Lashkare Charitable Trust: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। आर्थिक रूप से कमजोर और निराश्रित बच्चों की शिक्षा के सशक्तिकरण के लिए लश्करे हॉस्पिटल चैरिटेबल एज्युकेशन प्रमोशन ट्रस्ट ने रविवार को आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम में जिले के लगभग 6 स्कूलों के 130 बच्चों को शिक्षा किट प्रदान की। इतना ही नहीं ट्रस्ट के सपनों को साकार करने वाले इन बच्चों के शिक्षकों को भी ट्रस्ट द्वारा सम्मानित किया गया।

ट्रस्ट के मुखिया जिले के जाने-माने चिकित्सक डॉ. मनीष लश्करे का मानना है कि स्वस्थ्य समाज की गाड़ी स्कूल से होकर गुजरती है। उन्होंने उपस्थित बच्चों को खूब पढ़ो-आगे बढ़ो का मंत्र देते हुए कहा कि आप सभी भी इतनी पढ़ाई करें कि आने वाले समय में आप दूसरों की मदद कर सकें। यह ट्रस्ट शिक्षा के सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रहा है। आने वाले समय में ट्रस्ट के द्वारा प्रतिभावान बच्चों को स्कॉलरशिप के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी मदद की जाएगी। यह आयोजन रविवार को ट्रस्ट के संरक्षक डॉ. धरमचंद लश्करे के जन्मदिन के अवसर पर रखा गया था। 

दान नहीं सशक्तिकरण का माध्यम है ट्रस्ट

लश्करे हॉस्पिटल चैरिटेबल एज्युकेशन प्रमोशन ट्रस्ट का शुभारंभ 2025 में हुआ था। ट्रस्ट का उद्देश्य आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित रह जाने वाले बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर रखा गया है। ट्रस्ट शिक्षा के सशक्तिकरण का माध्यम रहेगा ना की किसी प्रकार के दान का। रविवार को आयोजित कार्यक्रम में बैतूल जिले के लगभग 6 स्कूलों और 2 छात्रावासों से चयनित किए गए 130 बच्चों को उनकी कक्षाओं के हिसाब से शिक्षा किट वितरित की गई। खास बात यह रही कि 130 में से अधिकांशत: बालिकाएं थीं। 

शिक्षा से बड़ा नहीं है कोई हथियार 

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना और दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ। इसके पश्चात एक नन्हीं बालिका ने गणेश वंदना की शानदार मनमोहक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम को डॉ. अनुज और अंकुश लश्करे ने संबोधित करते हुए बच्चों को अपने जीवन के अनुभव बताते हुए कहा कि शिक्षा सबसे बड़ा हथियार है। यदि आप शिक्षित हैं तो आप जीवन में सबकुछ हासिल कर सकते हैं। हमारा ट्रस्ट आपकी उड़ान का सहारा नहीं साथी रहेगा। आने वाले समय में प्रतिभावान लेकिन निराश्रित बच्चों को स्कॉलरशिप देने का भी ट्रस्ट का उद्देश्य है। इसके साथ ही हम प्रतिभावान बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी तैयारी करने में मदद करेंगे। 

पिता का सपना हो रहा पूरा 

ट्रस्ट के मुखिया डॉ. मनीष लश्करे ने अपने संबोधन में कहा कि ट्रस्ट के बनाने के पीछे मेरे पिता डॉ. धरमचंद लश्करे का सपना मुख्य कारण है। उनका मानना है कि आर्थिक कारणों से कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं होना चाहिए। हमारा ट्रस्ट शिक्षा के सशक्तिकरण का माध्यम रहेगा। हम इन बच्चों को जो भी दे रहे हैं वह पूरे विश्वास और उम्मीद के साथ दे रहे हैं कि यह खूब पढ़ेंगे और आगे बढ़ेंगे। इन बच्चों को शिक्षा देने वाले शिक्षकों का भी हम उनके त्याग और समर्पण के लिए सम्मान कर रहे हैं। श्री लश्करे ने कहा कि मीडिया के माध्यम से आने वाली सकारात्मक खबरें समाज को मजबूत बनाती हैं। 

शून्य पर सुनाई कविता 

कार्यक्रम में लश्करे परिवार की नन्हीं बेटी अवनी जैन ने शून्य का महत्व बताते हुए एक शानदार कविता प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन छात्रावास अधीक्षक सुरेंद्र कनाठे ने किया। आभार प्रदर्शन डॉ. नमिता लश्करे ने किया। कार्यक्रम में डॉ. अजय जैन, श्रीमती ममता जैन, कृति जैन, डॉ. सिद्धि लश्करे सहित लश्करे हास्पिटल का समस्त स्टाफ एवं शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। 

भगवत डेंगे के सम्मान से भर आई सभी की आंखें 

लश्करे हॉस्पिटल चैरिटेबल एज्युकेशन प्रमोशन ट्रस्ट द्वारा रविवार को किए गए कार्यक्रम के दौरान एक ऐसा भी पल आया जिसमें उपस्थित सभी की आंखें भर गई थीं। दरअसल वाक्या यह था कि लश्करे हॉस्पिटल में बीते 33 वर्षों से सेवा दे रहे भगवत डेंगे का ट्रस्ट द्वारा सम्मान किया गया। इतना ही नहीं ट्रस्ट के मुखिया डॉ. मनीष लश्करे ने बताया कि उनका बेटा डॉ. अनुज लश्करे जब छोटा था तो स्कूल से भागकर घर वापस आ जाता था। भगवत डेंगे उसे अपनी साइकिल पर बैठाकर ना सिर्फ स्कूल वापस लेकर जाते थे बल्कि कई बार तो उसके साथ क्लास में भी बैठ जाते थे।

श्री लश्करे कहा कि भगवत भैय्या को भी अनुज के डॉक्टर बनने का श्रेय है। ट्रस्ट ने भगवत डेंगे को शॉल श्रीफल के साथ 51 हजार रुपए की राशि प्रदान कर उनका सम्मान किया। इस दौरान भगवत डेंगे सहित कार्यक्रम में मौजूद लोगों की आंखें भर आई थी। सम्मान के दौरान पूरे लश्करे परिवार ने भगवत डेंगे के साथ फोटो भी खिंचवाई। भगवत डेंगे ने सम्मान मिलने पर कहा कि मेरे पास कहने के लिए कोई शब्द नहीं है और यह बहुत ही भावुक करने वाला पल है। कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने लश्करे परिवार के इस कार्य की मुक्त कण्ठ से सराहना की।