन्हें शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इससे किसानों को अपनी जरुरतों के लिए कहीं और हाथ नहीं फैलाना पड़ता और न कर्ज के मकड़जाल में फंसने की स्थिति बनती है। हालांकि अन्य ऋणों की तरह यह ऋण भी वसूल करना जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के लिए खासा मुश्किल हो जाता है। इस साल के आंकड़े भी कुछ यही स्थिति बयां कर रहे हैं। 

किसानों पर बकाया 687.32 करोड़ 

यदि जिले भर में किसानों पर कुल बकाया ऋण की स्थिति देखे तो वर्तमान में चालू वर्ष और कालातीत दोनों ही तरह का 687.32 करोड़ रुपये का ऋण शेष है। यह ऋण 1 लाख, 34 हजार किसानों पर बाकी है। इनमें से 52080 किसान समय पर ऋण अदा नहीं करने के कारण ओवरड्यू की श्रेणी में आ चुके हैं। 

चालू वर्ष का ही 363 करोड़ का ऋण 

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक द्वारा केवल खरीफ सीजन में ही 363 करोड़ रुपये का ऋण किसानों को मुहैया कराया गया था। यह ऋण 81000 किसानों को मुहैया कराया गया था। इस ऋण की वसूली 28 मार्च तक की जाना है। 

अभी तक इतनी राशि हो सकी वसूल

बैंक द्वारा दिए गए ऋण की वसूली के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बावजूद वसूली की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। अभी तक दोनों ही श्रेणियों में किसानों से मात्र 75 करोड़ रुपये की वसूली हो सकी है। इनमें से चालू ऋण की राशि में 16000 किसानों से 49 करोड़ और ओवरड्यू श्रेणी में करीब 6 हजार किसानों से 26 करोड़ रुपये ही वसूल हो पाए हैं। जाहिर है कि अभी भी बड़ी राशि की वसूली बाकी है। 

बैंक लगातार कर रहा है प्रयास 

किसानों को दिए गए ऋण की वसूली के लिए बैंक द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। समिति प्रबंधकों को किसानों से संपर्क कर अधिक से अधिक राशि जमा कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। उनके द्वारा किसानों को समझाइश देने के साथ ही कालातीत होने पर की जाने वाली कार्रवाइयों से भी अवगत कराया जा रहा है। बताया जाता है कि भीमपुर और चिचोली क्षेत्र में सबसे ज्यादा राशि बकाया है। 

कालातीत होने पर नहीं मिलेंगे लाभ 

किसान यदि आखरी तारीख तक अपनी ऋण राशि अदा नहीं करते हैं तो उन्हें कई नुकसान उठाने पड़ेंगे। सबसे बड़ा नुकसान यह होगा कि उन्हें शून्य प्रतिशत ब्याज दर का लाभ नहीं मिलेगा। इसके विपरीत उन्हें फिर ली गई ऋण राशि ब्याज सहित अदा करना होगा। इसके अलावा उधारी में खाद-बीज की सुविधा भी नहीं मिल सकेगी। इसके अलावा उन्हें फसल बीमा का लाभ भी नहीं मिलेगा। ऐसे में प्राकृतिक आपदा-विपदा में फसल खराब होती है तो दोहरा नुकसान उठाने को मजबूर होना पड़ेगा।