Betul New Filter Plant: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। नगर पालिका के शुक्रवार को हुए सम्मेलन में नया फिल्टर प्लांट बनाने का प्रस्ताव पारित हुआ है। यह बात अलग है कि नपा के पास फिलहाल इतना पानी ही नहीं है कि वह अधिक क्षमता वाले फिल्टर प्लांट के लिए मुहैया कराया जा सके। मजेदार बात यह है कि अभी जो फिल्टर प्लांट है, उसे तक नपा भरपूर पानी उपलब्ध नहीं करा पा रही है। ऐसे में नया फिल्टर प्लांट बनाने की नपा की जिद किसी को भी समझ नहीं आ रही है। कायदे से नपा को पहले पानी की व्यवस्था करना था और फिर नया फिल्टर प्लांट बनाना था। 

शहर में 17400 नल कनेक्शनों के जरिए नपा पानी मुहैया कराती है। इसके लिए 9 टंकियां और 190 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन का नेटवर्क है। रोजाना 90 लाख लीटर पानी की सप्लाई की जाती है। सप्लाई किए जाने वाले पानी को फिल्टर करने के लिए ग्रीन सिटी विवेकानंद वार्ड में नपा का फिल्टर प्लांट है। खेड़ी स्थित ताप्ती बैराज से पानी पहले फिल्टर प्लांट तक पहुंचता है और फिर यहां इसे फिल्टर करने के बाद टंकियों तक और वहां से फिर यह लोगों के घरों तक पहुंचता है। 

क्षमता का कितना हो रहा उपयोग 

अभी चल रहे फिल्टर प्लांट की क्षमता 22 एमएलडी की है। इसका मतलब है कि इस प्लांट में रोजाना 22 मिलियन लीटर पानी फिल्टर किया जा सकता है। यह बात अलग है इस क्षमता का पूरा उपयोग आज तक एक बार भी नहीं हुआ है। नपा के पास न इतना पानी है और न ही इतने संसाधन कि वह रोजाना इतना पानी प्लांट तक पहुंचा सके। नपा रोजाना 12 से 15 एमएलडी पानी ही यहां पहुंचा पाती है। 

एक टंकी तो भर ही नहीं पा रहे 

नगर पालिका की स्थिति यह है कि वह शहर की पूरी टंकियां तक नहीं भर पा रही है। इन 9 टंकियों के अलावा नगर पालिका ने ज्योति टॉकीज के सामने एक और टंकी एक साल पहले बनाई थी। इस टंकी के हाल यह है कि इसे अभी तक एक बार भी नहीं भरा जा सका है। भरना तो दूर इसे पाइप लाइन से कनेक्ट तक नहीं किया गया है। 

पानी के लिए बस इतने ही हैं स्रोत 

नपा के पास वर्तमान में पानी के स्रोत बहुत सीमित हैं। एक तो माचना एनीकट है जिसकी क्षमता महज 0.25 एमसीएम है और दूसरा ताप्ती बैराज, जिसकी क्षमता 1.5 एमसीएम है। अभी बैराज के क्षतिग्रस्त होने से उसमें 1 एमसीएम पानी ही स्टोर हो पा रहा है। एनीकट का पानी कम होने पर लाखापुर डैम से पानी एक बार पानी लिया जा सकता है वहीं ताप्ती बैराज का पानी खत्म होने पर वहां भी दूसरे डैम से पानी लिया जाता है। अभी नपा ताप्ती बैराज से पानी लेती है और माचना का पानी इमरजेंसी के लिए रखा रहता है। 

एक भी नया स्रोत अभी तय नहीं 

पानी के स्रोत बढ़ाने के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा प्रयास जरुर किए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक एक भी नया स्रोत तय नहीं हुआ है। कार्यपालन यंत्री द्वारा स्रोत तलाशे जाने के लिए एक टीम भिजवाई गई थी, जिसने ताप्ती पर 2 और माचना पर 3 स्थानों को उपयुक्त पाया है, हालांकि इन्हें लेकर अभी विधिवत कोई प्रक्रिया शुरू तक नहीं हुई है। ऐसे में नए स्रोत की यह प्रक्रिया कब आकार ले पाएगी, इसे लेकर फिलहाल कुछ भी नहीं कहा जा सकता। 

नए प्लांट के लिए कहा से आएगा पानी

इन हालातों में हर किसी के जेहन में एक ही सवाल खड़ा हो रहा है कि यदि नया फिल्टर प्लांट बना भी लिया जाए तो उसके लिए पानी कहां से लाएंगे। जानकारों का कहना है कि बेहतर होता कि नगर पालिका नया फिल्टर प्लांट बनाने की जल्दबाजी करने के बजाय पहले पानी के नए स्रोत तलाशें और उसके बाद प्लांट बनाने की सोचे। अन्यथा इन हालातों में यह करोड़ों की फिजूलखर्ची ही होगी। 

चालू प्लांट का पूरा उपयोग क्यों नहीं

दूसरी ओर लोगों को यह बात भी समझ नहीं आ रही है कि यदि अभी ज्यादा पानी सप्लाई की जरुरत पड़ रही है तो चालू प्लांट को पूरी क्षमता के साथ क्यों नहीं चलाया जा रहा है। यदि नगर पालिका को लग रहा है कि उसके पास पानी भरपूर है और केवल फिल्ट्रेशन भर ज्यादा करके उसकी सप्लाई करना है तो अभी वाले फिल्टर प्लांट को ही पूरी क्षमता के साथ चला लिया जाए तो लगभग दोगुना पानी सप्लाई किया जा सकता है।