Gold vs Real Estate Investment: सोना-चांदी के उछाल से जमीन-जायदाद में निवेश घटा, रजिस्ट्रियों में आई भारी गिरावट
Gold vs Real Estate Investment: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। सोना-चांदी के लगातार बढ़ते दाम और कम समय में तगड़ा रिटर्न मिलने के कारण लोगों का जमीन-जायदाद से मोहभंग हो रहा है। यही कारण है कि इस साल जमीन, मकान या दुकान की बीते वर्ष से बेहद कम खरीद-फरोख्त हो सकी है। इस बात के गवाह पंजीयन विभाग के रजिस्ट्री के आंकड़े हैं जो कि इस साल काफी पिछड़े हुए हैं। स्थिति यह है कि इस साल पंजीयन विभाग को मिला लक्ष्य पूरे होने की दूर-दूर तक संभावना नहीं है।
यह साल सोना और चांदी के लिए बूम का साल रहा। इन दोनों ही कीमती धातुओं के दाम ने इस साल ऐतिहासिक ऊंचाई हासिल की। कुछ ही समय के भीतर इनके दाम इस रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंचे, जिसकी कुछ महीनों पहले किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। चांदी जहां 4 लाख रुपये के ऊपर पहुंच गई थी, वहीं सोना भी 1.80 लाख रुपये तक पहुंचा। अब भले ही थोड़ी गिरावट आई है, लेकिन सोना-चांदी के भावों ने इस स्तर तक पहुंच कर निवेश (इन्वेस्टमेंट) के लिए लोगों को एक आकर्षक विकल्प मुहैया कराया है।
पहले जमीन-जायदाद थी पहली पसंद
इससे पहले निवेश के लिए लोगों की पहली पसंद सिर्फ और सिर्फ जमीन-जायदाद रहती थी। इसे लोग सुरक्षित विकल्प के साथ लंबे अंतराल में तगड़ा रिटर्न देने वाला मानते थे। सोना-चांदी ने लोगों की सोच ही बदल दी। इन कीमती धातुओं ने लोगों को बताया कि कम समय में तगड़ा रिटर्न पाना है तो वे (सोना-चांदी) जमीन-जायदाद से बेहतर हैं। यही कारण है कि सोना-चांदी के बढ़ते दामों के बीच लोगों ने इनमें जमकर निवेश किया और खूब सोना-चांदी खरीदा। दूसरी ओर प्रॉपर्टी की खरीदी से उनका मोहभंग हो गया।
पिछले साल से बेहद कम रजिस्ट्रियां
पंजीयन विभाग के आंकड़े भी इस बात की गवाही दे रहे हैं। बीते साल जिले भर में जमीन, मकान, दुकान आदि की कुल 17970 रजिस्ट्रियां हुई थीं। इसके मुकाबले इस साल मात्र 14246 रजिस्ट्रियां ही जनवरी माह के आखिर तक हो सकी है। वहीं पिछले साल जनवरी तक की स्थिति की तुलना करें तो भी इस साल कम रजिस्ट्रियां हुई हैं। पिछले साल जनवरी माह तक जिले में 15030 रजिस्ट्री हो चुकी थी। इस तरह अभी तक की स्थिति में 786 और कुल रजिस्ट्री के मामले में जिले में 3724 रजिस्ट्रियां कम हुई हैं।
कम रजिस्ट्री से आय भी हुई प्रभावित
जमीन-जायदाद की कम रजिस्ट्री होने से इस साल शासन को होने वाली आय पर भी सीधा असर पड़ा है। बीते साल 2024-25 में जिले को 96 करोड़ रुपये का लक्ष्य प्राप्त हुआ था। इसके मुकाबले जिले ने मुद्रांक शुल्क के रूप में रजिस्ट्रियों से 102 करोड़ रुपये की आय हासिल की थी। वहीं इस साल हालत यह है कि दिए गए लक्ष्य के आसपास तक भी पहुंचना बेहद मुश्किल लग रहा है। इस साल अभी तक मात्र 73.29 करोड़ रुपये की आमदनी हो सकी है, जबकि जनवरी तक के लिए जिले को 84 करोड़ रुपये का लक्ष्य मिला था।
कम रजिस्ट्री के लिए यह भी जिम्मेदार
सोना-चांदी के अलावा कुछ अन्य कारणों से भी इस साल कम रजिस्ट्रियां हो रही हैं। इनमें सबसे बड़ा कारण रिकॉर्ड में नाम का मिसमैच होना है। अब रजिस्ट्री के लिए स्लॉट बुकिंग से लेकर रजिस्ट्री तक के काम तभी हो पा रहे हैं जब आधार कार्ड और जमीन के रिकॉर्ड में बिल्कुल एक समान नाम हो। नाम या स्पेलिंग तक में थोड़ा भी अंतर आने पर संपदा 2.0 का पोर्टल स्लॉट बुक ही नहीं कर रहा है। दूसरी ओर ऐसे लोग बड़ी संख्या में हैं जिनके आधार में कुछ और नाम या स्पेलिंग है और जमीन के दस्तावेज में कुछ और ही नाम या स्पेलिंग है। इससे उनकी रजिस्ट्रियां ही नहीं हो रही हैं।
एक्सपर्ट व्यू: अब जमीन नहीं सोना-चांदी है लोगों की प्राथमिकता: पुनीत खंडेलवाल
इस संबंध में शहर के प्रमुख रियल एस्टेट कारोबारी पुनीत खंडेलवाल का कहना है कि वास्तव में सोना-चांदी ने इन्वेस्टमेंट के मामले में लोगों को सोच बदलने को मजबूर कर दिया है। पहले लोग इन्वेस्टमेंट के लिए जमीन को प्राथमिकता देते थे और सोना-चांदी केवल शादी-विवाह के उद्देश्य से जरुरी होने पर ही खरीदते थे। अब सोना-चांदी ने दिखाया है कि कम समय से इनसे जोरदार रिटर्न हासिल किया जा सकता है। इसलिए लोग अब सोना-चांदी ज्यादा खरीद रहे हैं।

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