Tapti Barrage Repair Issue Betul: ताप्ती बैराज की मरम्मत पर अटका मामला, स्थायी समाधान के लिए नया निर्माण प्रस्तावित
Tapti Barrage Repair Issue Betul: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। बैतूल शहर और बैतूल बाजार नगर को पानी मुहैया कराने वाले ताप्ती बैराज खेड़ी की करीब 2 साल में भी मरम्मत शुरू नहीं हो पाई है। इसकी वजह यह है कि अभी यह बैराज जहां क्षतिग्रस्त हुआ है, वहां मरम्मत के लिए आधार देने सख्त जमीन नहीं मिल पा रही है। ऐसे में यदि मरम्मत की जाती है तो इसके दोबारा क्षतिग्रस्त होने का डर बना रहेगा। यही कारण है कि इसकी जगह नया बैराज बनाने की मशक्कत की जा रही है।
खेड़ी सांवलीगढ़ स्थित ताप्ती नदी पर बैतूल शहर के लिए पानी की व्यवस्था करने 7 करोड़ रुपये की लागत से बैराज बनाया गया था। निर्माण के बाद से ही यह बार-बार क्षतिग्रस्त होते रहा और नगर पालिका बार-बार इसकी मरम्मत करके काम चलाती रही। अभी भी यह बैराज क्षतिग्रस्त स्थिति में है और यही कारण है कि 1.5 एमसीएम क्षमता वाले इस बैराज में करीब 1 एमसीएम पानी ही स्टोर हो सका था।
जल संसाधन विभाग को भेजा मरम्मत का प्रस्ताव
बैराज के बार-बार क्षतिग्रस्त होने की स्थिति को देखते हुए नगर पालिका ने जल संसाधन विभाग से इसकी मरम्मत करवाने का निर्णय लिया था। इसके लिए अमृत योजना से 4 करोड़ रुपये की राशि इस पर खर्च की जाना है। यह बात अलग है कि करीब 2 साल पहले प्रस्ताव भिजवाने के बावजूद आज तक इसकी मरम्मत होना तो दूर काम शुरू तक नहीं हो सका है।
विभाग इसलिए नहीं कर रहा बैराज की मरम्मत
नपा से मिले प्रस्ताव के बाद जब जल संसाधन विभाग ने यहां पर सर्वेक्षण और स्वाइल टेस्टिंग करवाई तो पाया कि इस तरह के स्ट्रक्चर के बेस के लिए जो सख्त जमीन चाहिए, वह यहां है ही नहीं। इन हालातों में यदि इसकी मरम्मत कर भी दी जाए तो वह फिर से क्षतिग्रस्त हो जाएगा।
जल संसाधन विभाग होगा फिर बदनाम
अभी तो इसके क्षतिग्रस्त होने का ठीकरा नगर पालिका पर फूटता है, लेकिन विभाग ने मरम्मत की और फिर क्षतिग्रस्त हुआ तो फिर जल संसाधन विभाग की बदनामी होगी। इसी डर के कारण विभाग द्वारा इसकी मरम्मत नहीं की जा रही है। विभाग चाहता है कि बार-बार मरम्मत और बार-बार क्षतिग्रस्त होने की समस्या के स्थाई समाधान के लिए इसकी जगह नया बैराज बना लिया जाए।
नए बैराज के लिए डीपीआर बना रहा विभाग
जल संसाधन विभाग ने केवल प्रस्ताव ही नहीं दिया है, बल्कि नया बैराज बनाने के लिए डीपीआर लगभग बना भी लिया है। इसके सर्वेक्षण के लिए सहमति भी मिल चुकी है और यह भी करीब एक सप्ताह में शुरू हो जाएगा। समस्या यह है कि मौके पर उपयुक्त जमीन नहीं है और बैराज बहुत दूर बना नहीं सकते। ऐसे में कोशिश यही की जा रही है कि ऐसी साइट सलेक्शन करें जिससे व्यवस्थाएं प्रभावित न हो।
लागत भी हो जाएगी चार से पांच गुना
एक बड़ी समस्या फंड के इंतजाम की भी होगी। नपा के पास केवल 4 करोड़ का फंड है, लेकिन नया बैराज बनाने के लिए 4 से 5 गुना अधिक राशि लगेगी। ऐसे में अतिरिक्त राशि की व्यवस्था भी करना होगा। यदि जरुरत पड़ती है तो जल संसाधन विभाग भी इसके लिए शासन से फंड की मांग कर सकता है। कुल मिलाकर यदि पूरी गुणवत्ता के साथ नया बैराज बन जाता है तो बार-बार इसके क्षतिग्रस्त होने का डर नहीं रहेगा और लोगों को भी फिर पानी को लेकर किसी समस्या का सामना नहीं करना होगा।
इनका कहना...
ताप्ती बैराज की मरम्मत करने के लिए सख्त जमीन नहीं मिल पा रही है। ऐसे में मरम्मत के बाद भी क्षतिग्रस्त होने का डर रहेगा। इसलिए नया बैराज बनाने की प्लानिंग बनाई जा रही है।
- रोशन सिंह, कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन विभाग, बैतूल
बैराज की मरम्मत के लिए जल संसाधन विभाग को प्रस्ताव दिया गया है। विभाग ने कुछ तकनीकी अड़चनें बताई हैं। इसके साथ ही इसकी जगह नया बैराज बनाने का सुझाव दिया है।
- सतीश मटसेनिया, सीएमओ, नगर पालिका परिषद, बैतूल

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