Betul Villages Electrification: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। दुनिया ही नहीं बल्कि भारत भी चांद-सूरज तक पहुंच गया है, लेकिन दूसरी तरह जिले में 127 गांव या बसाहटें ऐसी हैं, जहां तक आज भी बिजली नहीं पहुंच पाई है। हालांकि अच्छी बात यह है कि इन गांवों तक जल्द ही बिजली पहुंचने वाली है। इसके साथ ही इन गांवों में रहने वाले ग्रामीणों की समस्याएं भी खत्म हो जाएंगी। बिजली कंपनी ने इसके लिए डीपीआर बना कर भिजवा दी है। 

बैतूल जिले में वनों की बहुलता है। इसके साथ ही यह पहाड़ी जिला भी है। यही कारण है कि कई गांव यहां घने जंगलों के बीच बसे हैं तो कई गांव पहाड़ी क्षेत्र में स्थित हैं। इन विभिन्न कारणों से आज तक भी जिले के कई गांवों तक बिजली नहीं पहुंच सकी है। इस बात पर भले ही यकीन न हो, लेकिन हकीकत यही है कि जिले में ही आज भी दर्जनों गांवों के हजारों की आबादी बिना बिजली के गुजर-बसर कर रही है। जिले में ऐसे गांवों या बसाहटों की संख्या 127 हैं। इनमें घोघरा, भतोड़ी, पालंगा, उतरी, बुरहानपुर आदि ग्राम शामिल हैं। बिजली नहीं होने से इन ग्रामों के लोगों को भारी परेशानियों के बीच जीवन यापन करना पड़ रहा है। 

मोबाइल नेटवर्क पहुंचा, बिजली नदारद

बिजली से वंचित ऐसे ही एक ग्राम घोघरा के ग्रामीण आज अपनी गुहार लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। यह गांव घोड़ाडोंगरी ब्लॉक और रामपुर पंचायत में आता है तथा ब्लॉक मुख्यालय से महज 45 किलोमीटर दूर स्थित है। मजे की बात यह है कि इस गांव तक मोबाइल नेटवर्क तो पहुंच गया, लेकिन बिजली नहीं पहुंच सकी है। इस गांव में 80 मकान है और आबादी लगभग 700 है। इसी गांव से सटे भतोड़ी गांव के भी यही हाल हैं। यहां भी आज तक बिजली नहीं पहुंच पाई है। 

कलेक्टर से लगाई ग्रामीणों ने गुहार 

ग्राम के प्रमोद कवड़े और पंच दिनेश उइके बताते हैं कि बिजली नहीं होने से भारी परेशानी उठाना पड़ता है। बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पाती। कैरोसिन भी नहीं मिलता, जिससे दीया जला सके। मोबाइल चार्ज करने के लिए भी बैटरी का सहारा लेना पड़ता है। अधिकांश लोग लकड़ी जलाकर उसके उजाले से ही काम चला रहे हैं। खेती में सिंचाई के लिए भी डीजल पंप का सहारा लेना पड़ रहा है। 

बारिश में होती सबसे ज्यादा परेशानी 

ग्रामीण नारायण धुर्वे, मुन्नालाल कड़ोपे और उड़तेश कवड़े बताते हैं कि सबसे ज्यादा परेशानी बारिश में होती है। इस दौरान जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है। कई बार यह जीव-जंतु लोगों को काट भी चुके हैं। इसके अलावा भी कई परेशानियों का सामना रोजमर्रा के जीवन में लोगों को करना पड़ रहा है। नल-जल योजना तक बिजली नहीं होने से चालू नहीं हो पाई है। 

सोलर लाइटिंग सिस्टम भी हुआ ठप 

बिजली नहीं होने के कारण शासन द्वारा करीब 15 साल पहले यहां सोलर लाइटिंग सिस्टम की व्यवस्था की गई थी। इसका कुछ समय तक तो लाभ मिला, लेकिन देखरेख और मेंटेनेंस के अभाव में कुछ ही समय में यह भी खराब होकर कबाड़ में तब्दील हो गए। ग्रामीणों के अनुसार इस बारे में अधिकारियों से लेकर सांसद-विधायक तक सभी से कई बार गुहार लगाई जा चुकी है। इसके बावजूद आज तक बिजली नहीं पहुंच पाई है। उन्होंने जल्द बिजली की व्यवस्था किए जाने की गुहार लगाई है। 

बिजली विहीन गांव अब जल्द होंगे रोशन 

अभी तक जिन गांवों में बिजली नहीं पहुंची है, वहां तक जल्द ही बिजली पहुंचने वाली है। इस संबंध में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के महाप्रबंधक बीएस बघेल ने बताया वन ग्राम होने सहित विभिन्न कारणों से अभी तक जिले की 127 बसाहटों या गांवों तक बिजली नहीं पहुंच पाई है। अब केंद्र सरकार के मोटा-4 प्रोजेक्ट के तहत इन गांवों में बिजली मुहैया कराई जाएगी। इस पर 28 करोड़, 80 लाख रुपये खर्च होंगे। इसके लिए जिले से डीपीआर राज्य को भिजवाई जा चुकी है। राज्य स्तर से भी केंद्र सरकार को डीपीआर भेजी जा चुकी है। इसे जल्द ही अनुमति मिलने और काम शुरू होने की संभावना है।