Wheat Procurement Registration: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। धान और ज्वार के लिए सिकमी किसानों के पंजीयन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आने पर प्रदेश शासन ने प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब खेत मालिक यह नहीं कह सकेंगे कि पंजीयन की जानकारी उन्हें है ही नहीं, बल्कि अब खेत मालिक की सहमति से ही सिकमी किसानों का पंजीयन हो सकेगा। इससे अब इस तरह का कोई गड़बड़झाला नहीं हो सकेगा। इधर जिले में गेहूं खरीदी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इसके लिए प्रबंधकों और ऑपरेटरों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। 

समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए आगामी 7 फरवरी से किसानों का पंजीयन शुरू हो रहा है। इससे पहले ज्वार और धान की खरीदी जिले में हुई थी। इन दोनों ही फसलों में सिकमी किसानों के नाम पर बड़ी गड़बड़ी सामने आई थी। सिकमी के नाम पर बड़ी संख्या में फर्जी रजिस्ट्रेशन हुए थे। यदि इनका खुलासा नहीं होता तो शासन को करोड़ों रुपये की चपत लग जाती। इस बार तो ऐसा होने से बच गया, लेकिन सतर्कता नहीं बरती गईतो भविष्य में भी ऐसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता। इसी को देखते हुए शासन ने इस बार पूरी प्रक्रिया में ही बड़ा बदलाव किया है। 

अभी तक ऐसे होता था रजिस्ट्रेशन 

अभी तक पंजीयन की जो प्रक्रिया थी, उसमें एग्रीमेंट के आधार पर अकेले सिकमी किसान ही उपज बेचने के लिए पंजीयन करवा लेते थे। यह इसलिए संभव होता था क्योंकि सिकमी किसान का ही मोबाइल नंबर लगता था, उसी पर ओटीपी आता था और उसके आधार पर वे पंजीयन करवा लेते थे। किसानों को इसकी जानकारी ही नहीं होती थी। 

इस बार ऐसे किया जाएगा पंजीयन 

इस बार ऐसा नहीं होगा। अब सिकमी किसान के साथ ही खेत मालिक का मोबाइल नंबर भी लगेगा। इसके बाद दोनों को ओटीपी आएंगे और दोनों के ओटीपी के आधार पर पंजीयन होगा। दोनों को अपने-अपने आधार व अन्य दस्तावेज भी अपलोड करने होंगे। इसके बाद ही पंजीयन होगा। ऐसे में खेत मालिक यह नहीं कह सकेंगे कि पंजीयन में उनकी सहमति नहीं थी या उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। सिकमी किसान को प्रारूप-ख भी अनिवार्य रूप से अपलोड करना होगा। पंजीयन के बाद भी राजस्व विभाग द्वारा इनका सत्यापन किया जाएगा। 

एग्रीमेंट भी 2 फरवरी के पहले का 

एक और बंदिश यह भी लगा भी दी गई है कि कभी भी एग्रीमेंट भी नहीं कराया जा सकेगा। शासन के निर्देश के अनुसार 2 फरवरी के पहले किया जा चुका एग्रीमेंट ही पंजीयन के लिए मान्य होगा। इसके बाद किए गए एग्रीमेंट के आधार पर पंजीयन नहीं होगा। इससे गड़बड़ी की मंशा से बाद में एग्रीमेंट कराकर पंजीयन का प्रयास किया भी जाता है तो उसमें सफलता नहीं मिलेगी। 

इस बार बोनस मिलेगा या नहीं

पिछले साल गेहूं खरीदी में किसानों को 2600 रुपये प्रति क्विंटल मिले थे। इसमें से 2425 रुपये समर्थन मूल्य और 175 रुपये राज्य सरकार द्वारा दिया गया बोनस था। इस बार समर्थन मूल्य ही 2585 रुपये घोषित कर दिया गया है। ऐसे में किसानों को इस बात को लेकर असमंजस है कि पता नहीं बोनस मिलता है या नहीं। हालांकि अभी तक बोनस को लेकर कोई आदेश-निर्देश आए भी नहीं हैं, लेकिन संभावना पूरी जताई जा रही है कि बोनस इस साल भी दिया जाएगा। जिससे किसानों को अच्छी कीमत मिल सकेगी। 

जिले को इतना गेहूं खरीदी का लक्ष्य 

जिले में इस साल भी 50 हजार मेट्रिक टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य रखा गया है। पिछले साल भी लक्ष्य तो इतना ही रखा गया था, लेकिन मात्र 20.25 मेट्रिक टन गेहूं ही खरीदा जा सका था जो लक्ष्य से आधा भी नहीं था। गत वर्ष जिले में 12206 किसानों ने पंजीयन कराया था, लेकिन लगभग ढाई हजार ने भी समर्थन मूल्य पर उपज बेची थी। 

शुरूआत में 74 केंद्रों पर होगा पंजीयन

जिले में खरीदी को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही है। इसके लिए प्रबंधकों और ऑपरेटरों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। सहकारी समितियों में बनाए गए 74 केंद्रों पर पहले दिन 7 फरवरी से ही पंजीयन शुरू हो जाएगा। इसके बाद आवेदन आने पर सीएससी, तहसील व जनपद कार्यालयों सहित अन्य स्थानों पर भी पंजीयन केंद्र शुरू किए जाएंगे। 

इनका कहना...

इस बार सिकमी किसानों के पंजीयन की व्यवस्था में बदलाव हुआ है। इस बदलाव से किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना नहीं रहेगी। पंजीयन की प्रक्रिया 7 फरवरी से प्रारंभ हो जाएगी। इसकी सभी तैयारियां हो गई हैं। 
- केके टेकाम, जिला आपूर्ति अधिकारी, बैतूल