Betul Ring Road Project: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। प्रदेश के अन्य जिलों में वहां के जनप्रतिनिधि एक के बाद एक सौगातें अपने जिलों को दिलवा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर बैतूल ऐसा विरला ही जिला होगा, जहां पूर्व में मंजूर हो चुके कार्यों तक की सौगातें नहीं मिल पा रही है। ऐसा ही एक कार्य है बैतूल रिंग रोड (बैतूल बायपास)। यह कार्य न केवल स्वीकृत हुआ था, बल्कि इसके लिए बजट में 157 करोड़ रुपये का प्रावधान तक हो गया था। यह कार्य जिस समय मंजूर हुआ था, तब कुछ जनप्रतिनिधियों में श्रेय लेने की होड़ मच गई थी, लेकिन बाद में कार्य शुरू कराने के कोई प्रयास नहीं हुए। इसके चलते यह बड़ा प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया है। 

बैतूल शहर को बायपास कर प्रमुख मार्गों को कनेक्ट करने वाला फिलहाल कोई मार्ग नहीं है। यही कारण है कि अधिकांश वाहन बैतूल शहर के बीच से होकर ही निकलते हैं। इनमें भारी वाहन भी शामिल हैं। इस गैर जरुरी ट्रैफिक के कारण आए दिन हादसे भी होते रहते हैं। इन हादसों में कई लोगों की जान तक जा चुकी है। इस समस्या के निराकरण हेतु बैतूल शहर के लिए एक बायपास रोड की जरुरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। प्रदेश की पिछली सरकार के समय यह सौगात बैतूल को मिली भी थी। यह रिंग रोड सोनाघाटी से मिलानपुर तक बनना था। यह सोनाघाटी से नागपुर-भोपाल नेशनल हाईवे से शुरू होता और बैतूल-परासिया स्टेट हाईवे को जोड़ते हुए मिलानपुर में फिर हाईवे से मिल जाता। यह रिंग रोड कुल 21 किलोमीटर लंबा बनना था। 

शहर ही नहीं गांवों को भी लाभ 

इस रिंग रोड के बनने से बैतूल शहर में आने वाला गैर जरुरी ट्रैफिक बाहर के बाहर निकल जाता। नागपुर-भोपाल हाईवे से स्टेट हाईवे जाने वाले वाहन बगैर शहर में आए हाईवे पर पहुंच जाते। इसी तरह आमला रोड पर भी इसी तरह यह वाहन रिंग रोड के जरिए पहुंच जाते। वहीं शहर से हाईवे पर पहुंचने में भी आसानी हो जाती। केवल शहर को ही नहीं बल्कि आसपास के कई गांवों को भी इस रिंग रोड का लाभ मिलता। 

बजट में स्वीकृत हुए थे 157 करोड़ 

यह रिंग रोड न केवल मंजूर हुआ था बल्कि 3 साल पहले बजट में इस रिंग रोड के लिए 157 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया जा चुका था। इसके बाद कोई दिक्कत इस काम को करने में नहीं थी, लेकिन जिले का यह दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि इतना होने के बावजूद यह काम शुरू नहीं हो सका और अब तो यह रिंग रोड पूरी तरह से ठंडे बस्ते में ही जा चुका है। अब तो स्वीकृत हुई राशि भी संभवत: लैप्स हो चुकी होगी।

जनप्रतिनिधियों ने नहीं दिया ध्यान 

यह रिंग रोड जब स्वीकृत हुआ था, तब जनप्रतिनिधियों में इस रोड की स्वीकृति के लिए श्रेय लेने की होड़ मच गई थी। जिन्होंने इस रोड के लिए धेले के प्रयास नहीं किए, वे भी खुद के प्रयासों से यह रोड मंजूर होने के दावे करते नहीं थक रहे थे। यह बात अलग है कि श्रेय ले लेने के बाद इस कार्य को धरातल पर शुरू कराने के कोई प्रयास उन्होंने नहीं किए। यही कारण है कि अब इस प्रोजेक्ट की न तो कोई जनप्रतिनिधि करता है और न ही विभागीय अधिकारी ही इसका जिक्र करते हैं। 

शहरवासी अब तक कर रहे इंतजार 

दूसरी ओर शहरवासी अभी भी रिंग रोड बनने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ते ट्रैफिक और आबादी के कारण रिंग रोड पर बेहद जरुरी हो चुका है। इसी तरह से यदि शहर के भीतर से भारी ट्रैफिक गुजरता रहा तो हादसों में और इजाफा होगा। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि शहर के लिए बेहद जरुरी इस प्रोजेक्ट का काम जल्द से जल्द शुरू कराया जाएं।